2020 ने जिंदगी को दिखाया आईना….जिसे मौत के सैय्या तक नहीं भूला सकते!

दिलीप शर्मा।  साल 2020 इतिहास भरा समय रहा। इस इतिहास में लोगों ने दुख और पीड़ा देखा। एक तरह से हम कह सकते है कि दुनिया ने हमें जिंदगी का आईना दिखाया। हमें कैसे रहना है, कैसे चलना है, परिवार की जिम्मेदारी, धन की अहमियत, परोपकार जैसे कई पहलू का जन्म हुआ, जिसमें समानता का अधिकार शामिल है। इसलिए कि 2020 में न छूआछूत, धर्म जैसी बातों की कोई अहमियत नहीं रही। आइए जानते हैं 2020 में हमने क्या-क्या देखा और हमने क्या सीखा…

साल 2020 JNU हिंसा, शाहीन बाग दिल्ली दंगे के  साथ शुरुआत हुई। और अंत दिल्ली किसानों के अंदोलन के साथ खतम होने वाली है। लेकिन इसी बीच वैश्वविक महामारी कोरोना हमारे बीच आया, जिसमें दुनिया के हर व्यक्ति प्रभावित होने के साथ सहम गया।

डर भगाने हर कदम

23 मार्च 2020 का वह दिन जिसमें हमें अपने ही घर में कैद (लॉकडाउन) होना पड़ा था। घर पर खाने को था या नहीं इससे कोई सरोकार नहीं था, चारों ओर सन्नाटा, डर और भय का माहौल। भारत फिर राज्य, तहसील, ब्लॉक और गांवों तक हमारे बीच कोरोना संक्रमण पहुंचा। जो आज भी इसकी पीड़ा हम महसूस कर रहे हैं।

बात सबसे पहले लॉकडाउन की करें, जिसमें हमने डर भगाने घंटी, शंख और घर के ऑगन में दीप जलाएं। इससे डर भगा ये तो हम नहीं कहते लेकिन पूरे विश्व कोराना वायरस के सामने नतमस्तक हो चुका था। स्थिति ये रही कि विश्व के चहूओर विकराल संकट दिखने लगी। एक के बाद एक लॉकडाउन ने जिंदगी को भूखे रहना भी सीखा दिया। यही नहीं कम खर्च में जीवन को कैसे चला सकते हैं इसका सीख कोरोना ने दी।

इन लोगों को इस काल में हुई सबसे अधिक दिक्कत

श्रमिकों को हुई सबसे अधिक परेशानी: कोरोना संकट में सबसे अगर अधिक प्रभावित हुए तो वे थे मजदूर जो रोजी-रोटी के लिए घर छोड़कर बाहर कमाने खाने गए थे। लॉकडाउन के बाद पूरे देश में श्रमिकों की हालत दयनीय थी। इस दौरान कई श्रमिक कोरेना संक्रमण के ही बेमौत मौत के मूंह में समा गए।

राशन हुई खत्म: सामान्य परिवार जिनका राशन हर माह खत्म हो जाती है…ऐसे समय में घर में ना किराना था ना सब्जी का स्टाक। इधर, लॉकडाउन के कारण दुकानें बंद, बिना नमक के भी भोजन करना पड़ा। स्थिति ये रही कि सिर्फ चावल और आचार चटनी के साथ कई दिनों गुजारा करना पड़ा। लेकिन इसमें भी कोई दो राय नहीं रहा कि व्यक्ति  के पास धन होते हुए भी कोई काम नहीं रहा।

किराए के मकान

किराए के मकान: लॉकडाउनक के दौरान वे लोग अधिक परेशान हुए जिनके किराए के घर थे और इसी दौरान उनकी नौकरी भी छूट गई थी। ऐसे में उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। यदि खुद का घर होता तो कम से कम मकान मालिक के तगादे से बच जाते।मांसाहार से बनी दूरी : कोरोना काल  में लोगों ने जाना की बैक्टीरिया और वायरस अलग-अलग होते हैं। बैक्टीरिया से तो बचा जा सकता है लेकिन, वायरस से बचना मुश्‍किल है। इस दौरान देखने को मिला कि लोग पूरी तरह से मांसाहारी से दूरी बना लिए।

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शराब से छूटकारा: समाज में सबसे बड़ी विडबंना के रूप में खड़ी शराब की बात करें, तो कोरोना काल और लॉकडाउन होने के कारण के कारण शराब दुकानें बंद हुई। इसका असर रोज के शराब पीने वालों पर पड़ा। उन्हें अनिद्रा होने के साथ कई प्रकार से शरीर में पीड़ा होने लगी। लेकिन समय के साथ समझौता करते हुए लोग समय निकालते गए। इस तरह कोरोना काल में लाखों लोगों का शराब छूटा  अगर नहीं भी छूट पाया तो नियमित शराब पीने की लत खत्म हो गई। लोग जान गए कि बिना शराब के भी जिंदगी जीया जा सकता है।

घटनाएं शायद ही कभी भूली जाएं

राम मंदिर के शिलान्यास ने धार्मिक हर्ष को चरम पर पहुंचाया तो कोरोना के खौफ के बीच कभी मरकज तो कभी तबलीगी जमात चर्चा में रही। इस बीच सैकड़ों किलोमीटर तक पैदल जाते प्रवासियों का दर्द ताउम्र सालता रहेगा। दरअसल, साल 2020 अब विदा लेने की तैयारी कर चुका है। अब यह महज एक नंबर बनकर रह जाएगा, लेकिन बीते 365 दिन के दौरान हुईं घटनाएं शायद ही कभी भूली जाएं।

कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं जिसे भुलाया नहीं जा सकता

23 फरवरी से 29 फरवरी तक दिल्ली के उत्तर पूर्वी हिस्से में दंगा में 53 लोगों ने जान गंवाई।
17 मार्च को कोरोना से कर्नाटक में पहली मौत दर्ज की गई।
कोरोना संक्रमण से देश को बचाने के लिए 25 मार्च से 21 दिन का पूर्ण लॉकडाउन लगाया।
8 मई को महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रेलवे ट्रैक पर सो रहे 16 श्रमिकों पर मालगाड़ी गुजरने से मौत।

20 मार्च 2020 निर्भया के चारों दोषियों पवन, मुकेश, अक्षय और विनय फांसी हुई।

23 मार्च को एमपी में उलटफेर शिवराज सिंह ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।
15-16 जून की रात लद्दाख बॉर्डर पर भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प।
साल 2020 बॉलीवुड के लिए बेहद खराब साबित हुआ। सुशांत सिंह, ऋषि कपूर और इरफान खान समेत बॉलीवुड के कई दिग्गज दुनिया को अलविदा किया।
साल के आखिरी महीने में कृषि कानून को लेकर किसानों का अंदोलन जो अब तक जारी है।

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