कृषि Act पर विवाद के बीच जानिए MODI सरकार में कितनी बढ़ी किसानों की आय?

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नई दिल्ली. कृषि Act  के प्रावधानों को लेकर किसानों और सरकार के कुछ सहयोगियों में नाराजगी है. इसके खिलाफ किसान आंदोलन कर रहे हैं. उसमें किसानों की आय का मसला भी उठाया जा रहा है.
क्योंकि खेती-किसानी से जुड़े हर कार्यक्रम में PM नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) 2022 तक किसानों की इनकम डबल करने की बात करते हैं. अपने इस एजेंडे को पूरा करने के लिए उन्होंने अप्रैल 2016 में एक अंतर-मंत्रालयी समिति का गठन किया था
ताकि किसानों की आय (Farmers Income) को दोगुना करने से संबंधित पहलुओं की जांच की जा सके. समिति ने सितंबर 2018 में सरकार को अपनी रिपोर्ट दे दी. इसीलिए सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए 2015-16 को ही आधार वर्ष बनाया.

लेकिन आधार वर्ष से अब तक कितनी आय बढ़ी, सरकार के पास इसका जवाब नहीं है. लोकसभा और राज्यसभा में सांसद सरकार से बार-बार सवाल करते हैं लेकिन उत्तर नहीं मिलता. जबकि आय दोगुनी करने का मुद्दा बीजेपी (BJP) के लिए काफी अहम है.

सांसद दुष्यंत सिंह ने पूछा है कि 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के लिए कितने फीसदी वार्षिक वृद्धि की जरूरत है. क्या वर्तमान वृद्धि से इसे पूरा किया जा सकता है?
जवाब में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि वर्ष 2015-16 की आधार आय के साथ 2018-19 और 2019-20 के दौरान किसानों की आय की तुलना करने के लिए हाल के दिनों में कोई सर्वेक्षण नहीं किया गया है

. जब सर्वे होगा तब आय का अनुमान लगेगा. सरकार के प्रयास कृषि के विकास और किसानों की आय पर सकारात्मक प्रभाव डाल रहे हैं. हम 2022 तक आय दोगुनी करने का लक्ष्य हासिल कर लेंगे.

किसानों की इनकम देश की प्रति व्यक्ति आय से भी कम
>>2013 में आई एनएसएसओ (NSSO) की सर्वे रिपोर्ट के आधार पर सरकार किसानों की मासिक आय 6,426 रुपये (सालाना 77,112) ही बताती आई थी. लेकिन, 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की रणनीति संबंधी रिपोर्ट पेश करने वाली डबलिंग फार्मर्स इनकम (DFI) कमेटी ने 2016 में वार्षिक आय का अनुमान 96,703 रुपये लगाया.

यही इनकम डबल करने का आधार वर्ष है और आय भी. अब तक कोई नया सर्वे नहीं हुआ है इसलिए इसे ही किसानों की मौजूदा आय माना जाएगा. यानी किसान की आय देश की प्रति व्यक्ति आय (1.35 लाख) से काफी कम है.

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ऐसे हालात में कैसे बढ़ेगी आय
लोकसभा चुनाव में यह बड़ा मुद्दा था. बीजेपी ने किसानों की आय दोगुनी करने की खूब मार्केटिंग की. अब इस मसले पर विपक्ष बार-बार सवाल कर रहा है. कई बार सत्ता पक्ष के सांसद भी सवाल पूछ लेते हैं.

जबकि सरकार साफ-साफ जवाब नहीं दे पा रही. राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन के नेता राहुल राज कहते हैं कि सरकार किसानों पर जिस तरह से मनमाने कानून थोप रही है. न्यूनतम समर्थन मूल्य तक नहीं दिला पा रही है.

प्राकृतिक आपदा में फसल नुकसान पर कोई मुआवजा नहीं मिल रहा है. ऐसे हालात में तो आय बढ़ने की जगह घट सकती है.
इनकम बढ़ी होती तो सरकार जरूर बताती: आनंद

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राष्ट्रीय किसान महासंघ के संस्थापक सदस्य बिनोद आनंद कहते हैं, “जब तक एग्रीकल्चर ग्रोथ लगातार 10 फीसदी नहीं होगी, किसानों की आय सही मायने में दोगुनी नहीं हो सकती.

दुर्भाग्य से इतनी ग्रोथ किसी साल रही नहीं. मुझे लगता है कि 2016 के बाद किसानों की आय बढ़ी नहीं है, इसीलिए सरकार इस बारे में कुछ बता नहीं पा रही है. वरना उपलब्धि कौन नहीं बताता, वो भी किसानों से जुड़ी. उचित दाम न मिलने की वजह से किसानों की स्थिति खराब है.”

दलवई का दावा 2022 तक हासिल कर लेंगे लक्ष्य
हालांकि, डबलिंग फार्मर्स इनकम कमेटी के अध्यक्ष डॉ. अशोक दलवाई ने न्यूज18 हिंदी से बातचीत में कहा कि कोविड के बहाने कृषि क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर पर ही करीब 1 लाख करोड़ रुपये के निवेश का एलान हुआ है.

कृषि से जुड़े कुछ नीतिगत सुधार भी हुए हैं. किसानों की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने, उत्पादन लागत कम करने, मार्केट उपलब्ध करवाने और उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार काम कर रही है. इससे किसानों की आय में वृद्धि होगी. हम 2022 तक यह लक्ष्य पा लेंगे.

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कैसे दोगुनी होगी अन्नदाता की आय
डीएफआई कमेटी ने किसानों की आय में वृद्धि के 7 मुख्य स्रोतों की पहचान की है. जिसमें फसल उत्पादकता में सुधार, पशुधन उत्पादकता में सुधार और उत्पादन लागत में बचत आदि शामिल है.
>> इस वृद्धि का बड़ा आधार पीएम किसान सम्मान निधि स्कीम बन सकती है. इसके तहत किसानों को हर साल 6000 रुपये खेती के लिए दिए जा रहे हैं.

>>1 लाख करोड़ का इंफ्रास्ट्रक्चर फंड

>>10 हजार किसान उत्पादक संगठन (FPO)

>>किसान क्रेडिट कार्ड की कवरेज बढ़ाकर. इसे पीएम किसान स्कीम से जोड़ा गया है.

>>स्वायल हेल्थ कार्ड योजना, ताकि खाद का जरूरत के हिसाब से ही इस्तेमाल हो.

>>परम्परागत कृषि विकास योजना के तहत जैविक खेती को बढ़ावा.

>>हर मेड़ पर पेड़ अभियान यानी कृषि वानिकी को बढ़ावा.

>>बास को पेड़ की श्रेणी से हटाकर उसकी खेती को प्रोत्साहन. पहले बांस काटने पर थी रोक.

>>न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को उत्पादन लागत से 150 फीसदी तक बढ़ाने की मंजूरी.

>>100 फीसदी नीम कोटेड यूरिया से जमीन की सेहत सुधारने का अभियान.

कब कितनी थी किसान की औसत आय
एनएसएसओ के मुताबिक 2012-13 में किसानों की सालाना आय 77,112 रुपये थी. इसके बाद डबलिंग फार्मर्स इनकम कमेटी ने अनुमान लगाया. इसके मुताबिक 2013-14 में 88,713 रुपये, 2014-15 में 94,314 और 2015-16 में 96,703 रुपये थी. केंद्र शासित प्रदेशों में किसानों की आय ज्यादा है.

अन्य राज्यों की बात करें तो पंजाब नंबर एक पर है. यहां किसान औसतन 2,30,905 रुपये सालाना कमाता है. दूसरा नंबर हरियाणा का है, जहां 1,87,225 रुपये कमाई है. नीतीश कुमार के शासन वाला बिहार इस लिस्ट में सबसे पीछे है. वहां पर किसानों की औसत वार्षिक कमाई सिर्फ 45,317 रुपये है.

 
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