कोमाखान

27 दिन से कर रहे आंदोलन, प्रशासन सिर्फ डराने में जुटी , इधर बच्चों को नहीं मिल रहा भोजन का अधिकार

छत्तीसगढ़। ऑगनबाड़ी कार्यकर्ता और साहयिका 27 दिन से मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। लेकिन सरकार की ओर से आंदोलन को समाप्त करने बर्खास्त की कार्रवाई कर डराने की कोशिश की गई। लेकिन कार्यकर्ता और सहायिका आंदोलन को समाप्त करने के बजाए और तेज कर दिए हैं। अपने घर परिवार को छोड़कर रोजाना धरना-स्थल पर सरकार को कोसने पहुंच रहे हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार महिलाओं के प्रति जरा भी गंभीर नहीं है।
0 दरअसल, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को रोजाना दस घंटे तक काम करने पर चार हजार रुपए और सहायिकाओं को लगभग दो हजार रुपए प्रति महीना मानदेय मिलती है। कार्यकर्ताओं के मुताबिक इससे उनके परिवार का गुजारा तो क्या खुद का खर्च भी नहीं निकल पाता। अपनी गुहार लगाते हुए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने सरकार का ध्यान कई बार अपने वेतनमान में वृद्धि की ओर खींचा, लेकिन सरकार ने ना तो उनकी सुविधाएं बढ़ाईं और ना ही वेतन, नतीजतन हजारों की तादाद में महिला कार्यकर्ता बेमियादी हड़ताल पर हैं।
0 छत्तीसगढ़ में महिला बाल विकास विभाग से जुड़ी ज्यादातर योजनाएं आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए संचालित होती हैं। इसमें मध्यान भोजन, शिशु आहार, गर्भवती महिलाओं की देखभाल और महिलाओं के विकास और कल्याण से जुड़ी कई योजनाएं शामिल हैं।
इन मांगों को लेकर कर रहे आंदोलन
-छत्तीसगढ़। ऑगनबाड़ी कार्यकर्ता और साहयिकाछत्तीसगढ़। ऑगनबाड़ी कार्यकर्ता और साहयिका ठहरा रही हैं। इनके अनुसार वे सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं का संचालन जिम्मेदारी से करती हैं, लेकिन सरकार उनके प्रति अपनी कोई जिम्मेदारी नहीं दिखा रही है। कार्यकर्ताओं ने सरकार पर आरोप लगाया कि आगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं के साथ अन्याय हो रहा है।

0 राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को समझाइश देते हुए कहा था कि अगर नहीं मानेंगी तो संबंधित जिला कलेक्टरों द्वारा उनकी सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश के बाद 6 सूत्रीय मांग कर रहे कार्यकर्ता और साहयिका और भड़क गए हैं। बतादें कि प्रदेश भर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपनी छह सूत्रीय मांगों को लेकर इस महीने की 5 तारीख से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।

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