रायपुर के एक घर में अवैध तरीके से रखे गए थे 29 बच्चे, मानव तस्करी की आशंका

रायपुर.  राजधानी रायपुर से लगे नवा रायपुर में एक बड़ा मामला सामने आया है. नवा रायपुर में मंत्रालय से करीब पांच किलोमीटर दूर अवैध रूप से बालगृह चलाया जा रहा था. इसमें अवैध रूप से 29 बच्चों को रखा गया था. महिला एवं बाल विकास की टीम ने छापा मारकर 19 बच्चों को छुडा़या है. भिलाई की एक स्वयंसेवी संस्था लाईफ शो फाऊंडेशन इस बालगृह को बिना शासन की अनुमति से चला रही मानव तस्करी की आशंका भी व्यक्त कर रहा है.

महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी अशोक पाण्डेय ने न्यूज 18 बताया कि दस बालक और नौ बालिकाएं है. सभी बच्चे मंडला और आसपास के हैं. बालकों को बालगृह में और बालिकाओं को बालिका गृह में रखा गया है. पॉम्पलेट बांटकर चंदा भी मांग रहे थे. इसकी शिकायत आसपास के लोगों ने चुपके से की थी. राखी थाने में शिकायत दी गई है. मंडला के बच्चे हैं. मानव तस्करी का मामला बनेगा. इनके माता पिता एकल हैं. शुरुआती जानकारी में सामने आया है. कोविड के कारण इनमें से किसी के माता तो किसी के पिता नहीं रहें. अन्य राज्यों से बिना अनुमति बच्चों को लाया गया है.

जांच के बाद कार्रवाई

हालांकि जांच के बाद ही तमाम कार्रवाई की बात कही जा रही है. इन सभी बच्चों को माना स्थित बालगृह में भेजा गया है. इसका संचालन करने वाली संस्था को नोटिस दिया गया है. साथ ही अवैध रूप से बालक बालिकाओं को एक ही कमरे में रखने को लेकर मामला दर्ज किया गया है. राखी थाने के अंर्तगत सेक्टर-29 में भिलाई की संस्था लाईफ शो फाऊंडेशन अवैध रूप से इस बालगृह का संचालन कर रहा था. जब इसकी जानकारी महिला एवं बाल विकास विभाग को मिली तो विभाग की निरीक्षण समिति ने किशोर न्याय अधिनियम के नियमों का उल्लंघन पाते हुए कार्रवाई की. सभी 19 बच्चों को माना कैंप में बाल कल्याण समिति के सामने प्रस्तुत किया गया. बच्चों को एसओएस बालगृह में रखा गया है. इन बच्चों को एक साथ जमीन में गद्दा डालकर सुलाया जा रहा था.

हो रही थी चंदा वसूली

महिला एवं बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी अशोक पाण्डेय ने न्यूज 18 बताया कि दस बालक और नौ बालिकाएं है. सभी बच्चे मंडला और आसपास के हैं. बालकों को बालगृह में और बालिकाओं को बालिका गृह में रखा गया है. पॉम्पलेट बांटकर चंदा भी मांग रहे थे. इसकी शिकायत आसपास के लोगों ने चुपके से की थी. राखी थाने में शिकायत दी गई है. मंडला के बच्चे हैं. मानव तस्करी का मामला बनेगा. इनके माता पिता एकल हैं. शुरूआती जानकारी में सामने आया है कोविड के कारण इनमें से किसी के माता तो किसी के पिता नहीं रहें.

क्या कहता है नियम

किशोर न्याय नियाम अधिनियम 2015 के मुताबिक ही बालगृहों का संचालन किया जा सकता है. जिन बालक–बालिकाओं को सुरक्षा, देखभाल की जरूरत होती है, उनके पाए जाने पर 24 घंटों के भीतर जिला बाल संरक्षण समिति के समक्ष प्रस्तुत करना होता है. विधिवत आदेश मिलने पर ही किसी संस्था को सौंपा जाता है. नियमों के अनुसार बालक-बालिकाओं को अलग-अलग कक्ष में रखा जाता है. इसका उल्लंघन किया जाता है.