बागबाहरा। बागबाहरा कृषि उपज मंडी में हुई धान जब्ती की कार्रवाई को लेकर अब पीड़ित पक्ष का बयान सामने आया है। पीड़ित ने प्रशासनिक कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि गोदाम में भंडारित 800 कट्टा धान पूरी तरह वैध था, इसके बावजूद बिना ठोस आधार के जब्ती की कार्रवाई की गई।
पीड़ित पक्ष के अनुसार, गोदाम में रखा गया धान रबी फसल का था, जिस पर मंडी द्वारा सौदा पत्रक जारी किया जा चुका था। साथ ही मंडी द्वारा निर्धारित मंडी शुल्क एवं निराश्रित शुल्क का विधिवत भुगतान भी किया गया था। पीड़ित का कहना है कि इन तथ्यों की पुष्टि प्रशासन द्वारा तैयार पंचनामा एवं ज़ब्तीनामा में भी स्पष्ट रूप से दर्ज है।
दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर नहीं मिला
पीड़ित ने अपने बयान में कहा है कि संबंधित धान किसानों से वैध रूप से खरीदा गया था और उसे केवल अस्थायी रूप से गोदाम में भंडारित किया गया था। आरोप है कि कार्रवाई के दौरान उन्हें सौदा पत्रक एवं अन्य आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का उचित अवसर नहीं दिया गया। पीड़ित का दावा है कि प्रशासनिक दबाव में सक्षम अधिकारी द्वारा अनुचित कार्रवाई करते हुए जब्ती प्रकरण तैयार किया गया।
पूर्व में कोई शिकायत नहीं
पीड़ित पक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि वह लंबे समय से कृषि उपज के व्यापार से जुड़ा हुआ है और अब तक उसके विरुद्ध किसी भी प्रकार की गंभीर शिकायत दर्ज नहीं रही है।
प्रशासनिक पक्ष
वहीं प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई मंडी अधिनियम 1972 की संबंधित धाराओं के तहत की गई है। प्रशासन के अनुसार नियमों के उल्लंघन की आशंका पाए जाने पर प्रकरण दर्ज किया गया है। फिलहाल मामला जांचाधीन है और आगे की कार्रवाई सक्षम प्राधिकारी के निर्णय के बाद की जाएगी।
निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित पक्ष ने जिला प्रशासन और मंडी बोर्ड से अपील की है कि मामले की निष्पक्ष एवं तथ्यात्मक जांच कराई जाए और यदि कोई त्रुटि नहीं पाई जाती है तो जब्ती प्रकरण को वापस लिया जाए।





