खुर्सीपार के बाद साल्हेभाठा: जल जीवन मिशन में ₹32.65 लाख खर्च, फिर भी गांव प्यासा

खुर्सीपार के बाद साल्हेभाठा: जल जीवन मिशन में ₹32.65 लाख खर्च, फिर भी गांव प्यासा

दिलीप शर्मा, बागबाहरा (महासमुंद)। महासमुंद जिले में जल-जीवन मिशन की हकीकत लगातार सवालों के घेरे में है। खुर्सीपार के बाद अब बागबाहरा ब्लॉक के साल्हेभाठा गांव में भी गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। रिकॉर्ड के अनुसार ₹32.65 लाख खर्च हो चुके हैं, लेकिन गांव में योजना अधूरी पड़ी है।


योजना का आधिकारिक ब्योरा

  • योजना नाम: SVS SALHEBHATHA

  • योजना ID: 40027838

  • कुल स्वीकृत लागत: ₹56.31 लाख

  • अब तक खर्च: ₹32.65 लाख

  • स्थिति (पोर्टल पर): प्रगति पर


रिकॉर्ड बनाम जमीनी सच्चाई

रिकॉर्ड मेंजमीनी स्थिति
₹32.65 लाख व्ययटंकी अधूरी
योजना “प्रगति पर”एक साल से काम बंद
65 परिवार लाभार्थीसिर्फ 1 घर को नल

ग्रामीणों का कहना है कि केवल पानी टंकी खड़ी की गई है।
न बाउंड्री पूरी, न पाइपलाइन बिछी, न घर-घर कनेक्शन।


मजदूरी और भुगतान पर सवाल

स्थानीय मजदूरों और दुकानदारों का आरोप:

  • महीनों से भुगतान लंबित

  • सामग्री सप्लाई का पैसा बकाया

  • ठेकेदार साइट छोड़कर चला गया

यदि ₹32.65 लाख खर्च हो चुके हैं, तो भुगतान किन खातों में गया?


पानी की समस्या जस की तस

गांव के 65 परिवार आज भी:

  • हैंडपंप पर निर्भर

  • भूजल स्रोतों का उपयोग

  • गर्मी में जल संकट की आशंका

यदि योजना समय पर पूरी होती, तो सुरक्षित पेयजल की सुविधा मिल सकती थी।


बड़ा सवाल अब यह

खुर्सीपार में ₹20.78 लाख,
साल्हेभाठा में ₹32.65 लाख —

दोनों जगह रिकॉर्ड में खर्च,
दोनों जगह जमीन पर अधूरा काम।

क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है
या फिर वित्तीय अनियमितता का बड़ा पैटर्न?


ग्रामीणों की मांग

  • तकनीकी और वित्तीय जांच

  • बकाया मजदूरी का तत्काल भुगतान

  • दोषी ठेकेदार पर कार्रवाई

  • समयसीमा में योजना पूर्ण


अब जिम्मेदारी किसकी?

यदि पोर्टल पर योजनाएं “Ongoing” दिख रही हैं,
लेकिन जमीनी काम बंद है —तो निगरानी कौन कर रहा है?
भुगतान किस आधार पर पास हो रहे हैं?

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