गजब का चिटफंड: लोगों को लग रहा उन्हें वापस मिलेगा पैसा, अभी नहीं राज्य शासन ने हाईकोर्ट में लगे मामले में जवाब देने पीड़ितों से मांगें आवेदन

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पिथौरा तहसील का नजारा

बिलासपुर। बीते कुछ वर्षो में चिटफंड कंपनियों में पैसों के दोगुना करने प्रदेश के लाखों लोगों ने अपनी जमा पूंजी जमा की। इनमें से अधिकांश कंपनियां, निवेशकों के साथ धोखाधड़ी भाग निकले। अब तो इनके दफ्तर बंद हो गए। डायरेक्टर गायब हो गए। कई कंपनियों के कर्ता-धर्ता को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया। कई तो भागने में सफल हो गए। प्रदेश के हर जिले थाने में ऐसे मामले दर्ज हैं। Police कार्रवाई के बाद भी जब लोगों को अपना पैसा वापस नहीं मिला तो उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।

हाईकोर्ट में सुनवाई दो वर्ष से जारी है। अब शासन को इसमें कोर्ट (court) में जवाब देना है। यह भी बताना है कि निवेशकों को राहत दिलाने के लिए शासन (Government) ने क्या किया। बहरहाल, सरकार (Government) ने इस धोखेबाजी के शिकार लोगों से जिलास्तर पर आवेदन लेना शुरू किया है। पहले यह आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख 6 अगस्त थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 20 अगस्त कर दिया है।

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छत्तीसगढ के हर जिले में हजारों ऐसे लोग अपने साथ हुए धोखाघड़ी (fraud) का आवेदन लेकर पहुंच रहे हैं। शुक्रवार की सुबह से ही हजारों आवेदन लेकर खड़े थे। ये सभी लोग अपने साथ हुई ठगी का जानकारी देने यहां पहुंचे थे। इन लोगों को एक फार्म दिया गया है। इस फार्म में लोग पूरी जानकारी दे रहे हैं। सबको बस एक ही उम्मीद है कि उन्हें उनका पैसा वापस मिल जाए। अधिक ब्याज या दो-तीन साल में रकम दुगनी होने के झांसे में फंसे अधिकतर लोग ऐसे हैं जो निम्न और मध्यमवर्गीय हैं। जिन्होंने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी चिटफंड कंपनियों (chit fund companies) के एजेंटस की मीठी और झूठी बातों में फंसकर दे दी है।

जमाकर्ताओं को लग रहा है कि गर्वमेंट पैसा वापस दिलाएगी

प्रदेश के सभी जिले आवेदन जमा करने पहुंच रहे लोगों को लग रहा है कि सरकार इसमें कंपनियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर उनका पैसा वापस दिलाएगी। दरअसल सरकार (Government)  की ओर से कंपनियों पर कार्रवाई बाद में होगी, पहले तो सरकार ज्यादा से अधिक निवेशकों की जानकारी जुटाकर हाईकोर्ट (High Court) में पेश करने के लिए जवाब बना रही है। अगर कोई कार्रवाई शासन की ओर से होनी होती तो ऐसे आवेदन पिछले तीन साल से लिए जा रहे हैं, लेकिन इसके बाद सभी आवेदनकर्ताओं को पैसा वापस मिला ऐसा बिलकुल भी नहीं है। ​​​​​​ 2 साल से इन याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है। अब मामला दोबारा कभी भी सुनवाई के लिए लग सकता है, इसलिए सरकार (Government)  अदालत में जवाब पेश कर सके इसके लिए तैयारी कर रही है।

प्रदेश के सभी जगहों में भीड़ इतनी थी कि प्रशासनिक महकमा भी असहाय साबित हुआ। पूरे समय कोविड-19 प्रोटोकाल (covid-19 protocol) की धज्जियां उड़ती रही। चेहरे पर लोगों के मास्क भी नहीं थे। शारीरिक दूरी के नियमों की किसी ने परवाह तक नहीं की। आवेदन जमा करने के दौरान कार्यालयों में पूरे समय भारी भीड़ लगी रही।

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