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बाबा साहेब कहते थे, शिक्षा मनुष्य की कसौटी है, इसे व्यावहारिक बनाएं

भोरिंग में बाबा साहेब के आदमकद प्रतिमा का लोकार्पण

महासमुंद।  ग्राम भोरिंग के वार्ड क्रमांक एक अंबेडकर चौक में भारतीय संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की आदमकद प्रतिमा का लोकार्पण समारोह हुआ।

  • बुद्ध पूर्णिमा पर सोमवार को आयोजित इस समारोह के मुख्य अतिथि बौद्ध महासभा के छत्तीसगढ़ प्रदेशाध्यक्ष बहादुर सिंह जागृत थे।
  • अध्यक्षता भाजपा अजा मोर्चा जिला उपाध्यक्ष राजू बाघमारे ने की।
  • विशिष्ट अतिथि भाजपा अजा मोर्चा शहर मंडल अध्यक्ष विक्की महानंद, भारतीय बौद्ध महासभा के जिला अध्यक्ष पीजी बंसोड़ थे।
  • अतिथियों का स्वागत प्रकाश चंद्राकर फैंस क्लब एवं जय भीम युवा विकास समिति ग्राम भोरिंग के युवाओं ने जोरदार आतिशबाजी कर किया।
  • उपरांत पंथी नृत्य के साथ अतिथियों को मंच तक ले जाया गया, जहां पुष्पाहार से स्वागत किया गया।

बाबा साहेब बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे

  • इस मौके पर मुख्य अतिथि जागृत ने युवाओं को अराजकता से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि बाबा साहेब बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे।
  • समाज के कमजोर वर्ग को आगे लाने के लिए किया गया उनका संघर्ष प्रेरणा देता है, अभाव-अपमान के बाद भी समाज की भलाई कर सकते है।
  • बाबा साहेब गौतम बुध्द के सिंध्दातों पर चलते थे। महिला सशक्तिकरण के पक्षधर थे।
  • बाबा साहेब ने मात्र 28 साल की उम्र में स्माल होल्डिंग इन इंडिया एंड रेमेडीज शीर्षक से जो आलेख लिखा, उसने उन्हें अर्थशास्त्री की उपाधि दी।

अनेक योजनाओं की रखी नींव http://यहां पढ़े…

  • उन्होंने कहा कि देश में आरबीआई की स्थापना में उनका बहुत सहयोग रहा। आधुनिक भारत के निर्माण में संविधान के साथ अनेक योजनाओं की नींव रखी।
  • उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने अनुसूचित जाति व पिछड़े वर्ग को ऊपर लाने के लिए शिक्षा का सहारा लिया।
  • हर काम को अहिंसात्मक तरीके से समाज में जागरुकता लाकर किया।
  • अंबेडकर शिक्षा के बारे में कहते थे, शिक्षा, किताबी ज्ञान, तकनीकी तक सीमित नहीं रहे, शिक्षा मनुष्य की कसौटी है। इसे व्यावहारिक बनाएं।

पीड़ित वर्ग के उत्थान में समर्पित रहा बाबा साहेब का जीवन

  • कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे बाघमारे ने कहा कि बाबा साहेब का जीवन कमजोर और पीड़ित वर्ग के उत्थान और भलाई के लिए समर्पित रहा है।
  • बाबा साहब के दिखाए रास्ते पर चल कर ही समतामूलक समाज की स्थापना की जा सकती है।
  • बाबा साहब जीवन पर्यन्त समाज को एक डोर में बांधने के लिए संकल्पित रहे।
  • वे स्वंत्रत भारत के प्रथम कानून मंत्री एवं भारतीय संविधान के प्रमुख वास्तुकार थे।
  • उन्होंने हमें बताया है कि एक दूसरे से समाज में बिना भेदभाव किए रहना चाहिए। जिससे भाई चारा बना रहे।
  • बाबा साहेब एक भारतीय विधिवेत्ता, राजनीतिज्ञ और समाज सुधारक थे। उन्होंने समाज में भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया।
  • कार्यक्रम को गोपाल सोना, मंगेश टांकसाले, चंद्रशेखर बेलदार ने भी संबोधित किया।
  • इस अवसर पर अलखराम चतुर्वेदी, सरपंच प्रतिनिधि देवनाथ साहू, डॉ. उदयराम साहू, राधेश्याम साहू, डॉ. तुलस राम साहू, रंजीत बघेल, राजकुमार आंवले, जगदीश, सुकदेव, दिलीप ढीढी, अश्वनी गिलहरे, जय भीम युवा विकास समिति के अध्यक्ष सरोज कुमार, सचिव रवि कुमार, समीर, आशीष, राजेश, शैलू, श्रीकांत, यंश, अखिलेश, निमेश, मानसिंह उपस्थित थे।

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