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किसानों के नाम से करोड़ों हजम, कोर्ट आदेश के बाद फ्राड करने वालों पर एफआईआर

छत्तीसगढ़। महासमुंद.
आधुनिक खेती करने झांसा देकर किसानों के नाम से बैंक से 30-30 लाख रुपए फाइनेंस कराकर करोड़ों हजम करने वाले गिरोह का खुलासा हुआ है। झांसे में फंसने वाले महासमुंद और आरंग क्षेत्र के 6 किसानों ने कोर्ट परिवाद दायर किया था। कोर्ट ने शिकायत को सही पाते हुए मामले में धोखाधड़ी का मामला दर्ज करने आरंग थाने काे आदेश दिया था।
कोर्ट ने शिकायत सही पाकर आरंग थाने को मामले में धोखाधड़ी का केस दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद पुलिस ने शनिवार को करोड़ों की ठगी करने वाले गोविंदपुरा भोपाल के प्रभावी बायोटेक एंव ट्रेडिंग प्रालि कंपनी के डायरेक्टर, मैनेजर, दो एजेंट समेत बैंक ऑफ बड़ौदा के तत्कालीन बैंक मैनेजर के खिलाफ अपराध कायम कर लिया।
ऐसे ठगी को दिया अंजाम:
आरंग पुलिस के अनुसार साल 2014-15 में महासमुंद और आरंग क्षेत्र के दर्जनों किसानों को आधुनिक विधि से खेती करने पर एक साल के भीतर 15 से 20 लाख रुपए तक कमाने का झांसा देकर प्रभावी बायोटेक एवं ट्रेडिंग प्रा.लि गोविंदपुरा भोपाल के स्थानीय एजेंट ग्राम मरौद, तुमगांव (महासमुंद) निवासी घनश्याम ध्रुव ने सभी किसानों को बैंक ऑफ बड़ौदा से 30-30 लाख रुपए का लोन दिलाने के लिए कहा
इन किसानों को झांसे में फंसाया:
ठगी के शिकार तुमगांव निवासी ललित कुमार साहू ने बताया कि एजेंट घनश्याम ने बायोटेक कंपनी के डायरेक्टर भरत पटेल, मैनेजर विनय शुक्ला से मुलाकात करवाया। कंपनी के लोगों ने छह माह तक फसल की देखरेख खुद से कराने को कहा। झांसे में आकर ललित साहू सहित ग्राम बनचरौदा के तुलसीराम साहू, ग्राम कांपा, महासमुंद के लक्ष्मीनारायण साहू, तुमगांव के तुलसीराम साहू, ग्राम कौवाझर तुमगांव के डोमारसिंग ध्रुव, संतराम साहू, अयोध्या नगर, महासमुंद के प्यारे लाल ध्रुव तथा मोहन सिंह ध्रुव समेत अन्य किसान पाली हाउस लगाने तैयार हो गए।
बैंक का ऐसे रहा मिलीभगत
बैंक ऑफ बडौदा आरंग शाखा के मैनेजर श्याम बांदिया से मिलीभगत कर कंपनी के लोगों ने सभी के नाम पर 30-30 लाख रुपए का फाइनेंस कराकर किसानों के हस्ताक्षर लेकर पूरी रकम हजम कर ली। किसानों ने बताया कि जून 2015 में कंपनी के वाहन ने पाली हाउस का सामान खेती जमीन में डाला। छह माह बाद स्ट्रक्चर खडा किया। लगभग आठ माह बाद ड्रिप सिस्टम लगाया गया। इसका खर्च किसानों से लिया गया। खेत में बोर एवं घेरा पहले से था। किसानों का आरोप है कि पाली हाउस का पूरा काम कराए बगैर कंपनी के मैनेजर विनय शुक्ला, बैंक मैनेजर श्याम बांदिया ने जारी किए गए 30-30 लाख रुपए के चेक को किसानों से हस्ताक्षर कराकर भुना लिया।
लाखों की रकम कंपनी के कर्ता-धर्ता भरत पटेल के खाता में ट्रांसफर किया गया। 41 लाख रुपए के इस प्रोजेक्ट को कंपनी के लोगों ने लालच में आकर किसानों से न केवल धोखाधड़ी की इसके अलावा उद्यानिकी विभाग से 20 लाख की सब्सिडी भी नहीं दिलाई।

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