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सावधान रहे बदलते मौसम के साथ बढ़ रही आंखों की एलर्जी, होली में आंखों को रंगों से बचाएं

लोग अपनी आंखों के लिए नहीं हैं जागरूक: मेजरडॉ. नीलम भगत, इंटरनेट के ज्ञान से न करें उपचार, तुरंत करें डॉक्टर से संपर्क

रायगढ़ 15 मार्च 2022. मौसम में बदलाव होने से आंखो की समस्या बढ़ जाती है। मौसम बदलने पर हवा में संक्रमण बढ़ जाता है और शरीर की रोगप्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है। रायगढ़ जैसेऔद्योगिक जिले में जहांआंखों की एलर्जी सामान्य बात है, समस्याएं और बढ़ जाती हैं। इस कारण आंखो में जलन होना, आंखो से पानी आना, आंखें लाल होना, आंखो में खुजली जैसी तकलीफें होती है। इस कारण आंखों की एलर्जी होने से खुद को सुरक्षित करने के लिए डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है। अन्यथा यही एलर्जी आंखों से संबंधित और बड़ी बीमारियों में तब्दील हो जाती है जिसका आभास हमें बहुत बाद में होता है।

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मेजरडॉ. नीलम भगत

नेत्र रोग विशेषज्ञ मेजर डॉ. नीलम भगत(एमएस, ऑप्थो) बताती हैं, “जिले की आबोहवा तो दूषित है इसके साथ ही बीते कुछ सालों में स्क्रीन टाइम (मोबाइल या टीवी को देखना) बढ़ा है। इसमें बच्चों से लेकर बड़े-बूढ़े सभी शामिल हैं। लगातार स्क्रीन देखने से लोग पलके नहीं  झपकाते और यहीं से दिक्कत शुरू हो जाती है।

फिर यहां लोग अपने आंखों के प्रति जागरूक नहीं है।  नियमित जांच के लिए नेत्र विशेषज्ञ के पास जाने वालों की संख्या काफी कम है। आंख में दिक्कत होने पर जब तक वह सहन कर सकते हैं तब तक सहते हैं या फिर दवा दुकान जाकर दवा ले लेते हैं। ऐसे में बीमारी और बढ़ जाती है। लंबे समय तक बिना डॉक्टरी सलाह के दवा खाने के और भी कई प्रकार के विपरीत प्रभाव पड़ते हैं क्योंकि इन दवाओं में स्टेयरॉइड होता है। इसलिए आंख में तकलीफ हो तो तुरंत नेत्र चिकित्सक से संपर्क करें। ”

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आंखों की करें सुरक्षा

आमतौर पर लोग अपनी आंखों की सुरक्षा करना भूल जाते हैं। सूर्य की सीधी किरणों से बचने के लिए धूप के चश्में बेहतर हैं। साथ ही किसी प्रकार की जलन या कचरा आंख में फंस जाए तो आंख को रगड़े नहीं साफ पानी से आंखों को धोएं या फिर बाल्टी भर पानी में चेहरा डालकर कई दफा आंख को बंद करें और खोले।

मेजरडॉ. नीलम भगत का कहना है कि धूप के चश्में प्लास्टिक के न हों क्योंकि अधिक धूप में वह खुद ही गलने लग जाते हैं और नुकसान आंखों को होता है। बहुतमहंगे चश्मे अगर न लेना चाहेंतो कांच के सामान्य धूपरोधी चश्में जो बाज़ार में मौजूद हैं उनका प्रयोग भी कर सकते हैं।

खुद विशेषज्ञ न बने

“बीते कुछ सालों में देखा गया है कि लोगों को किसी भी प्रकार की समस्या होती है तो वह इंटरनेट से जानकारी लेकर  कर स्वंय डॉक्टर बन जाते हैं और अपने इसी ज्ञान के आधार पर दवाइयां लेना शुरू कर देते हैं जो हानिकारक है। आंख से संबंधित समस्या होने पर चिकित्सक से संपर्क करें। इंटरनेट देखकर खुद विशेषज्ञ न बने और ना ही दवा दुकान वाले के आधार पर दवाओं का सेवन करें।,” मेजरडॉ. नीलम भगत ने आगे बताया।

होली पर आँखों को बचाएं

होली पर सबसे अधिक मांग रंगों की होती है। अबीर गुलाल के साथ लोग रसायन मिले रंगों का भी ज्यादा इस्तेमाल करते हैं। बाजार में रसायनयुक्त रंग और अबीर गुलाल की खूब बिक रहे हैं क्योंकि प्राकृतिक रंगों की अपेक्षा ये काफी सस्ते पड़ते हैं और इस कारण इनका उपयोग तेजी के साथ हो रहा है। कई प्राकृतिक रंगों में मिलावट भी होती है।

यह रंग मुख्य रूप से त्वचा पर असर करते हैं और इनके इस्तेमाल से एलर्जी के साथ-साथ अन्य बीमारियां भी हो सकती हैं। रसायन युक्त रंगों से अस्थमा, त्वचा में संक्रमण और आंखों में जलन जैसी बीमारियां हो सकती हैं। लोग होली खेलें पर आंखों को रंगों से बचाकर। यदि फिर भी आंखों में रंग या गुलाल चला गया हो तो सबसे पहले आंखों को पानी से अच्छे से धोएं और फिर तुरंत जिला अस्पताल या नजदीकी अस्पताल जाएं। त्यौहार के दिन भी डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद होते हैं इसलिएपहले से कोई अवधारणा न बनाएं।

बदलते मौसम के दौरान आंखों की एलर्जी से बचने के लिए क्या करें

मेजर डॉ. भगत ने आंखों की एलर्जी से बचने के लिए बताया कि जिन चीजों से आंखो को एलर्जी हो ऐसे चीजों के संपर्क में ना आए। घर और कार्य स्थलों के लिए वेंटिलेशन और प्रकाश व्यवस्था में सुधार करें। प्रदुषण और धूल से बचें। मौसम के कारण  एलर्जी होने से  एक नियंत्रित या वातानुकूलित वातावरण में घर के अंदर रहें। अपने पालतू जानवरों की देखभाल करें।

लेकिन उन्हें अपने लिविंग एरिया में मत लाए। नियमित रूप से घर के पर्दे, कालिन (कारपेट) और तकियों के  कवर को स्वच्छ रखें। आंखो में जलन होने पर बार-बार आंखो को मसले नहीं। अगर जलन ज़्यादा हो तो रात के समय बर्फ से आंखों की सिकाई करें।  दिन में दो या तीन बार ठंडे पानी से आंखो को धोएं।  धुम्रपान नहीं करें। डॉक्टर की सलाह लिए बिना दवा का सेवन न करें। समय-समय पर अपने हाथ धोएं। यदि आप कॉन्टेक्ट लेंस पहनते हैं तो उन्हें हटा दें और सोते समय उन्हें न पहनें। आंखो की तकलीफ ज़्यादा हो तो तुरंत चिकित्सक से संपर्क करें।

 

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