राजहंस, सारस पक्षियों का यहां देखिए खुबसूरत नजारा

सारस क्रेन भारतीय उपमहाद्वीप, दक्षिणपूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में पाया जाने वाला एक बड़ा गैर-प्रवासी क्रेन है। सारस पक्षी एक खूबसूरत और बड़ा पक्षी है। यह पूरी दुनिया के तालाबो, नदियों, झीलों के पास पाया जाता है।

महाराष्ट्र: नासिक जिले के निफाड में नंदुर मधमेश्वर आर्द्रभूमि अभयारण्य में प्रवासी पक्षियों का आना शुरू हो गया है(  वन अधिकारी ने कहा, “राजहंस, सारस सहित 30,000 से अधिक पक्षी यहां आ चुके हैं। साइबेरिया, यूरोप के पक्षी यहां कड़ाके की ठंड से बचने के लिए आते हैं।”

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राजहंस, सारस पक्षियों का यहां देखिए खुबसूरत नजारा

सारस क्रेन भारतीय उपमहाद्वीप, दक्षिणपूर्व एशिया और ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में पाया जाने वाला एक बड़ा गैर-प्रवासी क्रेन है। सारस पक्षी एक खूबसूरत और बड़ा पक्षी है। यह पूरी दुनिया के तालाबो, नदियों, झीलों के पास पाया जाता है। यह पक्षी हमेशा जोड़ा बनाकर रहता है। एक बार जोड़ा टूटने पर यह वापस कभी भी जोड़ा नही बनाता है। यह उड़ने वाले पक्षियों में सबसे बड़ा पक्षी है, और इसकी लंबाई 1.8 मीटर(5.9 फ़ीट) है। इसका पंख 2.4 मीटर (8 फीट) और इसका वजन 8.4 किलो (18.5 पाउंड) तक हो सकता है। यह खुले गीले मैदान पर रहना पसंद करते हैं। साथ ही वे अपने समग्र ग्रे रंग और विपरीत लाल सिर और ऊपरी गर्दन की वजह से दुसरी क्रेनों से भिन्न होते हैं।

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विलुप्त होती प्रजाति :

उत्तर प्रदेश राज्य का यह पक्षी विलुप्त होने की कगार पे हैं, जिसका मुख्य कारण किसानों द्वारा गीली भूमि को निकाल और कृषि के लिए भूमि का रूपांतरण कर उनके आवास को नष्ट करना है। राजमार्गों, आवास उपनिवेशों, सड़कों और रेलवे लाइनों के निर्माण भी एक मुख्य कारण हैं, क्योंकि हाल ही में, बिजली लाइनों के साथ टकराव के कारण कई मौतें दर्ज की गई हैं। 2007 के प्रशिक्षण के अनुसार सारस भारत में कुल 10,000 हैं, और वहीं ऑस्ट्रेलिया में 5000 हैं। भारत में सारस क्रेन संरक्षण परियोजना टीम द्वारा विभिन्न गतिविधियों का उपयोग किया जा रहा है। अन्यत्र, वहीं यह प्रजातियां पूर्वी सीमा के कई हिस्सों में समाप्त कर हो गयी हैं।

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