बिलासपुर। 4 नवंबर 2025 को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुए भीषण ट्रेन हादसे ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। गेवरारोड के पास एक मेमू लोकल ट्रेन और मालगाड़ी की टक्कर में 11 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 20 से अधिक यात्री घायल हुए थे। हादसे की जांच अब कई सनसनीखेज खुलासे कर रही है।
जांच में सामने आए चौंकाने वाले तथ्य
रेलवे की पांच सदस्यीय जांच टीम और कमिशन ऑफ रेलवे सेफ्टी (सीआरएस) द्वारा की जा रही जांच में खुलासा हुआ है कि मेमू लोकल ट्रेन के लोको पायलट विद्यासागर ने साइकोलॉजिकल टेस्ट में असफलता पाई थी। इसके बावजूद उन्हें पैसेंजर ट्रेन चलाने की जिम्मेदारी दी गई थी।
सूत्रों के अनुसार, विद्यासागर पहले मालगाड़ी चलाते थे और एक महीने पहले ही उन्हें यात्री ट्रेन का चार्ज सौंपा गया था। जबकि रेलवे के नियमों के मुताबिक, मालगाड़ी से पैसेंजर ट्रेन में प्रमोशन के लिए साइकोलॉजिकल टेस्ट पास करना अनिवार्य है।
अधिकारियों को थी जानकारी, फिर भी मिली जिम्मेदारी
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि संबंधित अधिकारियों को पायलट की टेस्ट रिपोर्ट की जानकारी थी, फिर भी उन्हें ट्रेन चलाने की अनुमति दी गई। विशेषज्ञों के अनुसार, यह गंभीर लापरवाही है, क्योंकि यह टेस्ट लोको पायलट की निर्णय क्षमता और आपात स्थिति में प्रतिक्रिया को मापता है — जो सीधे यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ा है।
सिग्नलिंग सिस्टम में खामियां भी बनीं वजह
जांच में यह बात भी सामने आई है कि ऑटो सिग्नलिंग सिस्टम में तकनीकी खराबी थी, जिसकी वजह से मेमू ट्रेन को सामने खड़ी मालगाड़ी की सटीक जानकारी नहीं मिल पाई।
रेलवे की आंतरिक रिपोर्ट में कहा गया है कि सिग्नल सिस्टम की समय पर जांच और मेंटेनेंस में लापरवाही हुई, जिससे यह दुर्घटना टल नहीं पाई।
सीआरएस की पूछताछ जारी
6 नवंबर से सीआरएस के कमिश्नर बी.के. मिश्रा के नेतृत्व में जांच शुरू की गई। पहले दिन 10 से अधिक कर्मचारियों से बयान दर्ज किए गए, जिनमें एरिया बोर्ड की एससीआर पूजा गिरी, एआरटी इंचार्ज अंशु कुमार, एआरएमवी इंचार्ज रवि किरण और कंट्रोलर जीपी दास शामिल थे।
पूछताछ के दौरान सिग्नल पैनल की स्थिति, राहत ट्रेन की देरी और मेडिकल वैन की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर भी सवाल पूछे गए।
घायल कर्मचारियों के बयान अभी बाकी
असिस्टेंट लोको पायलट रश्मि राज और मालगाड़ी के गार्ड शैलेष चंद्र यादव हादसे में घायल हैं। उनकी स्थिति को देखते हुए सीआरएस उनकी गवाही अस्पताल में ही दर्ज करेगा। दोनों प्रत्यक्षदर्शी माने जा रहे हैं और उनके बयान जांच की दिशा तय कर सकते हैं।
जनता में नाराजगी और सिस्टम पर सवाल
हादसे के बाद स्थानीय लोगों और यात्रियों में रेलवे प्रशासन के खिलाफ भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि फेल लोको पायलट को ट्रेन की जिम्मेदारी न दी जाती, तो यह हादसा रोका जा सकता था। साथ ही, सिग्नलिंग सिस्टम की खराबी और राहत कार्यों में देरी ने रेलवे की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
आगे क्या?
सीआरएस की जांच रिपोर्ट अभी जारी है, लेकिन अब तक के संकेत साफ हैं — रेलवे विभाग में गंभीर लापरवाही और सिस्टम की तकनीकी कमियां इस हादसे के लिए जिम्मेदार हैं। रिपोर्ट आने के बाद दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद जताई जा रही है। यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि रेलवे को अपनी सुरक्षा और प्रशिक्षण प्रणाली को और सख्त बनाने की जरूरत है, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियां न दोहराई जाएं।
















