जहाँ अनुभवी, कुशल शिक्षको के साथ साथ स्थानीय योग्यताधारी युवाओं के द्वारा बतौर शिक्षक विषयो का अध्यापन कराया जाता था

 महासमुंद। उस समय ग्राम तुमगांव आसपास के गाँवो का हृदय स्थल हुवा करता था क्योंकि शहर के बुद्धजीवी, रसूखदार एवं 

मंजिलः महेश राजा/वह गिरता पड़ता एक राज्य की सीमा तक पहुंच गया था। अभी मंझिल दूर थी। घर पहुंचना जरूरी था।

वह गिरता पड़ता एक राज्य की सीमा तक पहुंच गया था। अभी मंझिल दूर थी। घर पहुंचना जरूरी था। सारे

मंदिर में चल रहा था ज्ञान दर्शन, मिली संवेदना भरी खबर, पढ़िए कुंवारी अभागन की एक रात

विजय शर्मा  पूर्व राम हंस दास महन्त लंबे अरसे बाद वृन्दावन से पधारे। स्वागत सत्कार पश्चात महंत जी ने मंदिर