छत्तीसगढ़देश/विदेशमहासमुन्दमेरा गांव मेरा शहर

CG आदिवासी समाज बोलें, BJP ने मौत की सैय्या तो कांग्रेस ने कोमा में पहुंचाया, मामला आदिवासी आरक्षण बत्तीस प्रतिशत

बिलासपुर हाईकोर्ट द्वारा राज्य की सेवाओं औऱ शैक्षणिक संस्थाओं में अनुसूचित जनजाति के लिये प्रावधानित 32% आरक्षण को ख़ारिज कर दिया गया है।

महासमुंद। छत्तीसगढ़ सर्वआदिवासी समाज महासमुन्द जिलाध्यक्ष मनोहर ठाकुर ने अखिल भारतीय अमात्य गोंड़ समाज सर्कल दाईजबांधा के आश्रिय ग्राम डोंगरीपाली में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि बिलासपुर हाईकोर्ट द्वारा राज्य की सेवाओं औऱ शैक्षणिक संस्थाओं में अनुसूचित जनजाति के लिये प्रावधानित 32% आरक्षण को ख़ारिज कर दिया गया है। आदिवासी समाज को झकझोर देने वाली इस निर्णय से आदिवासी समाज जिस संवैधानिक अधिकार को लोकतांत्रिक आंदोलन औऱ संघर्ष से हासिल किया था, उससे अब वंचित हो गये है।

लेकिन इसे फिर ले के ही रहेंगे। जिसकी रणनीति के साथ छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज ने सुप्रीम कोर्ट की दरवाजा खटखटाने के लिए कमर कस लिया है। जिलाध्यक्ष मनोहर ठाकुर ने यह भी जोर देकर कहा कि आदिवासियों के बत्तीस प्रतिशत आरक्षण मामले पर  भाजपा ने आदिवासियों को मौत की सैय्या तथा कांग्रेस ने आदिवासियों को कोमा में पहुंचा दिया है।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए सर्कल अध्यक्ष मनोहर ठाकुर ने आगे कहा कि आदिवासी समाज संगठित होकर संघर्ष किया तब जाकर कहीं आदिवासी समाज को 2012 में 32% आरक्षण का लाभ मिला। यह 32 प्रतिशत आदिवासी को आरक्षण देते समय भाजपा शासित सरकार ने हमें छल कर जीते जी मौत के मुंह में डाल दिया है।जब तत्कालीन भाजपा सरकार ने आदिवासियों को 32% आरक्षण देते समय बिना मांगे पिछड़ा वर्ग को 14% आरक्षण दे दिया गया।

CG कोर्ट पहुंचेगी ‘गंगा की सौगंध’! पूर्व CM रमन सिंह बोलें-गंगाजल उठाकर भी शराबबंदी नहीं, कांग्रेस ने इस बात को नकारा  

जिसके कारण से एस टी 32%+एस सी 12%+पिछड़ा वर्ग 14%=58% हो गया जबकि 32%+12%+6%=50% होना था मतलब तत्कालीन राज्य सरकार ने जानबूझकर ऐसा किया जिसका नतीजा आप सबके सामने है। या फिर ऐसा किया भी तो इसे कानून बना दिया जाना था ताकि कोई कोर्ट में चैलेंज ही नहीं कर पाते। तत्कालीन भाजपा सरकार ने तो हमें इस तरह से मौत की सैय्या में सुला ही दिया है।और हम नासमझ बन खुशी से झुमते रहे।इस बैठक में सुप्रीमकोर्ट के साथ-साथ आक्रमक रुख अपनाकर रोड़ की भी जंगी लड़ाई लड़ने की प्रस्ताव पारित किया गया है।

कांग्रेस में ड्रामा जारी, गहलोत के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिये नामांकन भरने पर संशय! माकन बोले MLA ने की अनुशासनहीनता

वर्तमान में कांग्रेस की सरकार द्वारा भी हाई कोर्ट बिलासपुर के सामने आवश्यक आर्गुमेंट प्रस्तुत न कर आदिवासी समाज को कोमा में भेजने का ही कार्य किया है।जरा भी वर्तमान छत्तीसगढ़ सरकार को आदिवासियों के प्रति यदि हमदर्दी है तो छत्तीसगढ़ सरकार के महाअथिवक्ता को हटा दिया जाना चाहिए।और तत्काल आदिवासी समाज के लिए 32% आरक्षण की नोटिफिकेशन जारी करना चाहिए।साथ ही संबंथित प्रकरण पर सुप्रीमकोर्ट में आदिवासियों के हित में न्याय दिलाने के लिए खड़ा होकर स्टे लाना चाहिए।।

मनोहर ठाकुर ने आगे स्पष्ट करते हुए कहा कि अब आदिवासी समाज अपनी लड़ाई खुद सुप्रीम कोर्ट में लड़ेंगे और इसकी योजनाबद्ध ढंग से छ.ग.सर्व आदिवासी समाज ने रणनीतिपूर्वक अपना कदम आगे बढ़ा चुका है। आदिवासी समाज एकजुटता के साथ यह लड़ाई न्याय के मंदिर व रोड की लड़ाई दोनों जगह लड़ने को तैयार है।इस अवसर पर सर्कल उपाध्यक्ष खेदूराम ठाकुर,शिक्षा प्रभारी परस राम ठाकुर ने भी बैठक को संबोधित किया।

बैठक में आदिवासी नेत्री जनपद सदस्य श्रीमती डुमरौतीन नूतन ठाकुर,संरक्षक जगदेव ठाकुर, महामंत्री रामकुमार ठाकुर, सचिव कंवल सिंह ठाकुर, टिकम ठाकुर, हेमसिंग ठाकुर, राजू ठाकुर, रुपनारायण ठाकुर, रजेलाल ठाकुर, खेमलाल ठाकुर, बुटांगू ठाकुर, मनोज ठाकुर, मकसूदन ठाकुर, पुरानिक ठाकुर, जगदीश ठाकुर, नवल ठाकुर, ईश्वर ठाकुर, भगवानी ठाकुर, जिवराखन ठाकुर,अमरसाय ठाकुर, गनपत ठाकुर, भउ ठाकुर, किर्तन ठाकुर, खोलबाहरा ठाकुर आदि प्रमुख पदाधिकारियों सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।

Related Articles

Back to top button
IND vs BAN: रोहित शर्मा ने पहला वनडे हारने के बाद सुधारी गलती आईपीएल के अगले सीजन में लागू होगा ये अनोखा नियम, अब 11 नहीं इतने खिलाड़ी एक ही मैच में लेंगे हिस्सा ढाका में भारत और बांग्लादेश की टक्कर, ‘करो या मरो’ मैच में उतरेगी टीम इंडिया IND vs BAN: रद्द होगा भारत-बांग्लादेश के बीच दूसरा वनडे Anupamaa Spoiler: कहानी ने मारी पलटी! अनुपमा का होगा किडनैप, डिंपल का ये एक्शन बजाएगा विलेन की बैंड