Chanakya Niti: आपके जिंदगी को नर्क बना सकते हैं ऐसे मित्र, इन गुणों से करें सही  मित्र की पहचान

परिवार और सगे-संबन्धियों के बाद सबसे करीबी लोगों में मित्रों को गिना जाता है. लेकिन हर मित्र आपके लिए सच्चा मित्र साबित हो ये जरूरी नहीं. कई बार लोग अपने स्वार्थ और कामना पूर्ति के लिए भी लोगों से दोस्ती का दिखावा करते हैं और संकट आने पर साथ छोड़ देते हैं. जानिए दोस्ती को लेकर क्या कहती है चाणक्य नीति, कैसे करें सच्चे मित्र की पहचान ?

चाणक्य दोस्ती हमेशा अपने बराबरी की हैसियत वालों से करनी चाहिए नहीं तो आपसी संबन्ध खराब होते हैं. जो लोग अमीरों से दोस्ती करते हैं, वे कहीं न कहीं स्वार्थवश ऐसा करते हैं कि वक्त आने पर उन्हें अपने धनवान दोस्त की मदद मिलेगी. वहीं धनवान ऐसे लोगों की भीड़ को अपने इर्द गिर्द देखकर खुश होता रहता है. ऐसे लोगों की पहचान करें और उनसे दूरी बनाएं.

कभी भी विपरीत स्वभाव वाले लोग आपके सच्चे मित्र साबित नहीं हो सकते क्योंकि सांप, बकरी और बाघ की कभी आपस में दोस्ती नहीं हो सकती. किसी भी दोस्त पर आंख बंद करके विश्वास न करें क्योंकि यदि आपके संबन्धों में खटास आ गई तो सबसे पहले आपका दोस्त ही आपके राज को दूसरों के सामने उजागर करेगा. ऐसे लोग कभी आपके मित्र नहीं हो सकते जो हमेशा मुंह पर आपकी तारीफ करते हैं और पीठ पीछे बुराई. इनकी पहचान करें और इनसे दूरी बनाकर रखें. ऐसे दोस्त आपको वक्त आने पर धोखा देते हैं.

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इस तरह करें सच्चे मित्र की पहचान

संकट आने पर, दुख में और बीमारी में जो हमेशा आपके साथ निःस्वार्थ भाव से खड़ा रहे, वो आपका सच्चा मित्र होता है. जो कृष्ण और सुदामा, विभीषण और राम की तरह समय पर आपके साथ दोस्ती निभाए, वास्तव में वो आपका सच्चा मित्र होता है. इसलिए किसी भी व्यक्ति को अपना दोस्त बनाने से पहले उसकी मंशा को अच्छे से परख लें, साथ ही इस बात का ध्यान रखें कि उसकी संगत आपके अनुकूल हो क्योंकि हर शख्स पर संगत का असर जरूर पड़ता है. चाहे वो धीरे-धीरे ही क्यूं न पड़े, लेकिन कोई संगत के असर से अछूता नहीं रह सकता.