अमानवीयता। छत्तीसगढ़ चिकित्सकों की लापरवाही से काटना पड़ा मासूम बच्चे का पैर!

रायपुर अमानवीयता। छत्तीसगढ़ के गर्वमेंट हॉस्पीटल में चिकित्सकों की अमानवीयता का मामला सामने उजागर हुआ है। बुधवार की रात राजधानी डीकेएस हॉस्पीटल में एक बच्ची को एडमिट कराने को लेकर जमकर हंगामा हुआ। बतादें इस बच्ची का एक पैरा कटा हुआ है। 7 मार्च से डीकेएस में एडमिट बच्ची को अस्पताल प्रबंधन ने सुबह जिला अस्पताल के लिए रेफर किया था। वहां चिकित्सकों ने उसे एडमिट करने से मना कर दिया। उसके बाद परिजन बच्ची को लेकर वापस डीकेएस अस्पताल पहुंचे थे।

देर तक हॉस्पीटल प्रबंधन से एडमिट करने की मिन्नते कर थक चुके बच्ची के परिजनों ने स्थानीय बीजेपी नेता गौरीशंकर श्रीवास को मदद के लिए बुलाया। जानकारी के बाद अस्पताल पहुंचे श्रीवास ने अस्पताल में हंगामा कर दिया। उनका कहना था, बच्ची का पैर कटा हुआ है। उसे बेहतर उपचार की जरूरत है। ऐसे में कोई सरकारी अस्पताल अपने से कम सुविधाओं वाले हॉस्पीटल में उसे कैसे भेज सकता है।

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हंगामे के बाद डीकेएस प्रबंधन ने बच्ची को फिर से अस्पताल में एडमिट किया

यदि उस हॉस्पीटल ने एडमिट करने से मना कर दिया तो क्या मानवता के नाते उसे फिर से एडमिट नहीं करना चाहिए था। श्रीवास ने आरोप लगाया कि बच्ची सुबह से बिना खाये-पीये एम्बुलेंस में पड़ी हुई थी। देर तक हंगामे के बाद डीकेएस प्रबंधन ने बच्ची को फिर से अस्पताल में एडमिट किया है।

जानकारी के मुताबिक, जशपुर के आजाद मोहल्ला निवासी नौशाद ओर रुखशाना कुरैशी की बेटी रिम्शा (5) को कुछ महीने पहले जशपुर जिला हॉस्पीटल में एडमिट कराया गया था। पैर में गलत तरीके से स्लाइन लगाने के कारण से उसके पैर खराब हो गये। 22 जनवरी को रायपुर एम्स में उसका ऑपरेशन हुआ और एक पैर काटना पड़ा था। वहां से डिस्चार्ज होने के बाद बच्ची को फिर से बेहोशी और झटकों की शिकायत आने पर राजधानी के एक निजी अस्पताल में एडमिट कराना पड़ा।

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वहां से रेफर कराने के बाद 7 मार्च को बच्ची को डीकेएस हॉस्पीटल के न्यूरोसर्जरी विभाग में एडमिट किया गया। बुधवार की सुबह बच्ची को डॉ. भीमराव आम्बेडकर हॉस्पीटल के बाल रोग विभाग में रेफर किया गया। यह विभाग अभी जिला हॉस्पीटल में संचालित है। लेकिन वहां डॉक्टरों ने एडमिट कराने से मना कर दिया। बीजेपी नेता और ड्यूटी डॉक्टरों के बीच देर तक चली बहस के बाद 5 साल की रिम्शा को फिर से एडमिट कराया जा सका।

हॉस्पीटल प्रबंधन बता रहा पीडियाट्रिक का मामला

डीकेएस हॉस्पीटल प्रबंधन का कहना है कि इस मामले को बेवजह तुल दिया जा रहा है। यह मामला पीडियाट्रिक अर्थात बाल रोग विभाग का है। यह डीकेएस हॉस्पीटल में ही है। वहीं जिला अस्पताल प्रबंधन इस मामले में अभी कुछ भी कहने से बच रहा है।

हेल्थ मिनिस्टर तक भी पहुंचा मामला

हॉस्पीटल में मरीज के साथ इस तरह के व्यवहार की खबर प्रदेश के स्वास्थ्य हेल्थ मिनिस्टर TS सिंहदेव के पास भी पहुंच गई। सिंहदेव कोरोना संक्रमित हैं। उनका घर में ही उपचार चल रहा है। मामले की जानकारी के बाद उन्होंने अपने निजी स्टाफ को हॉस्पीटल भेजकर डीकेएस में ही बच्ची के उपचार की व्यवस्था कराने के निर्देश दिये हैं।

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