छत्तीसगढ़: कोविड-ड्यूटी की, अब खाद बेचेंगे सरकारी स्कूल के शिक्षक

रायपुर. छत्तीसगढ़ में स्कूली शिक्षा व्यवस्था का हाल कैसा है, इसका अंदाजा आपको गौरेला-पेड्रा-मरवाही जिले के जनपद सीईओ के एक आदेश से लग जाएगा. जी हां, सीईओ ने 4 स्कूली शिक्षकों की ड्यूटी खाद वितरण व्यवस्था में लगा दी है. राज्य में कोरोना महामारी की वजह से महीनों से स्कूल बंद हैं. इस दौरान शिक्षकों को पहले कोविड-ड्यूटी में लगाया गया था.

अब जबकि महामारी के केस कम हुए तो गौरेला-पेड्रा और मरवाही के जनपद सीईओ ने शिक्षकों की ड्यूटी खाद बेचने में लगा दी. इस आदेश से शिक्षक संघ नाराज है. संघ के सदस्यों का कहना है कि पिछले करीब डेढ़ साल से स्कूल बंद हैं, प्रशासन इस अवधि में उनसे पढ़ाई के अलावा गैर-शैक्षणिक कार्य करा रहा है.

जनपद सीईओ के आदेश के तहत जिन शिक्षकों की ड्यूटी खाद बेचने में लगाई गई है, उनमें सहायक शिक्षक लालपुर के तजेश्वर सिंह, खोडरी के मोहन रजक, धनौली के शिशुपाल सिंह और गौरेला के सहायक शिक्षक शामिल हैं. शिक्षक संघ का कहना है कि प्रदेश में शिक्षकों से गैर-शैक्षणिक कार्य नहीं कराने का आदेश पहले से लागू है,

लेकिन प्रशासन को इसकी परवाह नहीं है. ऐसे में राज्य में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होते हैं. जनपद पंचायत गौरेला पेड्रा के सीईओ ने बीती 9 जुलाई को यह आदेश जारी किया, जिसमें 4 शिक्षकों को कोविड-ड्यूटी से हटा कर सहकारी समिति में खाद बिक्री के लिए लगाया गया है.

40000 से अधिक पद खाली

स्कूली शिक्षकों को खाद बेचने की ड्यूटी में लगाने को लेकर शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध जताया है. संघ के मुताबिक प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों की कमी है. शिक्षकों के 40000 से अधिक पद खाली हैं. इसके बाद भी प्रशासन शिक्षकों को कभी पशु गणना तो कभी अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाता रहता है. राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता को लेकर तमाम विचार-विमर्श होते रहते हैं, लेकिन शिक्षकों को गैर शैक्षणिक कार्य में लगाने के प्रशासनिक आदेशों पर ध्यान नहीं दिया जाता. यही वजह है कि बीते दिनों जब 4 शिक्षकों की ड्यूटी खाद बेचने के लिए लगाई गई, तो संघ नाराज हो गया.

आंदोलन की दी चेतावनी

कोविड-ड्यूटी के बाद शिक्षकों को खाद बेचने के काम में लगाए जाने से नाराज शिक्षक संघ ने जोरदार आंदोलन की चेतावनी दी है. छत्तीसगढ़ शालेय शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विरेन्द्र दुबे ने कहा है कि लगातार डेढ़ साल से शिक्षक गैर-शिक्षकीय कार्य कर रहे हैं. कोविड-ड्यूटी के दौरान 411 शिक्षकों की मौत हो चुकी है,

बावजूद इसके जनपद सीईओ के इस फरमान ने हदें पार कर दी हैं. दुबे ने कहा है कि अगर इस आदेश को जल्द ही निरस्त नहीं किया जाता है तो पूरे प्रदेश में आंदोलन किया जाएगा. उन्होंने कहा कि शिक्षकों की नियुक्तियां पढ़ाने के लिए है, न कि खाद बेचने के लिए.