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पुत्र और पत्नी को मौत का घाट उतारने वाले हत्यारे को कोर्ट ने सुनाई आजीवान कारावास

महासमुंद। पुत्र और पत्नी की हत्या करने वाले हत्यारे युवक को फास्ट ट्रैक कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश निधि शर्मा तिवारी ने भादवि की धारा 302 के तहत दोहरे हत्याकांड के लिए आजीवन कारावास और एक-एक हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया है। अर्थदंड नहीं पटा पाने की स्थिति में एक-एक माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगताए जाने का दंडादेश है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेगी।अभियोजन के अनुसार आरोपी संदीप कुमार गुप्ता पिता सुरेश कुमार गुप्ता 40 ने अपनी पत्नी अंजू गुप्ता और पुत्र प्रतीक गुप्ता की हत्या कर दी थी।

संदीप की मां मीरा देवी गुप्ता ने थाना महासमुंद में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 12 नवंबर 2016 को घर में बहू, पोता और आरोपी पुत्र को छोड़कर वह सरस्वती शिशु मंदिर में ड्यूटी पर गई थी। दोपहर करीब ढाई बजे आरोपी ने उसे फोन करके बताया कि वह पत्नी और बच्चे को लेकर रायपुर आ गया है। कमरे की चाबी छोड़ना भूल गया है।

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उसने अपनी मां को भी रायपुर बुला लिया। इस पर वह महासमुंद से रायपुर अपनी लड़की के घर गई । जहां पर बहू, पोता और बेटा नहीं मिले। फोन लगाने पर संपर्क नहीं हुआ। तब दूसरे दिन 13 नवंबर 2016 को वह महासमुंद वापस आयी। तो घर के कमरे का दरवाजा बंद था, बाहर ताला लटक रहा था। वह मकान मालिक के घर में कपड़ा बदलकर ड्यूटी पर स्कूल चली गई। बहू और पोता का शव पड़ा था खून से लथपथ : स्कूल में कार्यक्रम होने से वह रात में लौटी। तब बेटे, बहू और पोते से मोबाइल पर संपर्क नहीं होने पर मकान मालिक से कमरे का ताला तोड़वाकर अंदर गई। वहां का नजारा देखकर उसके होश उड़ गए। बहू अंजू और पोता प्रतीक राज गुप्ता का शव खून से लथपथ पड़ा था। बेटा संदीप वहां नहीं था।

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सूचना मिलने पर पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच प्रारंभ की। इस बीच संदीप गुप्ता ने थाना पहुंचकर आत्मसमर्पण किया और बताया कि आर्थिक परेशानी के चलते पत्नी और बेटे की हत्या किया है। उसने पत्र भी लिखा है। मामले की जांच कर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। जहां मामले की सुनवाई पूरी करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश व फास्ट ट्रैक कोर्ट के पीठासीन अधिकारी निधि शर्मा तिवारी ने आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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2004 में किया था अंतरजातीय प्रेम विवाह : आरोपी संदीप गुप्ता ने वर्ष 2004 में अंजू के साथ अंतरजातीय प्रेम विवाह किया था। इस बीच दोनों के बीच कभी कोई विवाद नहीं होने की बाद पड़ोसी और परिजन बताते हैं। इस बीच पुत्र प्रतीकराज गुप्ता का भी जन्म हुआ। यह अनसुलझी पहेली बन गया कि ऐसी क्या परिस्थिति निर्मित हुई कि युवक ने अपनी पत्नी और पुत्र को मौत के घाट उतार दिया। वह मकान बनवाने और टाइल्स आदि लगवाने का काम करता था। आर्थिक परेशानी की वजह से हत्या करना उल्लेखित किया है। जो किसी के गले नहीं उतर रहा है।

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