मांग: बीमारी अमीरी-गरीबी देखकर नही आती, इसलिए सरकार को करनी चाहिए पुनर्विचार, अधिवक्ता ऋषि कुमार शर्मा ने उठाई मांग

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आज शनिवार से 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोगों को कोरोना टीकाकरण लगाने का अभियान शुरू हो रहा है। 1 मई से 18 से 45 साल तक के लोगों का टीकाकरण करने का फैसला किया है। साथ ही सरकार ने राज्य के कोटे से होने वाले वैक्सीनेशन प्रोग्राम के लिए सामाजिक-आर्थिक स्तर पर प्राथमिकता देने का भी ऐलान किया है। इस व्यवस्था के तहत सबसे पहले अन्त्योदय राशन कार्डधारी सबसे गरीब लोगों को वैक्सीन लगाई जाएगी।

इस टीकाकरण में सामाजिक न्याय का ध्यान रखा जाएगा। सबसे पहले अन्त्योदय राशन कार्ड वाले अति गरीब लोगों में से 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के लोगों को यह टीका लगेगा। उसके बाद BPL कार्ड धारी गरीबी रेखा से नीचे के लोगों को टीका लगाया जाएगा। सबसे बाद में सामान्य (APL) कार्ड वाले लोगों को इसका लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर टीकाकरण में सामाजिक-आर्थिक रूप से कमजोर तबकों के लिए प्राथमिकता की मांग की थी। बाद में स्पष्ट हुआ कि राज्य सरकार के खर्च से हो रहे टीकाकरण में वह ऐसे वर्गों के लिए खुद ही प्राथमिकता तय कर सकते हैं। इसके बाद हमने सामाजिक-आर्थिक प्राथमिकता देने का फैसला किया है।

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मांग: बीमारी अमीरी-गरीबी देखकर नही आती

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ऋषि कुमार शर्मा, तुमगांव अधिवक्ता ने कहा-यदि vaccination की पहली पात्रता 60 से ऊपर के उम्र के लोगों के लिए, दूसरी पात्रता 45 से ऊपर के उम्र के लोगो के लिए थी। तो तीसरी पात्रता 40 से ऊपर के लिये, चौथी पात्रता 35 से ऊपर के लिए, पांचवी पात्रता 30 से ऊपर के लिए, छटवीं पात्रता 25 से ऊपर के लिए, सातवी पात्रता 20 से ऊपर के लिए,  आठवीं पात्रता 15 से ऊपर के लिए होनी थी। जो कि 15 दिन के अंतर से चालू होना था।

लेकिन सरकार ने अमीरी गरीबी के हिसाब से पात्रता तय किया है, जो कि मेरे हिसाब से गलत है। बीमारी अमीरी गरीबी देखकर नही आती है। संभवत: निर्णय लेने वाले समुचित विचार करने में त्रुटि किये है। इस निर्णय पर पुनर्विचार होना चाहिये। मेरा सरकार के निकटस्थ समस्त जनप्रतिनिधियों से निवेदन है कि इस निर्णय पर पुनर्विचार करने बाबत आवश्यक चर्चा जरूर करें।

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