कोमाखान

गिरीश पंकज ने कहा: हाइकु में प्रकृति, आध्यात्म, मानवीय मूल्यों और कलात्मकता का है एक विहंगम सौंदर्य

छत्तीसगढ़ के पहले पेड़ बुलाते मेघ हाइकु संग्रह का विमोचन

रायपुर। राजधानी रायपुर के संस्कृति भवन में पंडित माधव राव सप्रे की जयंती पर विमोचन, सम्मान एवं परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो. सूरज बहादूर थापा लखनऊ विवि थे। अध्यक्षता डॉ. केएल वर्मा कुलपति पं रविशंकर विवि रायपुर ने की। विशिष्ट अतिथि जगदीश उपासने कुलपति पं माखन लाल चतुर्वेदी विवि भोपाल थे ।

विमोचन के साथ दी बधाई

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  • इस मौके पर अतिथियों ने समवेत रूप से पेड़ बुलाते मेघ का विमोचन किया तथा अपनी बधाई दी।
  • ज्ञात हो कि पहली हिंदी हाइकु संग्रह रोली अक्षत, छत्तीसगढ़ की पहली हाइकु संग्रह है।
    पेड़ बुलाते मेघ की भूमिका प्रख्यात हाइकुकार डॉ. सुधा गुप्ता मेरठ ने लिखी है। वहीं आवरण पृष्ठ का आकर्षण के रविन्द्र प्रसिद्ध चित्रकार ने उकेरा है।
  • इसके फ्लैप पर पारितोष चक्रवर्ती एवं डॉ. सुधीर शर्मा ने अपने अभिमत लिखे हैं।

हिंदी हाइकु में एक नया मानक स्थापित

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  • कार्यक्रम में प्रख्यात साहित्यकार गिरीश पंकज ने कहा कि छत्तीसगढ़ में हिंदी के पहले हाइकु कार रमेश कुमार सोनी बसना की दूसरी हाइकु कृति पेड़ बुलाते मेघ का विमोचन कर अभिभूत हूं।
  • उन्होंने कहा कि आपने हिंदी हाइकु में आज फिर से एक नया मानक स्थापित किया है।
  • इस हाइकु संग्रह में विविध उपखंडों के साथ लगभग 700 हाइकु शामिल हैं, जिनमें बिल्कुल ही नयापन है।
  • अद्भुत संवेदनाओं के साथ इसमें छत्तीसगढ़ के मिट्टी की खुशबू भी रची बसी है।
  • हाइकु एक जापानी विधा है, जिसे हिंदी ने अपनाकर अपने रंग रूप में ढाल लिया है।
  • यहीं हमारी हिंदी और राष्ट्रीयता की विशेषता है, जिस पर हमें गर्व है।
  • इस हाइकु में प्रकृति, आध्यात्म, वर्तमान मानवीय मूल्यों एवं कलात्मकता का एक विहंगम सौंदर्य है।

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कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

  • इस अवसर पर तेजिंदर गगन, डॉ जेआर सोनी, बद्री प्रसाद पुरोहित, लोरिश कुमार, मनहर चौहान, डॉ उर्मिला शुक्ला, डॉ रामकुमार बेहार, रामकुमार तिवारी, पद्मश्री अरुण शर्मा, प्रकाश मंगलेश सोहनी, उत्तर बारीक, सच्चिदानंद उपासने, डॉ सुशील त्रिवेदी, पारितोष चक्रवर्ती सहित कई साहित्यकार एवं हिंदी के शोध छात्र-छात्राएं उपस्थित थे ।

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