रायपुर

आयोग ने दिए कड़े निर्देश: लैंगिक अपराधों के मामलों में मीडिया में बच्चों की पहचान उजागर हुई तो, जेल के साथ जुर्माना

रायपुर. बच्चों के अधिकारों की रक्षा के लिए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। ये निर्देश विशेष रूप से मीडिया के लिए जारी किए गए हैं। आयोग के अध्यक्ष प्रभा दुबे ने इस बारे में बाल अधिकार संरक्षण अधिनियम 2005 की धारा-13 का उल्लेख करते हुए कहा है कि इसमें आयोग को बच्चों के अधिकारों के प्रभावी संरक्षण और उनके सर्वोत्तम हित में अनुशंसा के अधिकार प्राप्त हैं। उन्होंने बताया कि किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण ) अधिनियम 2015 एवं लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 में आयोग को निगरानी के भी अधिकार प्राप्त हैं।

ऐसे काम न हो जिससे प्रतिष्ठा पर पड़े प्रभाव

  • आयोग के अध्यक्ष ने बताया कि लैंगिक अपराधों से बच्चों के सरंक्षण के अधिनियम 2012 की धारा-23 में मीडिया के लिए प्रक्रिया का प्रावधान किया गया है।
  • इस प्रावधान के अनुसार कोई व्यक्ति किसी भी प्रकार के मीडिया या स्टूडियो या फोटो चित्रण संबंधित सुविधाओं से कोई पूर्ण या अधिप्रमाणित सूचना रखे बिना किसी बच्चे के संबंध में कोई रिपोर्ट नहीं करेगा
  • या उस पर किसी प्रकार की टिप्पणी नही करेगा,
  • जिससे बच्चे की प्रतिष्ठा प्रभावित होती है, या उसकी गोपनीयता का उल्लंघन होता हो।

उल्लघंन किया तो पहुंचेंगे जेल

  • उन्होंने बताया कि-किसी मीडिया से कोई रिपोर्ट बच्चे की पहचान जिसका नाम, पता, फोटो  चित्र, परिवार के ब्यौरे, विद्यालय, पडोस या किसी अन्य विशेष बातों को प्रकट नहीं किया जा सकता,
  • जिससे बच्चे की पहचान उजागर होती है, लेकिन अधिनियम के अधीन मामले का विचारण करने के लिए सक्षम विशेष न्यायालय ऐसे प्रकरण को अनुज्ञात कर सकेगी
  • यदि उसकी राय में ऐसा प्रकरण बच्चे के हित में होगा।
  • मीडिया या स्टूडियो या फोटो चित्र से संबंधित सुविधाओं का प्रकाशक या स्वामी संयुक्त रूप से अपने कर्मचारी के इस कार्य के लिए उत्तरदायी होगा।
  • कोई व्यक्ति जो निर्धारित प्रावधानों का उल्लंघन करता है, वह किसी भी प्रकार का कारावास से जो छह माह से कम नहीं होगा,
  • किन्तु जो एक वर्ष तक का हो सकेगा या जुर्माने से या दोनों से दंडनीय होगा।

किसी भी प्रकार से पहचान न हो साबित

  • आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि किशोर न्याय अधिनियम 2015 की धारा-74 के तहत भी बच्चे की पहचान प्रकट करने पर प्रतिबंध है।
  • किसी जांच या अन्वेषण या न्यायिक प्रक्रिया के बारे में किसी समाचार पत्र या पत्रिका या दृश्य-श्रव्य माध्यम या संचार के किसी अन्य रूप में किसी रिपोर्ट में बच्चों के नाम, पते, विद्यालय या किसी अन्य विशेष बातों  को प्रकट नहीं किया जाएगा,
  • जिससे विधि का उल्लंघन करने वाले बच्चे या देख-रेख और संरक्षण के जरूरत मंद बच्चे या किसी बाल पीडित या किसी अपराध के साक्षी की पहचान हो सकती है।
  • ऐसे बच्चे का फोटो भी प्रकाशित नही किया जाएगा।
  • परंतु जांच करने वाला बोर्ड या समिति ऐसे प्रकटन, लेखबद्ध किए जाने वाले ऐसे कारणों से अनुज्ञात कर सकेगी,
  • जब उसकी राय में ऐसा प्रकटन बालक के सर्वोत्तम हित में है।
  • पुलिस भी चरित्र प्रमाण पत्र के प्रयोजन के लिए या अन्यथा बच्चे के किसी अभिलेख का ऐसे मामलों में प्रकट नहीं करेगी,
  • जहां मामला बंद किया जा चुका हो या उसका निपटारा किया जा चुका हों।

इन नंबरों से ले सकते हैं मदद

  • इन प्रावधानों का उल्लंघन करने वाला व्यक्ति छह माह का कारावास या जुर्माना जो 2 लाख रूपए तक होगा या दोनों से दण्डनीय होगा।
  • इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सिविल लाईन रायपुर स्थित कार्यालय के
  • अधिकारियों से उनके टेलीफोन नम्बर 0771-2420093 अथवा 0771-2420094 या 0771-2420095 पर सम्पर्क किया जा सकता है।
  • आयोग के टोल फ्री नम्बर 1800-233-0055 पर अथवा चाईल्ड हेल्प लाईन 1098 पर भी इस बारे में जानकारी ली जा सकती है।

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