कोमाखान

सोलर प्लांट नहीं कर पा रहा गांव में दूर अंधियारा, दो घंटे बाद बंद हो जाती है विद्युत की धारा

लालटेन युग में आज भी जी रहे पाड़ादाह के ग्रामीण

बारनवापारा से शिव ठाकुर,की रिपोर्ट।

सोलर प्लांट नही कर पा रहा गांव में दूर अंधियारा, दो घंटे बाद बंद हो जाती है विद्युत की धारा। ग्रामीणों का फिर होता है लालटेन ही सहारा। कुछ ऐसा ही कहना है मुड़पार पंचायत (ब) के आश्रित ग्राम पाड़ादाह के ग्रामीणों का।

  • इनकी माने तो शाम को जैसे ही क्रेड़ा द्वारा गांव में स्थापित सोलर प्लांट से घरों में आधे-अधूरे लगे कनेक्शन के माध्यम से विद्युत आपूर्ति की जाती है तो लगता है कि जलते बल्ब इन्हें रात में इसी तरह जगमग रहकर उजियारा बिखेरता रहेगा। लेकिन, इन्हें क्या मालूम कि चंद दो घंटे बाद ही इसकी रोशनी चले जाएगी और फिर से लालटेन ही अंधेरा दूर करेगा।
  • जबकि कई घरों में आज भी विद्युत कनेक्शन ही नहीं है तथा गली में भी पर्याप्त बल्ब भी नही लगे हैं।
  • बावजूद करीब 10 किलो वॉट सोलर प्लांट का हालेबेहाल लगभग एक वर्ष के भीतर ही बताया जाता है।
  • खराब होने वाले स्ट्रीट लाइटें भी बनकर आने बाकी रह जाती है। जबकि ग्रामीण इस समस्या को निदान के लिए सुझाते रहने की बात करते हैं। ताकि, अधिकारी सोलर प्लांट की उजाला इनके गांव के हर घर में पहुंचा सकें। लेकिन मात्र इन्हें सांत्वना से संतोष होना पड़ता रहा है।

बैटरी-वायर के लिए अलग-अलग ठेकेदार

  • इसके अलावा इस गड़बड़झाला के लिए इन्हें यहां तक जवाब मिलने की जानकारी ग्रामीणों से मिलती है कि बैटरी, पैनल, वायर, खंभा आदि के ठेकेदार अलग-अलग हैं। इसमें हम लोग छेड़खानी नहीं कर सकते।
  • सोलर प्लांट में लगी मशीन व बैटरी पांच साल की गारंटी-वारंटी में है। इसलिए मशीन में बैटरी का यूनिट कम मात्रा सेटिंग के साथ ही टिकाऊ के लिए विभाग व ठेकेदार द्वारा कमप्लिट (पूर्ण) नही होना बताया जाता है।
  • जहां कहीं भी शिकायत होने पर इसमें सुधार करने की बात गांव के लोगों को सुनाने से नहीं हिचकते।
  • ऐसे में लोगों के पास गुहार लगाने की मजबूरी आज भी है। लेकिन अपनी इस पीड़ा को अब वे मीडिया के माध्यम से शासन-प्रशासन का ध्यानाकर्षित कर समस्या निवारण में भरोसेमंद दिखते हैं। शायद ऐसा करना अधिकारियों की उदासीनता ही इन्हें विवश किया हो।

श्रमिकों का मजदूरी भुगतान शेष

  • यहां इसके अतिरिक्त कई खामियां भी देखने और सुनने को मिलता है।
  • जिसमें एक वर्ष तकरीबन हो गया है, लेकिन कनेक्शन-वायरिंग करने वाले स्थानीय गांव क्षेत्र के काम करने वाले श्रमिकों का अभी तक मजदूरी भुगतान शेष होने बताया जा रहा है।
  • जबकि करीब वर्षभर में निर्माण की गुणवत्ता की पोल यहां गांव की गली में लोहे की खंभों के सहारे विद्युतीकरण के लिए खींचें गए केबल कनेक्शन वायर अब जमीन की ओर ढीली होकर लकटके दिखता है।
  • कनेक्शन भी धीरे-धीरे गायब होकर यह साबित कर रहा है कि रख-रखाव पर कितना ध्यान दिया जा रहा है।
  • रही बात खतरे की तो ये भी सामने आने लगा है। क्योंकि सुरक्षा के लिहाज से जहां खंभों में कनेक्शन वायरिंग बंद किया गया था, वहां अब खुली तारे दिख रहा है। जिसका लोहे की खंभों से संपर्क होते विद्युत धारा दुर्घटना को अंजाम दे सकता है।
  • फिर भी किसी भी जवाबदेह को चिंता नही होना लापरवाही के साथ कई कारनामों को उजागर करने की चुनौती दिखता है।

नहीं आया कोई आवेदन

  • क्रेड़ा के एई ए.गर्ग से चर्चा करने पर उन्होंने ने कहा कि दो घंटे विद्युत आपूर्ति गलत है। फूल यूनिट आपूर्ति में भी इसे ज्यादा घंटे तक बल्ब जलेंगी।
  • उन्होंने शासन के छः घंटे की मापदंड के अनुरूप बताते हुए कहा कि सुबह चार बजे से छःबजे तक दो घंटे तक तथा शाम छःबजे से रात दस बजे तक विद्युत आपूर्ति करनी होती है। लेकिन, हमने तो इससे कहीं ज्यादा आपूर्ति कर रहे हैं।
  • नए कनेक्शन के लिए हमारे पास आवेदन नहीं आया है। आवेदन आने पर कनेक्शन दिया जाएगा।

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