रायपुर

मैं फेल होता था तो पिताजी मुझे फूल देकर रेस्टाेरेंट में खाना खिलाते थे : अनुपम खेर

रायपुर.फिल्म अभिनेता अनुपम खेर का मानना है कि टेक्नॉलाजी का अपना महत्व और उपयोगिता होती है। टेक्नॊलाजी ने नई और पुरानी पीढ़ी के बीच संवादहीनता बढ़ा दी है। यह स्थिति चिंताजनक है। खेर  शनिवार को नया रायपुर में जनसंपर्क अधिकारियों की मीडिया संगोष्ठी शामिल हुए। खेर ने अपने संघर्षों और 34 वर्ष के फिल्मी अनुभवों को साझा किया। उन्होंने कहा मैं भी स्कूल की कक्षाओं में फेल हुआ हूं। एेसे में पिताजी मुझे फूल देकर या किसी रेस्टोरेंट में खाना खिलाकर मेरा मनोबल बढ़ाया करते थे।

परिवार का हर सदस्य मोबाइल में व्यस्त

खेर का कहना है कि आधुनिक जीवन शैली ने व्यस्तता बढ़ा दी है। पहले घर-परिवारों में सब लोग एक साथ बैठकर खाना खाते थे। लेकिन अब लगभग हर सदस्य मोबाइल लेकर वाट्सएप और फेसबुक में व्यस्त हैं। इससे सदस्यों के बीच संवाद कम हो रहा है। उन्होंने परिवार के सदस्यों के बीच परस्पर संवाद और सामंजस्य की जरूरत पर विशेष रूप से बल दिया।

पिताजी का वेतन 90 रुपए और परिवार में 14 सदस्य 

खेर ने कहा कि उनका जन्म शिमला के निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में हुआ। पिताजी वन विभाग में क्लर्क थे। उनका वेतन सिर्फ 90 रूपए था। संयुक्त परिवार में कुल 14 सदस्य थे। एक बेडरूम वाले कमरे में सब मिलकर गुजारा करते थे। हर हाल में खुश रहना मैंने परिवार के अन्य सदस्यों से सीखा। आज जो कुछ भी हूं, वह अपने माता-पिता की वजह से हूं।

दिए कामयाबी के मंत्र

  • आपकी खुशियां स्वयं के आपके हाथों में है।
  • कामयाबी हासिल करने के लिए जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण रखे।
  • कोई भी व्यक्ति जन्मजात एक्टर नहीं होता। क्षमता विकसित करनी पड़ती है।
  • अभिरूचि और अभ्यास से महत्वपूर्ण।
  • किसी भी परिस्थिति में हमें असफलताओं से नहीं डरें।
  • विफलताओं को चुनौती के रूप में लें।

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