गरीबों की मदद करने के बजाए उन्हें सक्षम बनाएं, तब जाकर जड़ से मिट पाएगी देश से गरीबी

जैसा कि हम सभी जानते हैं, अंतर्राष्ट्रीय समुदाय ने संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से सतत् विकास के 17 लक्ष्यों की ऐतिहासिक योजना शुरू की है। इसका उद्देश्य वर्ष 2030 तक अधिक संपन्न, समर्थ, सक्षम, समतावादी और संरक्षित विश्व की रचना करना है, जिस ओर हमारा भारत भी कदम बढ़ा चुका है। 2030 के भारत के सतत विकास के इन लक्ष्यों के अंतर्गत ऐसे विषय शामिल किए गए हैं, जिनसे हम लम्बे समय से जूझ रहे हैं, जैसे गरीबी, भुखमरी, शिक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य, जलवायु, अन्य प्राणियों, जल और पेड़-पौधों की सुरक्षा, आर्थिक वृद्धि, औद्योगिक विकास तथा अन्य। यदि हम बात करें पहले लक्ष्य यानि शून्य गरीबी की, तो अतीत के साथ ही आज भी हमारे देश में लाखों लोग ऐसे हैं,

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जिनके पास तन पर पहनने के लिए कपड़ा और खाने के लिए रोटी नहीं है। यदि वास्तव में इस लक्ष्य की प्राप्ति करना हमारा उद्देश्य है, तो गरीबों की मदद करने के बजाए उन्हें सक्षम बनाएं, जिससे कि आने वाले समय में वे अपने से ऊँचे ओहदे वाले लोगों के सामने झुककर नहीं, बल्कि गर्व से सीना तानकर खड़े हों। सही मायने में यही उनके लिए सबसे बड़ी मदद होगी। अतुल मलिकराम कहते हैं कि 2030 के भारत के लक्ष्य के तहत गरीबी को जड़ से खत्म करने के लिए सिर्फ सरकार ही नहीं, बल्कि हर एक देशवासी को अपना योगदान देना होगा और हर एक नागरिक को इसके प्रति आज से ही जिम्मेदार होना होगा।

हमें यह समझना होगा कि गरीब पहले ही अपनी आर्थिक कमजोरी के बोझ तले दबे हैं, उन्हें सब्सिडी देकर और अधिक लाचार बनने को मजबूर न करें, बल्कि उनके लिए बेहतर चिकित्सा और शिक्षा के ठोस नियम बनाएं जाएं। किसानों की फसलों हेतु भरपूर पानी की प्राप्ति के लिए नहरों आदि का निर्माण कराएं। साथ ही बिजली आदि जैसी समस्याओं का निवारण किया जाए। इस प्रकार की सभी मूलभूत आवश्यकताएं पूरी करके उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने लायक बनाएं और उनका मनोबल बढ़ाएं।अब समय आ गया है कि देश से गरीबी को पूर्ण रूप से खत्म करने के लिए उपरोक्त विषयों के तहत सख्त नियम तथा कानून बनाए जाएं, और इन पर गंभीरता से अमल करने के साथ ही कड़ी कार्रवाई की जाए।

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देश का हर एक नागरिक इतना शिक्षित हो कि अपना और अपने परिवार का पेट भरने में सक्षम हो सके। इस प्रकार कोई भी व्यक्ति जरुरत की किसी भी वस्तु के लिए किसी अन्य पर निर्भर नहीं होगा, और साथ ही अपने परिवार का भरण-पोषण भी खुशहाली से कर सकेगा। इसके साथ ही किसानों को अपनी मेहनत का पूरा पैसा दिया जाना चाहिए, ताकि वे निर्भर बनने के बजाए समृद्ध बन सकें। एक कानून यह भी हो कि देश में बनाई जा रही इस प्रकार की हर एक योजना का लाभ सबसे पहले गरीबों को मिलना चाहिए, जिससे उनका आत्मबल दोगुना हो सके। इन योजनाओं का बीच में हाथ रोकने या स्वयं लाभ लेने वाले शैतानी तत्वों को कड़ी से कड़ी सजा सुनाई जानी चाहिए। तब जाकर भारत वर्ष 2030 तक बन सकेगा गरीबी मुक्त देश।