जहां घास नहीं उगती थी आज वहां उग रहा मीठे एप्पल

छत्तीसगढ़। कृषि महाविद्यालय राजनांदगांव के ग्राम सुरगी स्थित प्रक्षेत्र की जिस पथरीली बंजर जमीन पर घास भी नहीं उगती थी वहां आज मीठे एप्पल बेर और अनार की फसल लहलहा रही है। और इन फलों की मिठास भी ऐसी कि पूरे छत्तीसगढ़ में इसका कोई सानी नहीं। इसके अलावा यहां कटहल, आम, अमरूद जैसे फलदार वृक्ष और लौकी, तरोई, भिन्डी, बरबट्टी आदि सब्जियों की फसल भी ली जा रही है। यह कमाल कर दिखाया है इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि वैज्ञानिकों ने। उन्होंने अपने जोश और जुनून से कामयाबी की नयी इबारत लिख दी है।
पंडित शिव कुमार शास्त्री कृषि महाविद्यालय राजनांदगांव को वर्ष 2015 में कृषि विभाग द्वारा ग्राम सुरगी में लगभग 12 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई गई जो मुरूम-पत्थरयुक्त थी। वहां न तो सिंचाई सुविधा थी न ही भू-जल पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध था। वहां खोदे गये बोरवेल में सिर्फ डेढ़ इंच पानी मिला। महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. ए.एल. राठौर और उनके सहयोगियों ने इसे एक चुनौती के रूप में स्वीकार करते हुए पिछले वर्ष यहां ड्रिप ईरिगेशन के साथ चार एकड़ क्षेत्र में एप्पल बेर, डेढ़ एकड़ में अनार, दो एकड़ में आम, एक एकड़ में अमरूद और आधा एकड़ क्षेत्र में कटहल जैसे फलदार पौधों की उन्नत किस्मों का रोपण किया। इसके साथ ही उन्होंने अंतरवर्ती फसलों के रूप में लौकी, तरोई, भिन्डी, बरबट्टी, ग्वारफली आदि सब्जियों की फसल भी ली। प्रक्षेत्र की फेन्सिंग के साथ-साथ खमार और बांस के पौधें लगाये गये। अब इन पौधों में फल आने लगे हैं। एप्पल बेर में प्रति पौधा 10 से 15 किलो फल प्राप्त हुए हैं जो अपनी मिठास एवं अच्छे स्वाद की वहज से बाजार में 40 रूपये प्रति किलो की दर पर बिक रहे हैं।
डॉ. राठौर कहते है कि अब तक लगभग 15 क्विंटल बेर बाजार में बेचे जा चुके हैं। अनार के पौधों में भी फल आने शुरू हो गए हैं। इसके पहले अमरूद के पौधों से भी फलों की एक खेप प्राप्त हो चुकी है। अंतरवर्ती फसल के रूप में सब्जियां भी लगातार निकल रही हैं जिसे बाजार में बेचने से नियमित आमदनी प्राप्त हो रही है। वे कहते है कि एप्पल बेर, अनार और अमरूद के नये पौधे तैयार किये जा रहे हैं जिसे आगामी मौसम में जिले के किसानों को उपलब्ध कराया जायेगा। जिससे इन फलों की मिठास दूर-दूर तक बिखर जाए।

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