महासमुंद में जल जीवन मिशन बना ‘मौत का गड्ढा’-₹20.78 लाख खर्च, टंकी अधूरी, ठेकेदार लापता

“ये पानी की टंकी नहीं… ये महासमुंद में बना मौत का गड्ढा है!”

दिलीप शर्मा, महासमुंद। जल-जीवन मिशन के नाम पर बागबाहरा ब्लॉक के खुर्सीपार गांव में जो हालात हैं, वे शासन-प्रशासन के दावों की पोल खोल रहे हैं। पोर्टल पर भले ही योजना “निर्माणाधीन” बताई जा रही हो, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि गांव में पानी टंकी का निर्माण ही पूरा नहीं हुआ। टंकी के लिए खोदा गया गहरा गड्ढा अब ग्रामीणों के लिए “मौत का गड्ढा” बन चुका है।

लोहे के लंबे-लंबे सरिए खुले आसमान के नीचे खड़े हैं, चारों तरफ अधूरा ढांचा पड़ा है और काम पिछले चार महीनों से ठप है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदार काम अधूरा छोड़कर गायब हो गया है।


योजना का पूरा विवरण

  • योजना नाम: SVS KHURSIPAR

  • प्रकार: Single Village Piped Water Supply

  • कार्य आदेश: 20 सितंबर 2022

  • अनुमानित लागत: ₹66.13 लाख

  • अब तक खर्च: ₹20.78 लाख

  • स्थिति (पोर्टल पर): निर्माण कार्य जारी

लेकिन सवाल यह है — जब ₹20 लाख से अधिक खर्च हो चुके हैं तो जमीन पर प्रगति शून्य क्यों दिख रही है?


180 घरों में सिर्फ 1 को नल कनेक्शन

गांव में कुल 180 परिवार हैं।
पोर्टल के अनुसार केवल 1 घर में ही नल कनेक्शन दिया गया है।

गांव में पाइपलाइन बिछाने और प्लेटफॉर्म बनाने का काम शुरू तो हुआ, लेकिन बिना टंकी के पानी कैसे पहुंचेगा? नल सूखे हैं और ग्रामीण आज भी पानी के लिए पुराने स्रोतों पर निर्भर हैं।


स्कूल-आंगनबाड़ी में कनेक्शन, पर टंकी नहीं

  • मिडिल स्कूल – कनेक्शन दर्शाया गया

  • प्राथमिक स्कूल – कनेक्शन दर्शाया गया

  • आंगनबाड़ी – कनेक्शन दर्शाया गया

  • पंचायत भवन – कनेक्शन दर्शाया गया

परंतु जब मुख्य जलस्रोत टंकी ही अधूरी है तो नियमित जलापूर्ति कैसे संभव है?


मजदूरी और बकाया भुगतान का आरोप

ग्रामीणों का कहना है:

  • चौकीदार की मजदूरी बकाया

  • स्थानीय मजदूरों का भुगतान लंबित

  • गांव के किराना दुकानदार का उधार बाकी

यानी सरकारी योजना के नाम पर स्थानीय लोगों को भी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।


सुरक्षा खतरे में

टंकी निर्माण के लिए खोदा गया गहरा गड्ढा, बाहर निकले सरिए और अधूरा ढांचा बच्चों व ग्रामीणों के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।

अगर कोई दुर्घटना होती है तो जिम्मेदारी किसकी होगी?


बड़े सवाल

  1. ₹20.78 लाख किस कार्य में खर्च हुए?

  2. जब भौतिक प्रगति नगण्य है तो भुगतान कैसे हुआ?

  3. ठेकेदार कौन है और वह कहां है?

  4. क्या विभाग ने साइट निरीक्षण किया?

  5. सूचना पटल अब तक क्यों नहीं लगाया गया?


पानी जांच के लिए 5 महिलाएं प्रशिक्षित

गांव में पानी की गुणवत्ता जांच के लिए 5 महिलाएं प्रशिक्षित हैं, लेकिन जब जलापूर्ति ही नियमित नहीं है तो यह व्यवस्था भी अधूरी ही मानी जाएगी।


अब प्रशासन से सीधा सवाल

क्या जल-जीवन मिशन के नाम पर कागजों में काम पूरा दिखाया जाएगा और जमीन पर अधूरी टंकी ग्रामीणों की जान जोखिम में डालेगी?

महासमुंद जिला प्रशासन, PHED और संबंधित अधिकारियों को इस मामले में तत्काल जांच कर कार्यवाही करनी चाहिए।

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