देवउठनी पर जानिए शुभ मुहूर्त, अब आरंभ हो जाएंगे मांगलिक कार्य

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कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी अर्थात  देवउठनी या देव उत्थान एकादशी पर भगवान विष्णु की पूरे विधि विधान से पूजा की जाती है। शस्त्रों के मुताबिक, भाद्रपद मास की शुक्ल एकादशी को भगवान विष्णु दैत्य शंखासुर को मारा था। दैत्य और भगवान विष्ण के बीच युद्ध लम्बे समय तक चलता रहा। युद्ध समाप्त होने के बाद भगवान विष्णु बहुत ही थक गए थे और क्षीर सागर में आकर सो गए और कार्तिक की शुक्ल पक्ष की एकादशी को जागे, तब देवताओं द्वारा भगवान विष्णु का पूजन किया गया।

चातुर्मास का समापन

देवउठनी एकादशी से चार माह से चले आ रहे चातुर्मास का भी समापन हो जाएगा. बीते 1 जुलाई को चातुर्मास आरंभ हुए थे. 25 नवंबर को चातुर्मास समाप्त हो जाएंगे. इस एकादशी पर भगवान विष्णु का शयन काल समाप्त हो जाता है और पुन: वे पृथ्वी लोक की बागड़ोर अपने हाथों में ले लेते हैं. देवउठनी से मांगलिक कार्य आरंभ हो जाते है.
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तुलसी विवाह

देवउठनी एकादशी पर तुलसी विवाह और तुलसी पूजा का विशेष महत्व है. मान्यता है कि जो लोग जीवन में कन्या सुख से वंचित रहते हैं उन्हें तुलासी विवाह से विशेष पुण्य प्राप्त होता है. ऐसा माना जाता है कि तुलासी विवाह करने से कन्या दान के बराबर फल प्राप्त होता है.

शादी विवाह जैसे मांगलिक कार्य आरंभ होंगे

देवउठनी एकादशी के बाद जो मांगलिक कार्य चातुर्मास में वर्जित माने गए थे वे सभी कार्य अब आरंभ हो जाएंगे. शादी विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण संस्कार, मुंडन आदि जैसे कार्य किए जा सकेंगे. पंचांग के अनुसार 26 नवंबर से 11 दिसंबर तक शादी विवाह के मुहूर्त बने हुए हैं.

देवोत्थान एकादशी व्रत

देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है और उनका स्वागत किया जाता है. इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है. यह व्रत सभी प्रकार के पापों से मुक्ति दिलाता है. साथ सभी प्रकार की मनोकामनाओं को पूर्ण करता है. इस व्रत को सभी व्रतों में श्रेष्ठ माना गया है.
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एकादशी व्रत की विधि

देवउठनी एकादशी पर सुबह उठकर स्नान करें और इसके बाद एकादशी व्रत का संकल्प लेंकर पूजा आरंभ करनी चाहिए. इस दिन घर के आंगन में भगवान विष्णु के चरणों की आकृति बनानी चाहिए. प्रसाद के रूप में कार्तिक मास में उत्पन्न होने वाले फलों का प्रयोग करना चाहिए.
पूजा की थाल में फल, मिठाई, बेर, सिंघाड़े और गन्ना सजाकर भगवान भोग लगाना चाहिए. देवउठनी एकादशी की पूजा विभिन्न प्रकार से की जाती है. लेकिन इस पूजा में नियम और स्वच्छता का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इस दिन तुलसी विवाह भी कराया जाता है.

देवउठनी एकादशी शुभ मुहूर्त

देवउठनी एकादशी व्रत 25 नवंबर 2020 को बुधवार के दिन पड़ रही है, एकादशी तिथि 25 नवंबर को 02:42 बजे से आरंभ होगी और 26 नवंबर, 2020 को शाम 05:10 पर समाप्त होगी. शुभ समय- 6:00 से 9:11, 5:00 से 6:30 तक

राहुकाल- दोप. 12:00 से 1:30 बजे तक

देवशयनी एकादशी पर से ही सभी शुभ कार्य बंद हो जाते है जो देवउठनी एकादशी से शुरू होते हैं। इन चार महीनों के दौरान ही दीवाली मनाई जाती है। जिसमें भगवान विष्णु के बिना ही मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है, लेकिन देवउठनी एकादशी पर भगवान विष्णु को जगाने के बाद देवी देवताओं, भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा करके देव दीवाली मनाते हैं। देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से पूरे परिवार पर भगवान की विशेष कृपा बनी रहती है। इसके साथ ही मां लक्ष्मी घर पर धन सम्पदा और वैभव की वर्षा करती हैं।