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क्या है सिकलसेल, इसे फैलने से कैसे रोके और इसका इलाज कैसे करें, आस्था संस्था ने स्कूली बच्चों को दी जानकारी

छत्तीसगढ़। आस्था संस्था महासमुंद द्वारा ग्राम कनेकेरा में स्कूली बच्चों हेतु सिकलसेल परीक्षन व जागरुकता कार्यक्रम का किया आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्था प्रमुख तारिणी चन्द्राकर द्वारा उपस्थित बच्चों को सिकलसेल के कारण व इसे फैलने से रोकने की जानकारी दी। विनोद रंगारी द्वारा बच्चों को सिकल सेल से संक्रमित बच्चों को इसके संपूर्ण इलाज के लिए प्रेरित करते हुए सिकल कुंडली की जानकारी दी। फ्लीप कार्ड के माध्यम से समझाया उपस्थिति बच्चों का लेब तकनीशियन कनोजे ज़िला स्वस्थ्य  विभाग द्वारा सिकलसेल परीक्षण किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में स्कूली बच्चे उपस्थिति थे स्कूल संस्था पदाधिकारी कनेकेरा का विशेष सहयोग रहा।

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जानिए क्या है सिकलसेल

सिकल सेल रोग खून से जुड़ी एक बीमारी है, जो बच्चे में अपने माता या पिता या दोनों से आनुवंशिक रूप से आती है। इस बीमारी में खून में पर्याप्त संख्या में लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी/ रेड ब्लड सैल्स) नहीं होतीं, जो शरीर में ऑक्सीजन ले जाने के लिए जरूरी हैं। सिकल सेल रोग, आमतौर पर बाल्यावस्था में उत्पन्न होता है और प्रायः ऐसे लोगों (या उनके वंशजों में) में पाया जाता है। पूरे देश में सबसे अधिक छत्तीसगढ़ में सिकलसेल की बीमारी पाई गई है।

छत्तीसगढ़ में सिलसेल का व्यापक असर

छत्तीसगढ़ में साल 2008 में 127223 लोगों की सिकलसेल की जांच की गई थी, जिसमें 114752 निगेटिव, 12058 सिकलसेल एएस तथा 413 सिकलसेल के एसएस रोगी पाए गए थे । इसी प्रकार वर्ष 2017 में 161937 लोगों की सिकलसेल जांच की गयी जिसमें 145101 निगेटिव, 16209 सिकलसेल एएस तथा 614 सिकलसेल के एसएस रोगी मिले थे। वहीं वर्ष 2018 में 15843 लोगों की सिकलसेल जांच की गई, जिसमें 14194 निगेट्यूव, 1570 सिकलसेल एएस तथा 73 सिकलसेल के एसएस रोगी मिले

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ठीक इसी तरह वर्ष 2008 से वर्ष 2018 तक कुल 18 लाख 13 हजार 72 लोगों की सिकलसेल जांच की गई, जिसमें 16 लाख 25 हजार 752 निगेट्यूव, 1 लाख 80 हजार 80 सिकलसेल एएस तथा 7221 सिकलसेल एसएस पाए गए । वहीं वर्ष 2017-18 में चिरायु दलों के माध्यम से आंगनबाड़ी केन्द्रों व स्कूलों में 8 लाख 6 हजार 499 लोगों की सिकलसेल जांच की जा चुकी है ।

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लक्षण: सूजन हाथ, पैरों या पेट, जोड़ों में दर्द, संक्रमण (पित्ताशय की थैली, मूत्र पथ, फेफड़ों, हड्डी, आदि।) बुखार होना।

सिकल सेल एनीमिया: निदान

रक्त परीक्षण कर जांच करा सकते हैं। कोई भी व्यक्ति सिकल सेल रोग या लाल रक्त कोशिकाओं में S-हीमोग्लोबिन की उपस्थिति है तो वह सिकल सेल रोग से प्रभावित होता है। किसी भी संक्रमण को रोकने के लिए दैनिक एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग सिकल सेल जीन की मौजूदगी को दूर किया जा सकता है। इसके अलावा प्रदेश के सभी अस्पतालों में इसका नियमित उपचार किया जा रहा है।

यहां देखिए : सिकलसेल के लिए चला रहे जनजागरुकता का तस्वीर 

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