रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की नई आबकारी नीति के तहत इस वर्ष होली के दिन शराब दुकानें बंद नहीं रहेंगी। पूर्व में होली को ड्राई डे घोषित किया जाता था, लेकिन नई नीति में सात ड्राई डे में से तीन दिनों को समाप्त कर दिया गया है। इनमें मुहर्रम, महात्मा गांधी निर्वाण दिवस और होली शामिल हैं।
सरकार के इस निर्णय के बाद इस बार होली के दिन शराब खरीदने के लिए पहले से स्टॉक रखने की आवश्यकता नहीं होगी। पहले होली के दिन शराब दुकानें बंद रहती थीं और पूर्व संध्या पर बड़ी संख्या में खरीदारी होती थी।
नई आबकारी नीति के अनुसार, राज्य में शराब बिक्री से राजस्व संग्रह बढ़ाने के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए यह बदलाव किया गया है।
✍️ संपादकीय टिप्पणी दिलीप शर्मा
यह फैसला किस दिशा में इशारा करता है?
छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों से शराबबंदी को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी होती रही है। चुनावी मंचों से शराबबंदी के वादे भी किए गए। लेकिन जमीनी सच्चाई क्या है?
होली जैसे पारंपरिक त्योहार पर ड्राई डे समाप्त करना केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं, बल्कि एक नीति संकेत है। यह संकेत किस ओर है?
क्या सरकार राजस्व बढ़ाने के लिए शराब बिक्री को प्राथमिकता दे रही है?
क्या त्योहारों की सामाजिक संवेदनशीलता पर आर्थिक गणित भारी पड़ रहा है?
क्या यह कदम नशामुक्ति के प्रयासों के विपरीत संदेश नहीं देता?
त्योहार सामाजिक समरसता, रंग और संस्कृति का प्रतीक होते हैं। ऐसे अवसरों पर शराब बिक्री को खुली छूट देना समाज में कानून-व्यवस्था और घरेलू हिंसा जैसे मुद्दों को भी प्रभावित कर सकता है — यह भी विचारणीय है।
राज्य सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि:
क्या शराबबंदी अब एजेंडे में नहीं है?
क्या राजस्व प्राथमिकता बन गया है?
क्या सामाजिक प्रभावों का अध्ययन किया गया है?
नीति का उद्देश्य केवल कमाई नहीं, समाज का संतुलन भी होना चाहिए।





















