खुल गई किस्मत, अब घर बैठे कमाएं लाखों रुपये महीना, जल्द उठाएं यह कदम

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नई दिल्ली. कोरोना (corona) काल में अगर आप कोई कारोबार शुरू कर मोटी रकम कमाना की सोच रहे हैं तो यह खबर आपके बड़े ही काम की है. कृषि के क्षेत्र में आप छोटा से कारोबार शुरू कर आप पैसा कमा सकते हैं. यह कोरोना काल में जिंदगी के साथ-साथ कारोबार (business) जगत को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है. अब कोरोना की रफ्तार जैसे ही कम हुई तो आर्थिक पहिया फिर से पटरी पर आता दिख रहा है. ऐसे में हर कोई पैसे कमाना चाहता है, जिससे घरेलू खर्च में कोई दिकक्त ना आए. बतादें कि आप मुर्गी पालन कर सकते हैं, जिसके लिए सरकार भी मदद कर रही है. इस कारोबार को 5-9 लाख रुपये में शुरू किया जा सकता है.

छोटे स्तर यानी 1500 मुर्गियों से लेयर फार्मिंग (layer farming) की शुरुआत करेंगे तो आप 50 हजार से 1 लाख रुपये हर महीने की कमाई कर सकते हैं.पॉल्ट्री फार्मिंग (poultry farming) के लिए आपको सबसे पहले एक जगह तलाशनी होगी. इसके बाद पिंजड़े और इक्विपमेंट (Cages and Equipment) पर लगभग 5-6 लाख रुपये खर्च करना होगा. 1500 मुर्गियों के लक्ष्य से काम शुरू करना हो तो 10 प्रतिशत ज्यादा चूज़े खरीदने होंगे बतादें कि इस कारोबार में आपको अंडे से भी होगी जबरदस्त कमाई होगी. देश में अंडे के दाम बढ़ने लगे हैं.  ऐसे में इसे बेचकर आपको अच्छी खासी कर सकते हैं. वहीं, एक लेयर पैरेंट बर्थ (layer parent birth) की कॉस्ट लगभग 30-35 रुपये होती है. मुर्गियां खरीदने के लिए 50 हजार रुपये का बजट रखना होगा. अब इन्हें पालने के लिए अलग-अलग तरह का खाना खिलाना पड़ता है और साथ ही मेडिकेशन पर भी खर्च करना पड़ता है.

सालाना होगी अच्छी कमाई

लगातार 20 हफ्ते तक मुर्गियों को खिलाने का खर्च होगा करीब 1 से 1.5 लाख रुपये. एक लेयर पैरेंट बर्ड
(parent bird) एक साल में लगभग 300 अंडे देती है। 20 हफ्ते बाद मुर्गियां अंडा देना शुरू कर देती है और साल भर तक अंडे देती है. 20 हफ्तों के बाद इनके खाने पीने पर तकरीबन 3-4 लाख रुपये खर्च होता है. ऐसे में 1500 मुर्गियों से 290 अंडे प्रति वर्ष के औसत से लगभग 4,35,000 अंडे मिलते हैं. बर्बादी के बाद भी अगर 4 लाख अंडे बेच पाएं तो थोक भाव में एक अंडा 5-7 रुपये की दर से बिकता है.

साल भर में सिर्फ अंडे बेचकर अच्छी खासी कमाई कर सकते हैं. वहीं, पॉल्ट्री फार्म के बिजनस के लोन पर सब्सिडी (subsidy) करीब 25 प्रतिशत होती है. वहीं, SC-ST वर्ग को प्रोत्साहन देने के लिए यह सब्सिडी 35 प्रतिशत तक हो सकती है। बता दें कि इस कारोबार की खासियत यह है कि इसमें कुछ रकम खुद लगानी होती है और बाकी की बैंक से लोन मिल जाएगा.