महासमुंद: एक किसान को 17 बार भुगतान, फारेस्ट में भष्ट्राचार सारी हदें पार, हाथी द्वारा फसल नुकसान के नाम पर फर्जीवाड़ा

महासमुंद / सामान्य वन मंडल में नवपदस्थ पंकज राजपूत वनमंडलाधिकारी महासमुंद से समाज सेवी व जनपद सदस्य प्रतिनिधि लोकेश चंद्राकर द्वारा एक विशेष बैठक में डीएफओ पंकज राजपूत से वार्तालाप के दौरान कहा गया कि महासमुंद वन परिक्षेत्र अंतर्गत हाथी द्वारा फसल क्षति के नाम पर अनाप-शनाप प्रकरण बनाकर भारी मात्रा में फर्जीवाड़ा सामने आया। जिसमें अधिकारी से लेकर निचले स्तर के कर्मचारिगण संलिप्त है एवं निचले स्तर के कर्मचारी वन रक्षक रूपा चतुर्वेदी द्वारा अपने परिवार को दुगुना लाभ पहुचाने का आरोपी सिद्ध हुआ और निलंबित कर दिया ।

अपितु पुरे प्रकरण में शामिल प्रमाणितकर्ता अधिकारी तत्कालिन रेंजर एवं निरीक्षणकर्ता अधिकारी एस.डी.ओ. एवं चेक जारी करने वाले अधिकारी तत्कालिन डी.एफ.ओ.  के ऊपर कार्यवाही क्यो नही किया जा रहा है। वन परिक्षेत्र अधिकारी महासमुंद द्वारा कहा जाता है कि, मुझे कुछ मालूम नही सारे प्रकरण में हाथी दल टीम गठित की गई है वहीं लोग सब बनाते है, और उप वनमंडलाधिकारी महासमुंद भी यहीं कहते है कि हमें कुछ पता नही सारे प्रकरणों में हाथी दल कि जो टीम है उनके द्वारा प्रकरण तैयार किया जाता है और यहा तक तत्कालिन महासमुन्द वन मंडलाधिकारी बात करना पसंद नही करते थे अब बात समझ से परें है कि,

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जब इन अधिकारियों को पता नही तो, प्रमाणित किसने किया, निरीक्षण किसने किया, और चेक जारी किसने किया, उसके बाद हाथी से फसल नुकसान का मुआवजा हितग्राही के खाते में पैसा किसके माध्यम से ट्रांसफर हुआ और महासमुंद वन मंडल में जैसे ही हाथी प्रकरण में फर्जीवाड़ा का खुलासा सामने आते ही दिनांक 21/07/2020 की स्थिति में हाथी प्रकरण से संबंधित सम्पूर्ण दस्तावेजों का एक साथ अचानक चोरी हो जाना संदेहास्पद मालूम पड़ता है ।

इस पर वर्तमान वनमंडलाधिकारी का कहना है कि, चोरी किये गये  संपूर्ण दस्तावेज अपने स्थान पर रखे हुये हैं। जबकि,ज्ञातव्य हो कि,फसल क्षति मुआवजा के दस्तावेजों की चोरी का मामला लेकर वन मंडल के कर्मचारीगण सिटी कोतवाली गये हुये थे। फिर एफ आई आर दर्ज क्यो नही हुई, किन्तु आज आपके अनुसार फसल क्षति के समस्त दस्तावेज कैसे अपने जगहें में वापस आ गए …बहुत चौकाने वाली खबर है..? क्या उन संपूर्ण दस्तावेजों के पैर निकल आये या कहानी कुछ और है।

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श्री चंद्राकर ने आगे कहा कि, आपके डिवीजन कार्यालय में इतनी सुरक्षा प्रहरी होने के बाद दस्तोवेजो का एक साथ चोरी होने का सीसीटीवी रिकार्ड मौजूद है। अपितु वापस उस दस्तावेजों का एक साथ उसी जगह पाए जाना संदेहास्पद प्रतीत हो रहा है कृपया उसका भी सीसीटीवी फुटेज निकाला जाये, तत्कालिन अधिकारी व मुख्यलिपिक से बात करने पर मुख्यलिपीक के द्वारा कहा जाता है कि हमलोगों ने FIR दर्ज करा दिये है, अगर कापी चाहिये तो RTI लगा लो करके बोला जाता  है, जबकि बेबाक बयान नयूज द्वारा दूरभाष के माध्यम से पुलिस अधीक्षक महासमुंद से चर्चा करने पर बताया कि,

वन विभाग के द्वारा किसी भी प्रकार से कोई FIR दर्ज नही कराया गया है ये लोग इतला सूचना को ही FIR मानते है लग रहा है। वन विभाग पुरी तरह से बचने के लिये ये सब हथकण्डे अपना रहे है। तत्कालिन महासमुंद वन मंडलाधिकारी एवं उप वनमंडलाधिकारी व वनमंडल के मुख्य लिपिक के द्वारा जिस प्रकार से भ्रामक जानकारी देकर गुमराह किया जा रहा है औऱ हाथी प्रकरण से जुड़े फर्जीवाड़ा को ढ़कने का जिस प्रकार से प्रयास किया जा रहा है ,जो कि निकट भविष्य में विभाग के लिये बहुत बड़ी क्षति है।

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शासन को करोड़ों रुपयों का चूना लगाने का कार्य चरम सीमा पर है। इतना कुछ हो जाने के बावजूद वनमंत्री एवं प्रधान मुख्य वन संरक्षक का चुप रहना ऐसे भ्रष्टाचार को बढ़ावा देना है। वन मंत्री जी इतना बड़ा हाथी प्रकरण में फर्जीवाड़ा का मामला उजाकर हुआ है जिसमें निचले स्तर के कर्मचारी से लेकर ऊपर तक के अधिकारीगण दोषी है। फिर भी आपके द्वारा कोई एक्सन नही लिया जाना समझ से परे है? शासन द्वारा निर्धारित दर से हटकर अपने हितैषियों के खाते में लाखों का रूपया का भुगतान करना शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाना है। वनमंत्री के खुली ढ़ील के कारण अधिकारी कर्मचारी इतने बड़े-बड़े फर्जीवाड़ा को अंजाम दे रहे है।

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इतने वर्षों से सामान्य वन मंडल महासमुंद में सबकुछ सहीं था जैसे ही तत्कालिन वन मंडलाधिकारी  एवं वर्तमान उपवनमंडलाधिकारी का पदस्थापित हुआ और यह फर्जीवाड़ा का काम धड़ल्ले से चलना चालू हो गया !और हाथी प्रकरण जैसे दस्तावेजों का चोरी हो जाना व गायब किया जाना संदेहजनक बात है ?मुख्यलिपिक का लंबे समय से जमें रहना और केवल हाथी प्रकरण से संबंधी दस्तावेज का एकाएक चोरी हो जाना यह पहली घटना है जबकि, आज तक इस वन मंडल में चोरी जैसी घटना कभी नही घटी लेकिन ये घटना चौकाने वाला है। जबकि वरिष्ठ कार्यालयों में दिन-रात सीसीटीवी कैमरों के साथ सुरक्षा कर्मी तैनाती की जाती है, सुरक्षा तैनाती के बावजूद चोरी होना चौकाने वाली बात है।

इस संबंध में प्रधान मुख्यवन संरक्षक एवं मुख्य वन संरक्षक के द्वारा कार्यवाही नही किया जाना श्रेयदेने जैसा प्रतीत हो रहा है…? इस हाथी प्रकरण में समस्त दोषी वन मंडलाधिकारी /उप वनमंडलाधिकारी /वन परिक्षेत्र अधिकारी /सहायक वन परिक्षेत्र अधिकारी /वन रक्षक सहित मुख्य लिपिक जिनका जिनका हाथ है।सारे दोषियों के विरूद्ध छ.ग. सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के तहत अनुशासनात्नक कार्यवाही किया जायें एवं ऐसे अधिकारियों/कर्मचारियों को महासमुंद वन मंडल से हटाया जायें ताकी भविष्य में ऐसे फर्जीवाड़ा ना हो पायें और वन विभाग कि शान बनी रहे। वन मंत्री उक्त विषय को लेकर गंभीरता से कार्यवाही करें ।

अनियमितता की पराकाष्ठा

एक किसान को 17 भुगतान

हाथी प्रभावित ग्राम कुकराडीह में लघु कृषक लोकनाथ पिता गिरधारी को फसल क्षति का मुआवजा देने में सारी हदो को दरकिनार करते हुये अलग-अलग 17 प्रकरणों में । क्रमशः 1- 13500 /- , 2 – 7200 /- , 3 – 2025 /- , 4 – 5825 /- , 5 – 4950 /- , 6 – 8100 /- , 7 – 7200 /- , 8 – 16650 /- , 9 – 7650 /- , 10 – 15525 /- , 11 – 4725 /- , 12 – 2025 /- , 13 – 5625 /- , 14 – 7825 /- , 15 – 11250 /- , 16 – 6750 /- और 17 – 36000 /- रुपये का मुआवजा प्रदाय किया गया है ।

लोकनाथ के पिता गिरधारी और भाई काशीराम को भी तीन पृथक-पृथक प्रकरणों में क्रमशः 13500 /- , 4500 /- और 8750 रुपये का मुआवजा दिया गया है। जबकि यह परिवार के पास उतने रकबे का कृषक भुमि हि नही है जिस अनुपात में उन्हें लाभान्वित किया गया है  केवल भ्रष्टाचार के नियत से हि किया गया।

जबकि द्वितीय किसान के परिवार को फसल क्षति का 24 प्रकरण का फायदा पहुचाया गया। सुविज्ञ सूत्रों ने बताया है कि, ग्राम कुकराडीह के स्वर्गवासी फिरंता गोड के परिवार को अलग – अलग नामों से कुल 24 प्रकरणों में लगभग 3 लाख रुपये का भुगतान किया गया है।

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मिली जानकारी के मुताबिक फिरंता गोड की बेवा श्रीमती गोमती बाई को एक प्रकरण में 5175 /- रुपये दिया गया है तो फिरंता के पुत्र मानसिंह को अलग-अलग तीन प्रकरणों में क्रमशः 22500/-, 9000/-, और 11250/- रुपये क्षतिपूर्ति प्रदाय किया गया है। मानसिंह की पत्नी श्रीमती इंदौती बाई को एक प्रकरण में 18000 /- रुपये की क्षतिपूर्ति राशि दी गई है तो मानसिंह के पुत्र प्रहलाद को भी दो प्रकरणों में 6750/- और 18900 /- रुपये तथा प्रहलाद की पत्नी नीलबाई को दो प्रकरणों 6750 /- एवं 5650 /- रुपये का भुगतान किया गया है।

फिरंता के एक अन्य पुत्र भगवानी को तीन प्रकरणों में क्रमशः 15075 /-,14650 /- और 7425 /- रुपये, भगवानी की पत्नी समारिन बाई को दो प्रकरणों में 18000 /- व 3825 /- रुपये तथा भगवानी के एक पुत्र भागीरथी को 4 प्रकरणों में 4500/- , 11250/- , 31500 /- तथा 13275 /- रुपये। भागीरथी की पत्नी जमुना बाई को 31500/- और 15300/- रुपये तथा भगवानी के ही एक अन्य पुत्र दिलीप को 4 अलग-अलग मामलों में 6750/- , 8100 /-, 4900 /- तथा 5625 रुपये का मुआवजा भुगतान किया गया है। दोषी अधिकारी व कर्मचारी के विरूध कार्यवाही नही होने पर इन सबकी शिकायत राज्यपाल, प्रधानमंत्री और आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो में भी दिया जावेगा। साथ ही साथ इसकी शिकायत व विशेष जांच हेतु राज्यपाल एवं मुख्य न्यायाधीश उच्च न्यायालय बिलासपुर को की जायेगी।