महासमुंद: दो साल बाद 5 लाख घुस मांगने का आरोप लगे समीर डुंग डुंग की फाइल फिर खुली…डा. चोपड़ा ने 15 बिंदुओं की अपनी आपत्ति दर्ज कराई

महासमुंद। पूर्व विधायक एवं भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश संयोजक डॉ विमल चोपड़ा ने आज उप पुलिस अधीक्षक कार्यालय में उपस्थिति दर्ज करा कर समीर डुंग डुंग के संबंध में प्रारंभ की गई जांच पर अपना बयान दर्ज कराया ।ज्ञात हो कि दिसंबर जनवरी 2018-19 के मध्य बलौदा चौकी प्रभारी समीर डुंग डुंग का एक ऑडियो वायरल हुआ था जिसमें उसे 5 लाख रुपये  की घूस मांगते सुना गया, एवं उस प्रकरण पर संपूर्ण पुलिस विभाग द्वारा पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में लीपापोती का सफल प्रयास किया गया।

नशीले कफ सिरप की स्मगलिंग छत्तीसगढ़ से उड़ीसा करने का आरोपी था, जिसे बचाने के एवज  में डुंग डुंग द्वारा 5 लाख रुपए की मांग की गई जिसका आडियो वायरल होने के पश्चात ना तो इसे निलंबित किया गया और ना ही कड़ी सजा दी गई । आदतन दुर्व्यवहार करने  वाला डुंग डुंग लाइन अटैच होने के कुछ दिन बाद पुनः मुख्यधारा में शामिल कर लिया गया। नशे के सौदागर को घूस लेकर संपूर्ण आजादी देने के इस प्रकरण में पुलिस विभाग एवं उसके आला अफसरों की काफी बदनामी हुई। डॉक्टर विमल चोपड़ा द्वारा इस प्रकरण की कठोर शिकायत मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री से की गई जिसकी जांच अब 2 वर्षों पश्चात प्रारंभ की गई है ।

डॉक्टर चोपड़ा ने इस प्रकरण एवं समीर डूंग डुंग  के अन्य प्रकरणों के संबंध में जिस किसी को भी कोई जानकारी हो वो डॉक्टर चोपड़ा को या आवेदन देकर जांचकर्ता उप पुलिस अधीक्षक को दे सकते हैं ।ताकि भविष्य में देश की पीढ़ियों को नशे की गिरफ्त में धकेलने वाले ऐसे ,रक्षक  ही भक्षक बन कर मौज ना करते रहे। डॉक्टर चोपड़ा ने अपने बयान में मांग की है कि प्रकरण पर एफ आई आर दर्ज कर न्यायालय के फैसले को सर्व सम्मति से मानने की प्रक्रिया अपनाई जाए।

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डॉक्टर चोपड़ा ने इस संबंध में 15 बिंदुओं की अपनी आपत्ति दर्ज कराई जो कि निम्न है-

दिनांक 3.4.2019 को सुचना के अधिकार के जवाब में श्री नारद सूर्यवंशी द्वारा(जिलासूचनाअधिकारी )जांच चलने की बात कही गई ,जबकि 11.03.2019 कोराजीव शर्मा (एसडीओपी) द्वारा जांच पूर्ण की जा चुकी थी फिर छुपायी क्यों गयी।

ऑडियो रिकॉर्डिंग एवं समीर डुंगडुंग का वापस सैंपल लेकर जांच क्यों नहीं की गई।

जांच अधिकारी ने निष्कर्ष में कहा कि ऑडियो में आवाज समीरडुंगडुंग की है फिर इतने बड़े प्रकरण में मात्र एक वेतनवृद्धि 1 वर्ष के लिए असंचयी प्रभाव से रोकेजाने का दंड जिसका प्रभाव भविष्य की वेतन वृद्धि एवं पेंशन पर नहीं पड़ेगा की सजा कहां तक उचित है।

पूरा आडियो सुनने से स्पष्ट है कि केस से बाहर निकालने के लिए पैसे की मांग समीर डुंगडुंग ने प्रारंभ की थी, जिसका जवाब गोलू अग्रवाल ने दिया था।अतः जांच में यह निष्कर्ष निकालना की आरोपी द्वारा चैकी प्रभारी को प्रलोभन देने का प्रयास किया गया पूर्णतः असत्य है।

जब बताये गये घटना दिनांक को 10लाख रुपए की पेशकश गोलू अग्रवाल ने की तो ऑडियो में 5 लाख का ऑफर ठुकराने की बात समीर डुंगडुंग ने क्यों कहीं? स्पष्टहै यह सब सौदेबाजी के दौर की बातें है।जिसमें समीर डुंग डुंग मन माफिक राशि ना मिलने के कारण गिरफ्तारी को लंबा खींचतेरहे।

समीर डूंगडुंग का वक्तव्य है कि 29.11 को ही फोन पर गोलू अग्रवाल ने 10 लाख भेजने की बात कही तो फिर गोलू अग्रवाल ऑडियो में 2 लाख से आगे नहीं बढ़ता,इससे स्पष्ट है कि समीर डुंगडुंग कि आरोपी द्वारा 10 लाख देने की बात मनगढ़ंत है साथ ही पुलिस के स्टाफ ने एक राय होकर ऐसा झूठ लिखाया है।

माननीय मुख्यमंत्री, माननीय गृहमंत्री के पत्र के बावजूद जांच में इतनी लापरवाही से जांचहेतु आदेशित करने वाले पुलिस अधीक्षक की मानसिकता उजागर होतीहै एवं यह भी इस प्रकरण में आरोपी को संरक्षणदेने के भागीदार एवं शासन के आदेशो को हल्के में लेने के दोषी हैं।जबकि अपराध अनुसंधान विभाग के पत्र दिनांक 20.3.19 में स्पष्ट उल्लेख है कि मेरे द्वारा की गई शिकायत के बिंदुओं की जांचकर तीन दिवस में जांच प्रतिवेदन अपनी टीप सहित उपलब्ध कराने कहा गया,परंतुसूचना के अधिकार से प्राप्त नस्ती में इस जांच का कहीं उल्लेख नहीं है।क्यों?

कार्यवाही के पूर्व उड़ीसा पुलिस को सूचना नहीं दी गई यहां तक तो बात समझ में आती है परंतु गोलू अग्रवाल की उड़ीसा में गिरफ्तारी एवं उसके एक्सयुवी में 2 पेटी कफ सिरप एवं गोडाउन में 2 पेटी कफ सिरप मिलने के पश्चात उड़ीसा पुलिसको एन.डी.पी.एस एक्ट की कार्यवाही उड़ीसा में भी करने एवं उसके गिरफ्तारी की सूचना देनी थी।यह इसलिए नहीं किया गया क्योंकि वहां गाड़ी एवं गोडाउन में कफ सिरप मिला ही नहीं, इसे बलौदा चैकी लाकर गाड़ी में डालकर फोटो खींचाने की कार्यवाही की गई और तब तक आरोपी के साथ सौदेबाजी होती रही एवं सौदा ना पटने परकार्यवाही की गई।

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प्रकरण की जांचमें शानू अग्रवाल को छोड़कर सारे गवाह चैकी में समीरडुंगडुंग के अधीनस्थ काम करने वाले हैं जो स्वयं ही इस लेन देन के हिस्सेदार थे फिर उन पर विश्वास क्यों? जबकि शानू अग्रवाल ने स्पष्ट कहा कि उसके फोन से गोलू अग्रवाल एवं समीर डुंग डुंग के मध्य बात हुई, फिर जांच में इस बात को निष्कर्ष के रूप में लिखना की समीर डुंग डुंग के फोन से बात नहीं हुई क्या सिद्ध करने का प्रयास है?

मेरे शिकायती पत्र में समीर डुंग डुंग के साथ पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक की भूमिका को संदेहास्पद बताया गया परंतु पुलिस अधीक्षक द्वारा स्वयं केनियंत्रण में जांच करना अनेक संदेह पैदा करताहै।

पुलिस मुख्यालय से अनेकपत्र एवं स्मरणपत्र आने के बावजूद उनकी अवहेलना करना अनेक संदेहो को जन्म देता है।

समीर डुंग डुंग ने आरोपी गुल्लू अग्रवाल के परिचित एवं रिश्तेदारों द्वारा धमकीदेने की बात कही है। यदि धमकी दी गई है तो क्या पत्र लिखकर उच्चअधिकारियों को जानकारी दी गई एवं इसकी एफ आई आर दर्ज की गई?

यह आरोप मनगढ़ंत है इसलिए ब्लैकमेल करने की रिपोर्ट समीर डुंग डुंग ने कराई क्योंकि सच्च आडीयो वायरल होने पर वह स्वयं ही भारी विचलितथा।

अपने कथन में समीर डुंग डुंग ने आरोप लगाया है कि आरोपी उसे रास्ते का कांटा समझकर हटाने का षड्यंत्र कर रहा था और उसे सफलता तब मिली जब तत्कालीन एसपी ने समीर डुंगडुंगको बलौदा चैकी से हटा दिया। ऐसा लगता है कि समीर डुंगडुंग का यह आरोप एस.पी. पर था कि उनकी आरोपी से मिली भगतहै।

कार्यालय मुख्यमंत्री निवास के 28.1.2019 के पत्र मेंस्पष्ट लिखा है कि माननीय मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार आवश्यक कार्यवाहीकर 15 दिवस के भीतर कार्यवाही से संबंधित को अवगत कराएं।परंतु पुलिस अधीक्षक द्वारा इसका पालन नहीं किया गया,क्यों?

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सहायक पुलिस महा निरिक्षक अ.अ.वि.उ.मु. नया रायपुर को पुलिस अधिक्षक द्वारा दिनांक 08.07.2019 को दिये गये जांच रिपोर्ट के बिंदू क्रमांक 07 में गुमराह करने का प्रयास किया गया।जबकि वायरल आडियो में स्पष्ट है कि डुंग डुंग द्वारा पैसो की बात की गई।

उसी प्रकार बिंदू 14 में आरोपी गोलु द्वारा चैकी प्रभारी को प्रलोभन देने की बात कही गई, जबकि आडियों में स्पष्ट है कि रूपये की बात डुंगडुंग ने प्रारंभकी।

समीर डुंग डुंग की कार्य प्रणाली हमेशा विवादास्पद रही है।महासमुन्द थाने में अल्प अवधी के कार्यकाल में      अ-राजू यादव ( छ.ग प्रदेश अध्यक्ष) ने प्रकरण में गवाही के दौरान समीरडुंगडुंग द्वारा दुर्वव्यहार एवं गालीगलौज की शिकायत की गई।

ब-समीर डुंगडुंग की कार्यप्रणाली से ही थाने में अनेको बार तनाव की स्थिति बनी जिसका शिकार इंटरनेशनल खिलाडी एवं आम जनता हुई।

स-भंवरपुर चैकी प्रभारी के रूपमें भीडुंग डुंग विवादास्पद रहे एवं अनेको जनप्रतिनिधियों ने भी एसपी को दिनांक27.01.2017 को की परंत बाद में दबाव पूर्वक उनसे शिकायत वापस करने आवेदन लिखवाया गया।