महासमुंद, 16 सितम्बर 2025। जिला सत्र न्यायालय महासमुंद ने मंगलवार को चीतल शिकार मामले में गिरफ्तार किए गए सात आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। यह कार्रवाई वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत दर्ज प्रकरण से जुड़ी हुई है।
📌 मामला क्या है
दिनांक 06 सितम्बर 2025 को गिरना टिकरापारा जंगल में वन्य जीव चीतल के शिकार का मामला सामने आया था। इस पर वन परिक्षेत्र पिथौरा द्वारा आरोपियों के खिलाफ वन्य जीव संरक्षण अधिनियम 1972 की धारा 9, 34, 43, 44, 50 एवं 51(abc) के अंतर्गत प्रकरण दर्ज कर सभी सातों को गिरफ्तार किया गया था।
📌 न्यायालय की कार्यवाही
पहले माननीय न्यायालय प्रथम श्रेणी, पिथौरा ने सभी आरोपियों को जिला जेल महासमुंद भेजने का आदेश दिया था।
इसके बाद आरोपियों ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जिला सत्र न्यायालय महासमुंद में जमानत हेतु आवेदन प्रस्तुत किया।
सुनवाई के दौरान वन परिक्षेत्र अधिकारी पिथौरा ने केस डायरी के साथ जमानत न दिए जाने का निवेदन किया।
शासकीय अधिवक्ता महासमुंद ने भी अपराध की गंभीरता, दो फरार आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने तथा प्रकरण के साक्ष्य नष्ट किए जाने की संभावना का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माननीय न्यायालय ने आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी।
📌 आरोपीगण के नाम
रामजी पिता पर्वत केंवट, ग्राम छिंदौली
चंदराम ठाकुर उर्फ शिकारी पिता दयालू ठाकुर, ग्राम छिंदौली
सोनसाय पिता रामजी केंवट, ग्राम छिंदौली
बिसाहू पिता चिंताराम, ग्राम छिंदौली
भगवान सिंह पिता जय सिंह पटेल, ग्राम गिरना
भोलाराम पिता नेतराम खड़िया, ग्राम गिरना
अनादि पिता बलराम यादव, ग्राम बड़ेलोरम
📌 वर्तमान स्थिति
सभी सात आरोपी जिला जेल महासमुंद में निरुद्ध हैं, जबकि दो अन्य आरोपी अब भी फरार बताए जा रहे हैं।




