महासमुंद : पढ़ना न भूले कवि जवान अनिल यादव द्वारा रचित कविता “हमर किसान”

महासमुंद। हमर किसान छत्तीसगढ़ी में लिखी गई व्यग्यात्मक कविता है, जो वर्तमान समय मे किसान की मनो स्थिति का बेहतरीन चित्रण वर्णित है:-

पढ़िए : छत्तीसगढ़ी कविता – “हमर किसान”

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बइला रेंगय, आगू-आगू

नागर बोहे, पाछु म फागू

मुड़ म माढ़े, धान के बोरा 

पहिने हे बाई, बोरा के मोरा

पानी के डब्बा, धरय बेटी रानी

हमर किसान मनके इही कहानी।।

चउंक म पागे बीड़ी के चोगी,

पियत हे जेला गांव के जोगी

बुता काम के आरो लेवत हे

बिजहा धान के गियान देवत ह

कहत हे बने ते करबे सियानी

हमर किसान मनके इही कहानी।।

नागर फन्दा के, दु हरिया जोतागे

आधा जुआर म, दु काठा बोवागे

बइला के गला म,बाजत हे घुघरू

लानें बोहासिन ह,आलू अउ कुंदरू

बइला अउ फागू के जमगे मितानी

हमर किसान मनके इही कहानी।।

जम्मो किसनहा मन, थामे हे खेती

बोलय सियनहा,खेती अपन सेती

रीता नई होवय, मोर धान के कटोरा

चार महिना खेती के, सबला अगोरा

हर जुग म अमर, किसान के किसानी हमर

किसान मनके इही कहानी।।

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अनिल यादव(अभिअन्नु)

छत्तीसगढ़ पुलिस, महासमुंद