महासमुंद: जंगल में आग लगाकर शिकार करने वाले 9 शिकारियों को फारेस्ट ने पकड़ा

महासमुंद। तापमान में लगातार बढ़ोत्तरी हो रही है। जंगल वन संपदा के साथ कई वन्य प्राणियों का अस्तित्व खतरे में है। महासमुंद जिले में जंगल में आग लगने की घटना आम बात हो गई है। बीते कई वर्षो में आग लगने से भारी तबाही मचाई है। वनांचल क्षेत्र में चोरी-छिपे वन्य प्राणियों का शिकार करने वालों की कोई कमी नहीं है। हालांकि इस साल तापमान में बढ़ोत्तरी के साथ ही आग लगने की घटना पर बागाहरा फारेस्ट ने जंगल में आग लगाकर शिकार करने वाले नौ लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा है।

बतादें, फायर सीजन में जब जंगल में आग लगती है तो उस समय क्षेत्र के जंगलों में पाई जाने वाली कई वन्य प्रजातियों का प्रजनन काल भी होता है। कुछ दिनों बाद बड़ी संख्या में इन वन्य क्षेत्रों में विचरने वाले पक्षी जंगली मुर्गी, तीतर, मोर, बटेर, क्लीज, कोयल और चिड़िया की कई प्रजातियां अंडे देती हैं। वहीं, अन्य प्राणियों में कक्कड़, सांभर, खरगोश, सुअर और तेंदुआ में से कई की प्रजनन क्रिया का तो कई का मीटिग सीजन भी होता है।

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जंगल की आग के बाद सब कुछ तबाह हो जाता है। कई वन्य प्राणियों को आग लगने के बाद असमय काल का ग्रास बनना पड़ता है। कई जानवर जो वनों में आग लगने के बाद भाग जाते हैं, उन्हें दोबारा अपना ठिकाना ढूंढना मुश्किल हो जाता है। फायर सीजन से ठीक पहले भी शिकारियों की बंदूकें इन बेसहारा जानवरों पर तनी रहती हैं। वन माफिया ने भी क्षेत्र के जंगलों को नुकसान पहुंचाया है।

वन्य क्षेत्र में कई वन्य प्राणी तेजी से लुप्त हो रहे हैं। कुछ साल पहले बिना किसी भय के क्षेत्र के जंगलों में दिखने वाले सैल, मुर्गा, सांभर और बटेर अब कहीं नजर नहीं आते हैं। सबसे अधिक नुकसान सरीसृप प्रजाति के प्राणियों को आग से होता है।

फारेस्ट विभाग क्षेत्र के जंगलों को आग से बचाने के लिए जनता को जागरूक किया जाता है। विभाग की तरफ से विभिन्न गांवों में जागरूकता शिविरों का भी आयोजन किया जाता है। शिकारियों और वन माफिया पर भी नजर रखी जाती है। वन संपदा खुले खजाने की तरह होती है। इसकी सुरक्षा हर कोई करे तो वन संपदा के साथ वन्य प्राणियों की भी रक्षा की जा सकती है।

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