महासमुंद: हॉस्पीटल की काली कमाई को लेकर पालिका अलर्ट…कलेक्टर को भेजें पत्र…अभी कुछ दिन पहले आदित्य अस्पताल का आया था इस तरह का कारनामा

महासमुंद। समीपस्थ गांव भलेसर निवासी 45 वर्षीय परमेश्वर सिन्हा को उनके स्वजनों ने उपचार के लिए सात अप्रैल को गंजपारा स्थित आदित्य हास्पिटल में एडमिट कराया। जहां पर मरीज के परिजनों ने अस्पताल पर आरोप लगाया था कि लाखों रुपए गलत तरीके से बिल बनाकर मनमानी फीस वसूले गए।

लगाता ये खबर जिले के सुर्खियों में है। विपक्ष समेत कई संगठनों ने इस मनमानी वसूली को लेकर सवाल खड़ें किए हैं। अब महासमुंद पालिका ने नीजि अस्पतालों में अवैध वसूली को लेकर चिठ्‌ठी लिखकर मनमानी फीस रोकने की मांग की है। बतातें पालिका के करीब 17 पार्षद ने कलेक्टर से मिलकर यह सामने रखी है।

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पालिका अलर्ट

जानिए कैसे हुआ मनमानी फीस की वसूली

मरीज को आक्सीजन की व्यवस्था न हो पाना बताकर 11 अप्रैल को दूसरे अस्पताल ले जाने छुट्टी दी गई, तब प्रबंधन ने 49610 रुपए का बिल बनाया। इसी बीच आक्सीजन की व्यवस्था हो गई। जिससे परिजन भुगतान नहीं किए और परमेश्वर का उपचार 19 अप्रैल तक इसी अस्पताल में होता रहा। 19 अप्रैल की शाम परमेश्वर को डिस्चार्ज किया गया, तब सात से लेकर 19 अप्रैल तक, कुल 13 दिन के इलाज का बिल प्रबंधन में तीन लाख तीन सौ चालीस रुपये का बनाया।

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उधार लेकर उपचार

इस बिल के अलावा मेडिकल, लैब के चार्ज अलग से वसूले गए। मजबूर परिजन इस बात से संतुष्ट रहे कि बीमार व्यक्ति स्वस्थ्य हो गया। स्वजन चार्ज कम करने की अपील की तब तीन लाख तीन सौ चालीस रुपये के बिल में महज पांच हजार रुपये कम किया गया। मजबूर स्वजन गांव जाकर नाते रिश्तेदार से रुपये उधार लेकर चिकित्सक के बिल का भुगतान किया। इधर इस मामले की जानकारी स्वजनों के हवाले से सामने आई। जिससे चिकित्सक कालीकोटी की काली कमाई उजागर हुई।

बता दें कि छग सरकार ने कोरोना से उपचार के लिए निजी अस्पताल का दर निर्धारित किया है। जिसमें गैर एनएबीएच हास्पिटल में मध्यम बीमारी के लिए प्रतिदिन 6200 चार्ज किया जाना है, जिसमे आइसोलेशन बेड, आक्सीजन, सपोर्टिव केयर, पीपीई किट का चार्ज शामिल है।

वसूली की सीमा पार

इसके अलावा गंभीर बीमारी के लिए प्रतिदिन 10 हजार चार्ज किया जा सकता है, जिसमे बिना वेंटिलेटर का आइसीयू व अन्य पूर्ववत सुविधाएं शामिल है। इसके अलावा अति गंभीर मरीज के लिए प्रतिदिन 14 हजार रुपये का चार्ज किया जा सकता है, जिसमें वेंटिलेटर के साथ आइसीयू शामिल है।

इधर आदित्य हास्पिटल प्रबंधन को जहां परमेश्वर सिन्हा से एक लाख 82 हजार नियमतः 13 दिन का लेना था, वहां पर प्रबंधन ने डेढ़ गुना चार्ज कर तीन लाख तीन सौ चालीस रुपये का बिल थमा दिया। खास बात यह है कि मरीज के स्वजन ने डाक्टर द्वारा दिखाई गई उदारता और पांच हजार रुपये कम करने के बाद हास्पिटल का बिल दो लाख 95 हजार रुपये का भुगतान कर दिया। इस तरह शासन से निर्धारित दर से एक लाख 13 हजार की अवैध वसूली प्रबंधन ने मरीज के परिजन से कर ली। साभार: (सहयोगी वेबसाइड नईदुनिया)

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संचालक ने गलती भी स्वीकारी…

हम प्रदेश शासन से निर्धारित दर पर ही चार्ज कर रहे हैं। परमेश्वर सिन्हा मामले में हमारे लिपिक स्टाफ से गलती हुई है। आक्सीजन चार्ज को मेडिसिन लिस्ट में डाला जाता है, जो हास्पिटल लिस्ट में जोड़ा गया है।

-डा. एचबी कालीकोटी, संचालक आदित्य हॉस्पिटल महासमुंद