शिक्षक परिस्थिति, परिवेश के हिसाब से बच्चों को पढ़ाने की सकारात्मक पहल करें : कलेक्टर

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महासमुन्द। कलेक्टर डोमन सिंह ने कहा कि बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाये। शिक्षा के साथ संस्कार देने में शिक्षकों के साथ-साथ विद्यार्थियों के घर-परिवार की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। शिक्षक परिस्थिति, परिवेश के हिसाब से बच्चों को पढ़ाने की सकारात्मक पहल करें। उक्त बातें कलेक्टर ने स्कूल शिक्षा की समीक्षा करते हुए कही। समीक्षा बैठक कलेक्टर कार्यालय के सभागार में आयोजित हुई। कलेक्टर ने वीडियों कांफ्रेंसिंग से जुड़े खण्ड शिक्षा अधिकारी, बी.आर.सी., संकुल समन्वयक शिक्षकों से कहा कि स्कूल में बच्चों को अच्छा वातावरण मिलें।

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 उन्होंने कहा कि जिले के सभी स्कूलों में जरूरी सुविधाओं पर ध्यान दिया जाए और कोई भी स्कूल शिक्षक विहीन नहीं होना चाहिए। बैठक में बच्चों के जाति प्रमाण पत्र जल्द से जल्द बनाकर सौंपने को कहा। बच्चों को दी जाने वाली छात्रवृत्ति की भी जानकारी ली। सहायक संचालक स्कूल शिक्षा ने बताया कि 10वीं एवं 12वीं की कक्षाएँ 2 अगस्त से खुलने की खबर है। आदेश आने पर सही स्थिति पता चलेगी। इसके लिए स्कूलों में साफ-सफाई से लेकर सभी जरूरी काम किए जा रहे है।कलेक्टर ने जिले के शालाओं की अद्योसंरचना और बच्चों के प्रवेश आदि की जानकारी ली।

उन्होंने स्कूलों में निःशुल्क पाठ्यपुस्तक, गणवेश वितरण के बारे में भी पूछा। इसके साथ ही बालिकाओं को सरस्वती सायकल वितरण भी किया जाये। सिंह ने कक्षा 10 वीं पास बालिकाओं को बालिका प्रोत्साहन राशि प्रदाय करने को कहा। कलेक्टर ने कहा कि छत्तीसगढ़ विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार 26 जुलाई से शुरू होकर 30 जुलाई तक है। इस अवधि में कोई भी ब्लाॅक स्तरीय अधिकारी बिना अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि अधिकारी अपना मोबाईल भी चालू रखें। बैठक में डीपीओ साक्षरता रेखराज शर्मा ने सर्व शिक्षा अभियान संबंधित शिक्षा की जानकारी दी।

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कलेक्टर ने पढ़ना-लिखना अभियान के तहत् स्वयं सेेवी शिक्षकों और असाक्षरों की पोर्टल में सही-सही जानकारी अपलोड करने कहा। उन्होंने मोहल्ला साक्षरता केन्द्र लक्ष्य एवं अध्ययनरत् विकासखण्डवार जानकारी ली। उन्हांेने मोहल्ला साक्षरता केन्द्र का प्रत्येक स्तर पर माॅनिटरिंग करने कहा। उन्होंने शिक्षा अधिकारी को निर्देशित किया कि स्कूलों में शिक्षक नियमित रूप से उपस्थित रहे। ताकि बच्चों के अध्यापनकार्य में बाधा उत्पन्न न हो। इस हेतु शालाओं का नियमित निरीक्षण किया जाये। जिन स्कूलों में जरूरी मरम्मत का काम हो वह पूरा किया जाये।