महासमुंद: कांग्रेस पार्टी के इस आदिवासी नेता ने समाज का अपमान बताते हुए कांग्रेस कमेटी से दिया इस्तीफा…जारी किया मीडिया में प्रेस नोट

महासमुंद। अखिल भारतीय गोंड़ समाज 18 गढ़ के केन्द्रीय महामंत्री एवं दाईजबांधा सर्कल अध्यक्ष मनोहर ठाकुर ने कहा है कि पैदायशी जनसंघ के खानदानी दलबदलू जनता दल, भाजपा, ईंजन फिर कांग्रेस और अब कांग्रेस से निष्कासित व्यक्ति अंकित बागबाहरा हमें नसीहत न दे। वास्तविकता तो ये है कि कांग्रेस से निष्कासित अंकित बागबाहरा पद की लालशा में छटपटा रहा है और बौखलाए हुए अपना संतुलन खो बैठा है।

आदिवासी नेता मनोहर ठाकुर ने आगे कहा कि आज तक हमने कभी भी अपनी खुद के लिए पार्टी संगठन में पद या शासन स्तर में कोई पद नहीं मांगा है।वर्तमान में माननीय संसदीय सचिव व विधायक द्वारिकाधीश यादव द्वारा मेरे बिना ईच्छा जाहिर किए ही मुझे अनुसूचित जनजाति विभाग का विधायक प्रतिनिधि नियुक्त किया गया है तथा ब्लाक कांग्रेस कमेटी कोमाखान के अध्यक्ष संतोष पटेल द्वारा भी बिना बोले मुझे ब्लाक का प्रवक्ता नियुक्त किया गया है।

जिसे कांग्रेस के ब्लाक से लेकर प्रदेश स्तर तक के वरिष्ठ नेताओं से वास्तविकता जाना जा सकता है। हमने कभी अपने खुद के लिए किसी पद के मोहताज नहीं हुए उस मनोहर ठाकुर को कांग्रेस से निष्कासित अंकित बागबाहरा द्वारा मंडी अध्यक्ष के लिए नाम न होने से बौखलाए कहा जाना आदिवासी अस्मिता व स्वाभिमान को ललकारा है, मुझे या हमारे आदिवासी समाज के किसी के नाम को किसी पद के लिए  निष्कासित अंकित बागबाहरा द्वारा दिया जाना भी आदिवासी समाज का अपमान है, क्योंकि निष्कासित अंकित बागबाहरा के सुझाये नाम को  कांग्रेस पार्टी क्यों तवज्जो देगा।

यहां पढ़ें: महासमुंद: हत्या का खुलासा..देर रात युवक प्रेमी के घर के सामने मचा रहा था हल्ला, युवकों ने मारा चाकू, यह देख दूसरी मंजिल से कूदी प्रेमिका

अखबारी स्वयंभू नेता बनकर सामाजिक

आदिवासी समाज, अनुसूचित जाति समाज या साहू समाज के प्रति अंकित बागबाहरा का इतना हमदर्दी है तो जब बागबाहरा ब्लाक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष के रूप में अंकित बागबाहरा रहा तब खल्लारी विधान सभा क्षेत्र से किसी आदिवासी समाज, साहू समाज या अनुसूचित जाति समाज के नेता को कांग्रेस की टिकट से विधान सभा चुनाव के प्रत्याशी के लिए टिकट दिलाने में रुची दिखाए होते उल्टा अंकित बागबाहरा ने खुद की टिकट के लिए दौड़ भाग में छटपटाते रहा। रही बात मेरी चुनाव हारने की तो हार व जीत लगा रहता है, परन्तु कई चुनाव जीत भी दर्ज कर सरपंच के रुप में विकास की गंगा बहाया हैं,

कृषि उपज मंडी समिति बागबाहरा का ही मंडी डायरेक्टर का चुनाव जीता, ये सब अंकित बागबाहरा को दिखाई नहीं देता क्या? कहां से दिखाई देगा आज तक अंकित बागबाहरा खुद कोई चुनाव लड़ने का  दम भी दिखा नहीं पाया है तथा उलूल-जुलूल बयान बाजी कर अखबारी स्वयंभू नेता बनकर सामाजिक समरसता के विरुद्ध अपमानित करने का ही काम करते रहता है।

दगाबाजी के कई प्रमाण

आगे आदिवासी नेता मनोहर ठाकुर ने अंकित बागबाहरा को सवाल करते हुए कहा कि परेश बागबाहरा भाजपा व कांग्रेस से विधायक रहे तब क्या उनके चुनाव कार्य से विधायकी व पार्टी संगठन कार्य तक अंकित बागबाहरा ने अपनी दखलंदाजी सक्रियता व अगुवापना नहीं दिखाए थे? इसके बाद परेश बागबाहरा इंजन छाप से विधान सभा चुनाव लड़े थे तब भी क्या अंकित बागबाहरा ने इंजन छाप के पक्ष में चुनाव प्रचार की कमान थामने की सक्रिय भूमिका नहीं निभाये थे?

और इसके बाद परेश बागबाहरा  के कांग्रेस की टिकट पर विधान सभा चुनाव लड़े थे तब भी क्या अंकित बागबाहरा ने सक्रिय भूमिका के रुप में चुनाव प्रचार का कमान नहीं थामे थे ? अगर इन भूमिकाओं में नहीं थे तो कोई बात नहीं या भूमिका में रहे परन्तु पार्टी सदस्यता नहीं लिये थे करके बोलेगा तो इन विभिन्न पार्टियों में अंकित बागबाहरा ने अतिक्रमण कर अपना उल्लू सीधा करने में लगे थे क्या? मतलब किसी भी स्थिति में दगाबाज करने में ही लगे रहे।

कांग्रेस से कर चुके हैं दगाबाजी

उन्होंने ने आगे कहा कि परेश अग्रवाल अपने आपको परेश बागबाहरा के रुप में स्थापित किया ठीक वैसा ही अंकित अग्रवाल ने अंकित बागबाहरा के रुप में प्रचलन शुरू किया, इससेे स्पष्ट है कि अपने चाचा परेश बागबाहरा के नक्शे कदम पर चलते आ रहे अंकित बागबाहरा अपने गिरेबान को देखे और खुद की चिंता करे। अंकित बागबाहरा ऐसे खानदानी व्यक्ति है जो कि इसके पिता ने रायबरेली लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के लोकप्रिय नेता इंदिरा गांधी के खिलाफ चुनाव लड़े थे।

आदिवासी नेता मनोहर ठाकुर ने आगे कहा कि कांग्रेस से निष्कासित अकित बागबाहरा से कांग्रेस को नाम सुझाने की अधिकार नहीं है। अंकित बागबाहरा द्वारा मुझे मंडी अध्यक्ष के लिए नाम न होने की  बौखलाहट कहे जाने, एस एम एस कर दूसरे की इशारे में चलने की आरोप लगाये जाने पर क्षुब्ध हूं। इससे केवल मेरा ही नहीं बल्कि पूरा गौरवशाली आदिवासी समाज के अस्मिता व स्वाभिमान को ललकारा है।

अंकित बागबाहरा के इस तरह की हरकत से स्पष्ट है कि हमें आदिवासी समझ कर हीन भावना से देखा जा रहा है।जबकि हम खुद पढ़े-लिखे हैं सब समझते हैं। इतना ही नहीं, बल्कि कांग्रेस से निष्कासित अंकित बागबाहरा द्वारा कांग्रेस से लिए जाने वाले पद पर अनावश्यक ढंग से मेरे नाम को बौखलाहट की संज्ञा देना भी आदिवासी समाज का अपमान है। इसलिए अकित के ऐसे कृत्य से ग्लानी व अपमानित महसूस करते हुए विधायक प्रतिनिधि एवं ब्लाक कांग्रेस कमेटी कोमाखान के प्रवक्ता पद से इस्तीफा देता हूं।

हमसे जुड़िए

https://twitter.com/home             

https://www.facebook.com/?ref=tn_tnmn

https://www.facebook.com/webmorcha/?ref=bookmarks

https://webmorcha.com/