वन विभाग के नुमाइंदे हुये मालामाल..! तो किसानों का हुआ बुराहाल – निधि लोकेश चंद्राकर

महासमुन्द। जनपद पंचायत महासमुन्द क्षेत्र क्रमांक 14 की जनपद सदस्या निधि लोकेश चंद्राकर द्वारा वन परिक्षेत्र महासमुन्द के हाथी प्रभावित क्षेत्रों में भ्रमण करने उपरांत हाथी प्रभावित क्षेत्रों के किसानो की व्यथा कथा सुनने पश्चात कहा कि, जिन किसानों का सही में नुकसान हुआ है। उनको मुआवजा नही मिला है और जिनके नाम पर एक बीघा जमीन भी नही है उनको लाभ दिलाने वाले वनकर्मियों के विरुद्ध उचित कार्यवाही करवाये जाने का आस्वासन दिया व अब तक मुआवजा से वंचित किसानों लिये शासन प्रशासन से मांग करने की अपील की जाएगी। सामान्य वन मण्डल महासमुंद में इतने बड़े -बड़े घोटाले होने के बाद भी आज तक किसी प्रकार से कोई कार्यवाही नही होना संसय का विषय है।

और तो और वन विभाग द्वारा लगातार  भ्रष्टाचार में लिप्त कर्मचारियों का या तो पदोन्नति हुई या फिर अन्यत्र स्थानों में उनका तबादला कर दिया गया है। जिला महासमुन्द में ऐसे कई कर्मचारी व अधिकारीगण आज भी बेखौफ होकर अपने दबंगई दिखाते हुये कार्य कर रहे है जैसा कि,उन्होंने कोई गलत काम आज तक नही किये हो।आपको बता दे कि,कार्यालय सामान्य वन मंडल में पदस्थ उप वनमंडलाधिकारी जब से महासमुन्द में पदस्थ हुये है तब से लगातार शासन के वित्तीय विभाग को खोखला करते जा रहा है। इसके बावजूद उच्च लेवल में बैठे अधिकारियों के आंख में जैसे काली पट्टी बंधी हो। सब कुछ जानते हुये भी खामोश बैठे होने का कारण उनका भी प्रतिमाह का पैकेज बंधा हुआ है येसा प्रतीत हो रहा है…?

वन रक्षक से लेकर आला अधिकारियों को मिलीभगत

यह मामला सामान्य वन मंडल महासमुन्द ,वन परिक्षेत्र महासमुंद का फसल क्षति मुआवजा में करोड़ों रुपयों की हेराफेरी का है। वर्ष 2019 -20 हाथी प्रभावित क्षेत्रों में क्रमशः भोरिंग,कुकराडीह, बेलटुकरी,अमावस, अछोला, अछोली, जोबा,परसाडीह,खैरझिटी, पीढ़ी,मालिडीह,पिरदा, बासकुडा एवम सिरपुर क्षेत्र के आस पास आने वाले ग्रामों में हाथी विचरण द्वारा किसानों के खेतों में रबी एवं खरीब फसल को क्षति पहुंचाया गया था। फसल क्षति की सूचना किसानों द्वारा वन विभाग के वन रक्षक से लेकर आला अधिकारियों को मिली तो मानो या न मानो किसानों के तो भाग्य फूटे मगर वन विभाग के कर्मचारियों एवं अधिकारियों के लिए किस्मत का ताला खुल गया लगता है…?

सुविज्ञ सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार विगत दो वर्षों में हाथी फसल मुआवजा किसानों को प्रदाय करने हेतु अनुमानित 77 करोड़ रुपये वन विभाग में आया हुआ था और जैसे कर्मचारियों व अधिकारियों को पता लगा कि इतना बड़ा रकम आया हुआ है क्या और कैसे करना है तो सभी की मिलीभगत से अपने-अपने हितैषियों अपने परिवारजनों को किस तरह से लाभ पहुंचाने हेतु प्रकरण बनाकर प्रस्तुत करना है ये सारी जिम्मेदारी उस बिट के बीटगार्ड को सुपुर्द कर दिया गया ।

हाथी प्रभावित क्षेत्रों के ग्राम में एक वन समिति गठित की जाती है व वन समिति में अध्यक्ष की नियुक्ति की जाती है और जब भी उस क्षेत्र में हाथी द्वारा फसल को नुकसान पहुँचाया जाता है तो 24 घंटे के अंदर जांच कर जिस किसान के खेतों को नुकसान पहुंचाया गया है उस क्षेत्र में वनरक्षक, वन समिति अध्यक्ष ,ग्राम पंचायत सरपंच, पटवारी एवं किसान की मौजूदगी में नाप-जोक कर प्रकरण तैयार किया जाता है ।प्रकरण के सारे दस्तावेजों के तैयार होने के बाद लग-भग 30 दिवस के अंतराल में उस किसान के खाते में मुआवजे की रकम ट्रांसफर कर दी जाती है।

महासमुंद: एक किसान को 17 बार भुगतान, फारेस्ट में भष्ट्राचार सारी हदें पार, हाथी द्वारा फसल नुकसान के नाम पर फर्जीवाड़ा

संसय का विषय बेहिसाब है ..?

मीडिया द्वारा लगातार मामले को उजागर करने उपरांत कुछ विश्वासपात्र किसानों द्वारा यह पता चला कि, आज ऐसे बहुत सारे किसान भाई है जिनका पैसा आज तक उनके खाते में नही आया है और जिनका कुछ भी नुकसान नही हुआ है आज उनके घरों में लाखों रुपयों की राशि कैसे आ गई । ये सारे प्रकरणों में बीटगार्ड,अध्यक्ष एवं पटवारी द्वारा किसी एक खेत के किनारे में बैठकर बनाया गया प्रकरण है ।

मामले के उजागर होने बाद

विगत 21 जुलाई 2020 को बेबाक बयान वेब पोर्टल द्वारा हाथी फसल क्षति को लेकर मामले की पड़ताल की गई तो महासमुन्द वन मंडलाधिकारी द्वारा उच्च अधिकारी का धौस दिखाते हुये कहा गया कि जो गलत किया है उसे हमने निलबिंत कर दिया है।

निलबंन श्रीमति रूपा चतुर्वेदी वन रक्षक को गोपनीय रूप से आरोपी सिद्ध करके निलंबित कर दिया गया । जबकि किसी भी शासकीय कर्मचारी को निलंबित किया जाता है तो समाचार पत्रों में प्रकाशित की जाती है और ऐसा कुछ भी नही हुआ।

वन रक्षक रूपा के निलंबित होते ही और भी कर्मचारीगण व अधिकारीगण हरकत में आ गए और वो कारनामों को अंजाम दिया गया जो नही होना चाहिए था। हाथी सम्बन्धी उन्ही दस्तावेजों का चोरी हो जाना या गायब करवा देना…? कई सवालों को जन्म देने जैसा हो गया ।

घटना 21 जुलाई 2020 को घटित हुई और आज माह मई 2021 हो गया है । 10 महीने से ऊपर बीत जाने के बाद भी किसी प्रकार से कोई कार्यवाही नही हो पाना…? सामान्य वन मण्डल में जो जांच कमिटी गठित की गई है उनके द्वारा किसी प्रकार से कोई ठोस कार्यवाही आज तक क्यो नही किया जा रहा है ये गठित टीम तो यही के है ये तो मामले को रफा-दफा करने में लगे हुए है।

मुद्दा बिल्कुल साफ है जो लोगों को जांच में बिठाया गया है ये वो लोग है जो वन वनमंडलाधिकारी एवं उप वनमण्डलाधिकारी के अधीनस्थ कार्यरत है तो क्या अपने उच्चाधिकारियों को कुछ होने देंगे ये भी एक संसय का विषय है।

हाथी खसल क्षतिपूर्ति में जितने भी अधिकारी/कर्मचारी/लिपिक संलिप्त है । सभी दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों के विरूद्ध छ.ग.सिवील सेवा आचरण नियम 1965 के तहत अनुशासनात्मक कार्यवाही करते हुये तत्काल निलंबित किया जावें, एवं महासमुंद जिला से बाहर स्थानांतरण किया जावें।