महासमुन्द

कभी भी हो सकती है बड़ी घटना, पुल टूटने से पंद्रह गांव होंगे प्रभावित

बसना से संजय तायल की रिपोर्ट

बसना। नगर से चार किमी की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत छान्दनपुर और रेमड़ा को जोड़ने वाली pwd सड़क पर विगत दस वर्ष पूर्व बने इस पुल ने अब जवाब दे दिया है।

  • पुल के नीचे हिस्से में देखा जाए तो यह पुल पूर्ण रूप से जर्जर हो चुका है। इस मार्ग पर लगभग पंद्रह गांव के लोग आवागमन करते हैं।
  • पुल के टूटते ही इन गांवों का सम्पर्क बसना से टूट जाएगा।
  • ग्रामीणों के नज़रिए से देखा जाए तो इस पर से आने-जाने में उन्हें जान का जोखिम हमेशा बना रहता है। क्योंकि, पुल के नीचे डले पोल पुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो चुके है।

पुरानी सड़कों की मरम्मत कराने ध्यान नहीं

  • इतना ही नहीं इनमें लगे पोलों के बीच में डला माल भी निकल गया है तो अब भगवान भरोसे चल रहे इस पुल को जल्द से नहीं बनाया गया तो कोई बड़ी दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
  • एक ओर शासन जहां गांव में सड़कों का जाल बिछाने में लगी है। वहीं क्षेत्र की पुरानी सड़कों की मरम्मत एवं उन मार्गों पर बने पुलों पर ध्यान नही दिया जा रहा है। जिसका ख़ामियाज़ा क्षेत्र के लोग भुगत रहे हैं।
  • नई सड़कों का निर्माण करवाने में लगा शासन क्षेत्र में हो रहे सड़कों एवं पुलों के निर्माण में गुणवत्ता सही ढंग से जांच करें तो कई सड़कें एवं उन पर बना पुल सन्देह के दायरे पर मिलेगा।

शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं

  • गुणवत्ता अनुरूप कार्य का होना उस मार्ग और पुल-पुलियों में आम लोगों की जान को ख़तरा बना रहता है।
  • क्षेत्र में चल रहे बड़े-बड़े निर्माण कार्यों को देखा जाए तो उनमें भी जगह पर कार्यों में गुणवत्ता की कमी देखी ज़ाती है।
  • ग्रामीण इसकी शिकायत अधिकारियों से भी करते हैं। परंतु इसका परिणाम हमेशा शून्य पर आ कर रुकता नज़र आता है।
  • करोड़ों की लागत से बनी सड़कें एक ही बारिश में बहजाती है तो कहीं सड़कों मे गड्ढे हो जाते है।
  • देखा जाए तो यह सभी गुणवत्ताहीन कार्यों की निशानी है। जिसका ख़ामियाज़ा सड़कों पर पुल-पुलियों के बनने के भी आवागमन करने वाले लोगों को चुकना पड़ता है।
  • इस संबंध में पीडब्ल्यूडी के एसडीओ नीता रामटेके ने कहा कि देखकर ही कुछ बता पाऊंगी।

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