Wednesday, January 20, 2021
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सामान्य वन मंडल के पूर्व वन परिक्षेत्राधिकारी मोहन दास मानिकपुरी को नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया क्यो…? – लोकेश चन्द्राकर 

मामला फर्जी जाति प्रमाणपत्र एवं फसल क्षति मुआवजा में करोड़ों रुपयों का आपसी बंदरबांट
महासमुन्द / प्रदेश में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हथियाने वाले लोगो पर बर्खास्तगी की गाज गिरने वाली है। इसी तारतम्य में वन विभाग के पांच मुलाजिमो को अपनी नौकरी से हाथ धोना पड़ गया । इनमें सामान्य वन मंडल महासमुन्द के वन परिक्षेत्र कार्यालय में पदस्थ रेंजर मोहन दास मानिकपुरी  सहायक वन संरक्षक कु. दिव्या गौतम ,वनमंडलाधिकारी एस. पी. रजक, रेंजर रमन वी सोमावार तथा उप वन क्षेत्रपाल द्वय सुखदास नाग शामिल है जो फर्जी अजा-जजा वर्ग प्रमाण पत्र धारक है। इन्होंने क्रमशः दिनांक 20.09.2011,11.02.2014,25.082018,31.08.2019 और 26.05.2008 में नौकरी जोइनिंग की थी।

ज्ञातव्य है कि, प्रदेश के विभिन्न विभागों में फर्जी प्रमाण पत्रों के जरिये नौकरी पाने वालों के खिलाफ ,सरकार सख्त कार्यवाही के मूड में आ गई है। बीते 25 नवम्बर को सरकार ने समस्त विभाग के मुख्य सचिव ,प्रमुख सचिव,सचिव तथा स्वतंत्र प्रभार वाले विशेष सचिव को आदेश क्रमांक एफ क्रमांक 7-16/2020/1/6 के जरिये फर्जी जाति प्रमाण पत्र धारको के विरुद्ध बर्खास्तगी जैसी कार्यवाही के लिए आदेशित किया है।

उच्चस्तरीय छानबीन समिति के समक्ष कुल 758 प्रकरण प्रस्तुत हुए थे जिनमे 659 प्रकरण निराकृत हुये तथा 267 प्रकरण फर्जी जाति प्रमाण पत्र के थे । बीते 2 वर्षों में 75 ऐसे प्रकरणों का भी पता चला है जिसमे अनेक लोग उच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त करने के बाद अनेक महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत है।
उप वनमंडलाधिकारी फर्जी जाति प्रमाण पत्र के साथ कर रहे है नौकरी…?

इसी कड़ी में विगत वर्ष लगभग 2010-11 में वर्तमान उप वनमंडलाधिकारी, वन परिक्षेत्राधिकारी के रूप महासमुन्द में पदस्थ रहे । इस दौरान भी इनके विरुद्ध कार्यशैली को लेकर अनेकों शिकायत एवं फर्जी जाति प्रमाण पत्र पर नौकरी करने का मामला प्रकाश में आया था । जबकि वर्तमान उप वन मंडलाधिकारी विगत 06 वर्षों से पदोन्नति का लाभ लेते हुये उप प्रबन्ध संचालक के पद में पदस्थ रहे एवं वर्तमान में महासमुन्द सामान्य वन मंडल में  उप वन मंडलाधिकारी के पद पर पदस्थ है।

उप वन मंडलाधिकारी ने अपनी जाति फर्जी बताकर पदोन्नति का लाभ लिया है। जबकि छत्तीसगढ़ में मांझी जाति का उल्लेख कही पर भी नही है। दूर-दूर से भी मांझी जाति सुनने को नही मिला है , किंतु मांझी जाति बताकर उप वन मंडलाधिकारी बड़े शान से नौकरी कर रहे है। इनकी शिकायत अनुसूचित जाति आयोग एवं अनुसूचित जन जाति आयोग तथा   छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को किया गया है। देखते है माननीय मुख्यमंत्री जी, अनुसूचित जाति आयोग एवं अनुसूचित जन जाति आयोग इनके विरुद्ध क्या निर्णायक निर्णय लेते है।

वही दूसरी ओर  अंचल में हाथी उत्पात की आड़ लेकर सामान्य वन मंडल महासमुन्द के जिम्मेदार अधिकारियों ने आपसी सांठगांठ से भ्रष्टाचार का बेमिसाल कीर्तिमान गढ़ दिया है। वर्ष 2019 – 20 में फसल क्षति पूर्ति राशि वितरण के नाम पर जिस कदर सरकारी पैसों का बंदरबांट किया है उसका दूसरा कोई उदाहरण नही है। खास बात यह है कि,फर्जीवाड़ा को अंजाम देने के बाद गठजोड़ में शामिल  रहे विभागीय लोग अब एक-एक कर अपना तबादला अन्यत्र करवाते जा रहे है।

वनमंडलाधिकारी मयंक पांडेय द्वारा भी अपना बोरिया बिस्तर समेट कर जिला बालोद में पदभार ग्रहण कर लिए है। साथ ही महासमुन्द में नये वनमंडलाधिकारी पंकज राजपूत ने अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया है। समझा जा रहा है कि, उप वनमंडलाधिकारी भी आने वाले कुछ दिनों में तबादले पर अन्यत्र चले जायेंगे। सहायक वन परिक्षेत्राधिकारी ज्ञानचंद कश्यप मामले के खुलासे पूर्व ही स्थानान्तरण पर चले गये है। अलबत्ता मंडल कार्यालय में पदस्थ मुख्य लिपिक  पदोन्नति पर भी महासमुन्द छोड़ने से मना कर चुके है। संभवतः उन्हें खुद के न रहने से करोड़ों के फर्जीवाड़ा का साफ उजागर होने का डर सता रहा है।
ज्ञातव्य है कि,हाथी प्रभावित महासमुन्द परिक्षेत्र में वर्ष 2019-20 की फसल क्षति पूर्ति राशि का वितरण ऐसे लोगों को भी किया गया है जिसके नाम संबंधित हल्के में एक इंच भी कृषि भूमि नही है। इसी प्रकार फसल क्षति का आंकलन और मूल्यांकन करने में भी मनमानी करते हुये जिन्हें हजारों का मुआवजा दिया जाना था उन्हें लाखों रुपयों का भुगतान कर दिया गया है। परिवार में एक व्यक्ति के नाम पर ही जमीन होने के बाद भी पूरे परिवार के लोगों के नाम पर अनेक प्रकरण बनाकर भुगतान दिखा दिया गया है।
बलि का बकरा बनी छोटी मछली

बीते सदी में घटित कोडार मुआवजा कांड से भी बड़े वन विभाग के मुआवजा कांड का भांडा बीते जुलाई माह में जैसे ही फूटा महकमे में हड़कंप मच गया । मामले को ठंडा करने के इरादे से विभाग की महिला वन रक्षक रूपा चतुर्वेदी को निलंबित करने की कार्यवाही आनन-फानन में कर दी गई । उस पर अपने परिजनों को लाभ पहुंचाने तथा शासकीय कार्यो में अनियमितता बरते जाने का आरोप थोप दिया गया ।

फिलहाल रूपा चतुर्वेदी विभाग के बागबाहरा कार्यालय में संलग्न है । वस्तुतः मुआवजा का निर्धारण और वितरण में स्वयं डी.एफ़.ओ.,एस.डी.ओ.,रेंजर पटवारी तथा मंडल कार्यालय के मुख्य लिपिक की अहम व बड़ी जिम्मेदारी थी और यह सभी लोग अभी तक कार्यवाही की आंच से खुद को महफूज रखे हुये है।
जनपद सदस्य प्रतिनिधि एवं समाज सेवी लोकेश चन्द्राकर ने वनमंडल के मुआवजा कांड को लेकर कहा है कि, दशकों पूर्व कोडार बांध के बनने पर मुआवजा भुगतान में गड़बड़ी का मामला दशकों तक चर्चा में रहा और अब हाथी से फसल क्षति पर मुआवजा भुगतान में 10 गुना से भी बड़ा ( करोड़ों का ) फर्जीवाड़ा हो गया ।

मामला उजागर होने पर मामूली कार्यवाही फिर सम्बंधित दस्तावेजों की कथित चोरी, जांच की नौटंकी का अब तक परिणाम न निकलना और विशेष रूप से मुआवजा कांड में आकंठ संलिप्त जिम्मेदार लोगों का एक-एक कर अन्यत्र तबादला करवाते जाना साफ – साबित करता है कि,कुछ  भी ठीक नही है।

बल्कि मामले को ही कफन-दफन करने की दिशा पर काम हो रहा है। यह वाक्या माननीय मंत्री जी मोहम्मद अकबर जी जैसे नेता के अधीनस्थ विभाग  के दामन पर बदनुमा धब्बे जैसा है। अंत मे उन्होंने कहा कि,वर्ष 2019-20 में हाथी से फसल क्षति के मुआवजा भुगतान मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच के साथ दोषिजनो पर सख्त कार्यवाही होनी चाहिए।

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