छत्तीसगढ़ में पान की खेती की संभावनाओं पर दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण संपन्न 

रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के पादप कार्यिकी विभाग छत्तीसगढ़ में पान की खेती की संभावनाएं द्वारा ‘‘छत्तीसगढ़ में पान की खेती की संभावनाएं’’ विषय पर दो दिवसीय कृषक प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें छत्तीसगढ़, बिहार एवं झारखंड राज्य के 75 किसान शामिल हुए थे। प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक विस्तार डॉ. एस.सी. मुखर्जी द्वारा किया गया। उन्होंने झारखंड, बिहार एवं छत्तीसगढ़ से आये पान उत्पादक किसानों से चर्चा की एवं छत्तीसगढ़ में पान के उत्पादन की बढ़ती संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के अंतर्गत संचालित पान परियोजना के तहत आयोजित किया गया।

http://मनरेगा : छत्तीसगढ़ में इस साल अब तक 11.25 करोड़ मानव दिवस रोजगार, लक्ष्य का 86 फीसदी पूरा

प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम दिन परियोजना अन्वेषक डॉ. एलिस तिर्की एवं उनके सहयोगी डॉ. अंबिका टंडन एवं टी. तिर्की ने पान की खेती की विस्तृत जानकारी सभी पहलुओं में दी गई। बरेजा की नेट हाऊस में पान की खेती करने की सलाह दी गई साथ ही अतिरिक्त आय लेने के लिए ओस्टर मशरूम तथा पान की छोटे एवं सड़े, धब्बे, पत्तों से तेल निकालने में उपयोग किया जा सकता हैं इसका प्रदर्शन किया गया। पान में जैविक प्रबंधन की जानकारी भी दी गयी। अंतिम दिन प्रक्षेत्र भ्रमण कराया गया तथा कंटिग के माध्यम से पौध तैयार करने की तकनीक सिखाई गई। कृषि महाविद्यालय में उगाई जा रही पान की 15 प्रजातियों के औषधीय गुण, पोषक तत्व तथा उपज की जानकारी दी गई। किसानों को पान की नई प्रजातियों जैसे कारापाकु, बाईचीगुड़ी, मघई आदि को लगाने की सलाह दी गई।

http://Ford Figo, Aspire और Freestyle हुई BS6 इंजन के साथ लॉन्च, टॉप मॉडल्स की कीमतें BS4 से कम

उल्लेखनीय है कि पान परियोजना के अंतर्गत विश्वविद्यालय में किए गए अनुसंधान के परिणामों को  विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा पान उत्पादक क्षेत्र में जाकर किसानों को प्रशिक्षण एव प्रदर्शन के माध्यम से पान उत्पादन के लिए प्रेरित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान अनेक कृषकों ने पान उत्पादन करने पर सहमति जताई। कुछ कृषकों ने व्यवसायिक रूप से पान की खेती शुरू भी कर दी है। इस परियोजना के माध्यम से अब तक कुल 375 कृषक लाभान्वित हो चुके हैं। प्रक्षेत्र भ्रमण के दौरान अधिष्ठाता डॉ. एस.एस. राव ने कृषकों का हौसला बढ़या। प्रशिक्षण के समापन में डॉ. आरती गुहे, डॉ. एस.एस. टुटेजा, डॉ. ए.के. गेड़ा, डॉ. एलिस तिर्की, डॉ. अंबिका टंडन एवं डॉ. टी. तिर्की उपस्थित थीं।

हमसे जुड़िए…

https://twitter.com/home

https://www.facebook.com/?ref=tn_tnmn

https://www.facebook.com/webmorcha/?ref=bookmarks

https://webmorcha.com/

https://webmorcha.com/category/my-village-my-city/

9617341438, 7879592500, 7804033123

Leave a Reply

Your email address will not be published.

Back to top button