रायपुर

नहीं माने तो आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं-सहायिकाओं की सेवाएं होगी समाप्त

– महिला एवं बाल विकास विभाग ने जारी किया परिपत्र
रायपुर। राज्य सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को समझाइश दी है कि समय-समय पर उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। इसलिए उन्हें हड़ताल पर नहीं जाना चाहिए। यदि समझाइश के बाद भी अगर नहीं मानेंगी तो संबंधित जिला कलेक्टरों द्वारा उनकी सेवाएं समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी। ज्ञातव्य है कि प्रदेश भर की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपनी छह सूत्रीय मांगों को लेकर इस महीने की पांच तारीख से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं।
महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव डॉ. एम. गीता ने यहां मंत्रालय से सभी जिला कलेक्टरों, विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारियों और बाल विकास परियोजना अधिकारियों को परिपत्र भेजकर कहा है कि इन कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं द्वारा आंगनबाड़ी केन्द्रों में गर्भवती और धात्री माताओं और छह वर्ष तक आयु के बच्चों के स्वास्थ्य की दृष्टि से तथा कुपोषण की रोकथाम के लिए सेवाएं दी जाती हैं। उनकी हड़ताल की वजह से इन हितग्राहियों को दी जाने वाली सेवाएं प्रभावित होंगी तथा बच्चों के भोजन के अधिकार का उल्लंघन होगा।
विभागीय सचिव ने परिपत्र में जिला कलेक्टरों से कहा है कि वे इन कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सूचित करें कि शासन द्वारा उनकी मांगों पर विचार करते हुए समय-समय पर कार्रवाई की जा रही है। इसलिए वे हड़ताल पर न जाएं। इसके बाद भी अगर कार्यकर्ता और सहायिका तथा मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हड़ताल पर जाएं तो उनके विरूद्ध जिला कलेक्टर द्वारा नियमानुसार पद से पृथक करने और सेवा समाप्त करने की कार्रवाई की जाएगी।
परिपत्र में बताया गया है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की सेवाएं मानदेय पर आधारित हैं और वे स्थानीय बसाहटों तथा पारों, टोलों में रहकर अपनी सेवाएं देती हैं। राज्य शासन द्वारा आगामी वित्तीय वर्ष 2018-19 के बजट में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मासिक मानेदय में एक हजार रूपए, मिनी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मासिक मानदेय में 500 रूपए और सहायिकाओं के मासिक मानदेय में 500 रूपए की वृद्धि की गई है। इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की सेवा पूरी होने पर उन्हें 50 हजार रूपए और सहायिकाओं की सेवा पूरी होने पर 25 हजार रूपए की राशि देने का भी प्रावधान किया गया है। इसके उपरांत भी यह देखा जा रहा है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिका संघों द्वारा निरंतर हड़ताल पर जाने की सूचना दी जाती है।

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