ODISHA: रिक्शा चालक से कुख्यात गैंगस्टर बना हैदर, Police को नशीली बिरयानी खिलाकर अस्पताल से हुआ था फरार

भुनेश्वर। शेख हैदर (Sheikh haider) ओडिशा को वो गैंगस्टर (Gangster) जिसने हाल ही में हॉस्पीटल के वार्ड से भागकर सुर्खियां बटोरी. हालांकि, इसके 6 दिनों बाद ही उसे तेलंगाना से पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया गया था. अब कम ही लोग यह जानते होंगे कि हत्या (Murder) और अपहरण जैसे अपराधों के जरिए आतंक मचाने वाला इस व्यक्ति कभी पेट पालने के लिए रिक्शा चलाते थे। जेल पहुंचने से पहले शानदार जीवन जीने वाले हैदर (Sheikh haider) के पास ये सुविधाएं अपराध के रास्ते ही आई थीं.

58 साल के हैदर (Sheikh haider) का नाम 1990 और 2000 के दौरान बहुत सुना गया. इस वक्त उसने और उसकी गैंग ने फिरौती के लिए लोगों का अपहरण और हत्याएं बड़े स्तर पर की थीं. हैदर (Sheikh haider) को दो हत्याओं के मामले में सजा हुई. लेकिन उसका अपराध नेटवर्क इतना मजबूत था कि वो जेल के अंदर रहकर भी पूरे ओडिशा Odisha में अपने खास साथियों के संपर्क में बना रहता था.

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रिक्शा चलाने का काम करता था

ओडिशा Odisha के केंद्रपाड़ा में जन्मा हैदर 1980 के समय रिक्शा चलाने का काम करता था. केंद्रपाड़ा शहर के 66 साल के एक रिटायर्ड टीचर राबी पाटी के अनुसार, ‘शेख हैदर (Sheikh haider) गरीब था और उसे परिवार को पालने और पैसा कमाने के लिए रिक्शा खींचना पड़ता था, लेकिन उसके स्थानीय अपराधी रबिन के साथ संपर्क उसे अपराध की दुनिया में ले गए और गैंगस्टर्स के बीच उसका कद बढ़ने लगा.’

वो रबिन ही था, जिसने टीटो (सैयद उस्मान अली), सुलेमान और हैदर को सिखाया था. ये तीनों बाद में बड़े गैंगस्टर बने. टीटो कई सालों से जेल में है. केंद्रपाड़ा के वरिष्ठ वकील प्रदीप दास बताते हैं ‘जब टीटो, सुलेमान और हैदर रबिन से अपराध के तरीके सीख रहे थे, तो उनके बीच दुश्मनी हुई, जो रबिन के घर के पास ही उसकी हत्या का कारण बनी. यहां से टीटो गैंग का मुखिया बना. बाद में तीनों के बीच दुश्मनी के चलते सुलेमान की हत्या हुई.’

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हैदर (Sheikh haider) तब और कुख्यात हो गया, जब उसने 1991 में अपराधी बुल्ला सेठी को केंद्रपाड़ा कोर्ट परिसर में मार गिराया. बाद में 1997 में वो पुलिस एनकाउंटर में घायल हो गया. वो और टीटो 1999 में एक बार फिर साथ आए, लेकिन सरकारी ठेकों को लेकर हुए विवाद के बाद 2 साल के अंदर फिर अलग हो गए. मई 2005 में हैदर (Sheikh haider) के साथियों ने सुलेमान के छोटे भाई की हत्या कर दी. इस मामले में हैदर को जेल हुई. मार्च 2011 में उसे उम्र कैद की सजा सुनाई गई.

Police को बार-बार जेल बदलना पड़ा

हालात ऐसे हो गए थे कि पुलिस और जेल विभागों को हैदर (Sheikh haider) को समय-समय पर अलग-अलग जेलों में रखना पड़ा. पुलिस ने यह कदम हैदर का नेटवर्क तोड़ने के लिए उठाया था. उसे बीते महीने दर्द की शिकायत के चलते कटक स्थित एससीबी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल लाया गया था. यहां से वो पुलिसकर्मियों को बिरयानी में नशीली दवा मिलाकर खिलाने के बाद 10 अप्रैल को भाग गया. इस मामले में 6 पुलिसकर्मी सस्पेंड हुए थे. हैदर को पकड़ने के लिए ओडिशा और तेलंगाना पुलिस ने मिलकर ऑपरेशन चलाया.