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29 जुलाई को रायपुर में निः शुल्क राष्ट्रीय सामुहिक विधवा पुनर्विवाह का आयोजन, कर सकते हैं पंजीयन

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रायपुर। सोशल वेलफेयर सोसायटी द्वारा रविवार 29 जुलाई को निरंजन धर्मशाला VIP रोड रायपुर में नि:शुल्क पुनर्विवाह का आयोजन रखा गया है। संस्था ने जानकारी देते हुए बताया कि  नेचर्स केयर एंड सोशल वेलफेयर सोसायटी द्वारा हर वर्ष कि तरह इस साल भी समाज में व्याप्त कुरीतियों को पुर्ण रूपेण दूर करने हेतु संकल्पित सर्व समाज हित व राष्ट्र उत्थान हेतु विधवा कात्यायनी व वैध परित्यक्ता पुनर्विवाह परिचय सम्मेलन प्रथम चरण हेतु भारत के सभी राज्यों से आवेदन आमंत्रित किए गए है।

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इन नंबरों पर कर सकते हैं संपर्क

स्थान: निरंजन धर्मशाला VIP रोड रायपुर (छ.ग.)

समय :  9:30  प्रातः

98261-91068, 91790-62989, 97701-10001

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जानिए  क्या है  विधवा पुनर्विवाह अधिनियम

विधवा पुनर्विवाह अधिनियम, 1856 में ब्रिटिश भारत में ब्राह्मण, राजपूतों, बनिया और कायस्थ जैसे कुछ अन्य जातियों के बीच मुख्य रूप से विधवापन अभ्यास पर रोक लगाने हेतु पारित किया गया था।

यह कानून बच्चे और विधवाओं के लिए एक राहत के रूप में तैयार किया गया था जिसके पति की समय से पहले मृत्यु हो गई हो।

हिंदू विधवा पुनर्विवाह अधिनियम 1856 हिंदू जाति में जो पूर्व की विवाह परंपरा थी

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उसमें विवाह अधिनियम 1856 के अधिनियम के द्वारा सभी अड़चने द्वेष आदि को इस अधिनियम के तहत समाप्त कर दिया गया

और इसमें नवीन पद्धतियों को जन्म दिया गया उस समय भारत ब्रिटिश अधीन था इसलिए भारत को ब्रिटिश भारत कहा जाता था

यह सुधार हिंदू विवाह के विधवाओं के लिए सबसे बड़ा सुधार था

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पुरातन समय में किसी औरत के पति की मृत्यु हो जाने पर उसे उसकी चिता के साथ जलना होता था या सर मुंडवाना होता था आदि ऐसी जटिल प्रक्रियाएं थी लेकिन इस अधिनियम के तहत कुछ प्रमुख सुधार लाए गए है कि जिन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित है

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  • यदि किसी स्त्री के पति की मृत्यु हो जाती है तो वह पुनर्विवाह कर सकती है
  •  इस विवाह में उसके सगे संबंधी अर्थात माता पिता भाई दादा नाना नानी आदि संबंधियों के द्वारा बात करके दूसरे विवाह को मंजूरी दी जा सकती है यथा पुनर्विवाह करने वाली महिला अल्पवयस्क है
  • विवाह में सहमति का होना अत्यंत आवश्यक है
  • जिस घर कि वह पहले बहु थी अर्थात उसके मृत्यु वाले पति का घर उस पर उसका कोई संपत्ति के तौर पर अधिकार नहीं होगा जहां वह पुनर्विवाह के बाद जाएगी वहां उसका अधिकार माना जाएगा

 

 

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