मोबाइल वेरिफिकेशन का दिख रहा असर, अनट्रेसड नंबर्स हो रहे जीरो, कलेक्टर की पहल पर शुरू की गयी व्यवस्था

रायगढ़। कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए किये जा रहे प्रयासों के बीच अनट्रेस केसेस को ट्रैक करना जिला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रहा है। अनट्रेस केस उन्हें कहा जाता है जो टेस्टिंग के दौरान गलत मोबाइल नंबर या जो चालू नही हैं ऐसे नंबर दे दिया करते थे। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद ऐसे लोगों को खोजने में बड़ी मशक्कत करनी पड़ती रही है। कलेक्टर भीम सिंह की पहल पर अनट्रेसेस केसेस की संख्या घटा कर शून्य करने के लिए एक पृथक व्यवस्था शुरू की गई। जिसके तहत टेस्टिंग सेंटर में सैंपल देने के दौरान ही संबंधित व्यक्ति की मोबाइल नंबर और कांटेक्ट डिटेल वेरीफाई कर लिया जाता है।

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नंबर गलत हो या बंद हो तो चालू और सही नंबर की जानकारी ली जाती है तथा इसकी एंट्री सैंपल लेने के दौरान कर ली जाती है। यह व्यवस्था जिले के सभी टेस्टिंग सेंटर्स में शुरू की गयी है। इसके बाद यदि संबंधित व्यक्ति पॉजिटिव आता है तो उसके नंबर पर तत्काल संपर्क कर होम आईसोलेशन या हॉस्पिटल शिफ्टिंग की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। इसका फायदा यह हो रहा है कि पॉजिटिव आये व्यक्तियों की रिपोर्ट मिलने के बाद तुरंत पहचान कर आईसोलेट किया जा रहा है जिससे संबंधित व्यक्ति का समय से इलाज शुरू हो और संक्रमण को आगे बढऩे से रोका जा सके। मोबाइल नंबर वेरीफिकेशन का काम जिले के सभी टेस्टिंग सेंटर में किया जा रहा है। इसके लिये अलग से शिक्षकों की ड्यूटी टेस्टिंग सेंटर में लगाई गई है।

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प्रतिदिन इसकी रिपोर्टिंग भी जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा की जा रही है। प्राप्त जानकारी अनुसार 20 मई को जिले के टेस्टिंग सेंटर्स में कुल 1303 कोविड टेस्ट कराये गये है। टेस्टिंग के दौरान सभी के फोन नंबर को वेरीफाई किया गया। जिसमें से 8 लोगों के नंबर गलत मिले जिसको सुधरवाकर सही नंबर एन्ट्री करवायी गई। इस प्रकार सभी 1303 लोगों के सही कांटेक्ट नंबर की एन्ट्री की गई। जिससे अन्ट्रेस नंबर शून्य रहा। इसी प्रकार 19 मई को 1325 सेम्पलों का परीक्षण किया गया। जिसमें 8 व्यक्तियों के मोबाईल नंबर सुधरवाकर तथा स्वयं का नंबर नहीं होने पर परिचित का नंबर लेकर उसे वेरीफाई कर दर्ज किया गया। जिससे उस दिन भी अन्टे्रस केसेस शून्य रहा।