तड़के सुबह घरेलू सामान से भरा हुआ एक चार पहिया वाहन, पड़ोस के खाली मकान के सामने आकर हुवा खड़ा

महासमुन्द। तड़के सुबह घरेलू सामान से भरा हुआ एक चार पहिया वाहन, पड़ोस के खाली मकान के सामने आकर खड़ा हुवा। सवार लोगो ने जल्दी जल्दी समान वाहन से निकालकर उस मकान में शिप्ट कर दिया। कुछ देर बाद एक दाम्पति और 2 नन्ही बच्चियां उक्त मकान में प्रवेश किए।

शायद ये परिवार अन्यत्र तबादला पर यहां आए थे। अगली सुबह दोनो बच्चियां स्कूल बैग के साथ स्थानीय सरकारी स्कूल में पढ़ाई के लिए रवाना हो रही थी।

स्कूल प्रवेश करते ही इन दोनो को उत्सुकता से देखने वाले मासूम नजरो का तांता लग गया। ये उस समय कोई सेलिब्रिटी से कम नही लग रही थी। जैसे ही ये बच्चियां अपने दाखिला वाले कक्षा 4 में पहुँचे, वहां के सहपाठियों का भी यही कारवां चलता रहा।

बड़े गुरुजी ने उस क्लास पर आकर बच्चो के विषय मे जानकारी दी कि, ये नेहा और सीमा है,…… इनके पिताजी का तबादला होने से,  ये यहां पढ़ाई के लिए आए है। आशा है कि आप लोग अच्छे सहपाठी की भूमिका का निर्वहन करेंगे।

दोनो के चेहरे में पुराने मित्रों से बिछड़ने का दर्द और नए मित्रो के साथ खुद को ढालने का कसमकश देखा जा सकता था। कुछ ही दिन में वे सभी के साथ घुलमिल गई और सामान्य हो गई।

नए सहपाठियों के साथ पढ़ाई, खेल मस्ती, हसी, मजाक, लड़ाई-झगड़े, नोटबुक आदान-प्रदान करते हुए, वह सत्र कैसे गुजरा ?  उनको पता ही नही चला।

अगली कक्षा बोर्ड होने से पढ़ाई बड़े जोर शोर से चलने लगी थी। इसी बीच बड़े गुरुजी और नेहा सीमा के पापा कक्षा में प्रवेश करते है। पिताजी के हाथों में बच्चियों का TC था, और बड़े गुरुजी बता रहे थे कि वर्मा जी का तबादला हो चुका है। अब कल से दोनो बच्चियां स्कूल नही आएंगी।

सुनकर दोनो बच्चियों के आंखों से अश्रु की धाराएं अविरल बहती ही जा रही थी। उनके साथ-साथ अन्य सहायक अश्रु धाराए सहपाठियों के आंखों में देखे जा सकते थे।

बच्चियां अब पिताजी के साथ स्कूल से बाहर आ चुकी थी, और पिताजी गीली आँखियो से उन्हें नए स्कूल और शहर के बारे में अतिश्योक्ति लगाकर बता रहे थे।

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अनिल यादव(अभिअन्नु)

छत्तीसगढ़ पुलिस, महासमुन्द