”एक अभियान ! एक प्रयास” SI विकास शर्मा की इस कहानी को पढ़ बचपन की मीठी यादें दिल को छू लेगी….?   

विकास शर्मा: क्लब पारा का एक बहुत पुराना पीपल का पेड़ कुछ महीनों से अपनी लड़ाई लड़ रहा है ,ज़िन्दगी और मौत के बीच के खेल को खेल रहा है ..पानी के पाइप लाइन बिछाने के लिए इस पेड़ की मुख्य जड़ें कट गई थी ..उसके बाद एक लहलहाता पीपल का सबके आंखों के सामने धीरे धीरे मारने लगा ..बहुत सारे लोगों से बात की गई ..इसे बचाने के लिए …बचपन से उम्र के इस पड़ाव तक यह पेड़ न जाने हम जैसे कितनो को बड़े होते देखा है ..हंसते मुस्कुराते वो हमेशा अपनी ठंडक भरी हवाओं से निराश मन में एक उम्मीद भर दिया करता था..वो भी जीता था हमारे साथ, हम बड़े होते गए.. ठौर ठिकाने बदलते गए ,पास के सरकारी क़वाटर में न जाने कितने लोगों को इसने आते और जाते देखा था.. लोगों को परीक्षा में या किसी ज्योतिष की सलाह पर अपने पास दीपक जलाते देखा था …कितनों के पंतग को इसने अपने बाहों में सम्हाल लिया था …

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विकास शर्मा

हम जब भी उधर से गुजरते जब उसे देखते …

कभी उसके पत्ते झड़ जाया करते थे, तो कभी वह मुरझाया रहता …हममें से बहुत लोग सोचते थे  की शायद ही ये अब ये बचेगा उससे हमारा सिर्फ रिश्ता इतना था की हममें से बहुतों के बचपन से आजतक का वो साथी था। इस पीपल के पौधे ने हमसे कभी कुछ नहीं माँगा वो बढता ही रहा और एक दिन इतना बड़ा हो गया की जब भी हम बारीश में उधर गुजरते तो उसके नीचे खड़ा हो जाया करते। धुप में गुजरते हुए हमेशा उसके नीचे खड़ा हो जाते। उसे छूते तो ऐसा लगता की जैसे वह  कुछ हमसे कह रहा हो । “मै नहीं जानता  की इस बात में कितनी सच्चाई है की प्रत्येक आदमी की जीवन में एक ऐसा पेड़ होता है जो उसकी भावनाओं को समझता है, आपके निराश हो जाने पर वो मुरझा जाता है आपके खुश होने पर वो भी लहलहाने लगता है। यकीन मानिए उससे आपका इनता गहरा रिश्ता जुड़ जायेगा …की उसके नहीं रहने पर  आप अपने आँखों से गिरते हुए आंसुओं को रोक नहीं पाएंगे।कुछ दिनों शायद ये भी नही रहने  वाला है।मै जानता हूँ मेरा वो दोस्त एक दिन बिना बताये ही चला जायेगा ,मुझसे बिना कुछ मांगें। फिर शायद न मिल पाऊंगा उससे फिर क्लब पारा की राहों में। किसी पेड़ के चले जाने से शायद बहुतों को तो फर्क नहीं पड़ता । पर कुछ को तो पड़ता ही है ।

कांग्रेस चौक के अकोल का पेड़ याद है न..

उस पेड़ की शीतलता का अहसास धुप में छाता लगाकर काम करने वाले उन पुराने  लोगों से बेहतर कौन बता सकता है जो उसकी छांव में बैठा करते थे जब वो कटा था शायद इससे हम लोगों को फर्क नहीं पड़ा हो । वो तो वही बात सकते हैं जो उस पल में उस पेड़ के साथ जीये हैं… कितने पेड़ों को शहर के चौड़ी करन के लिए काटा गया है दोस्तों ..अब मत मरने दो और पेड़ों को ….

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एक अभियान है इस पेड़ को बचाने की ..

माननीय विधायक एवं संसदीय सचिव विनोद सेवन लाल चन्द्राकर को इस बात की जानकारी होने पर उन्होंने इस पेड़ को बचाने के प्रयास में हरसंभव मदद देते हुए कल दिनांक 04.04.2021 को उस पेड़ के पास आकर उसे देखकर उनके नगरपालिका को निर्देशित कर उस पेड़ के पास ही एक नल लगाने के आदेश दिया जिससे पेड़ को बचाने के प्रयास के साथ आस पास के दुकान वालों को पीने का पानी मिल सके ,इसके साथ ही पेड़ के आसपास को खुदवा कर उसमें खाद डालकर उसे बचाने का प्रयास किया जा रहा है अगर आपके पास और कोई राय हो जिससे इस पेड़ को बचाने में जिससे सहयोग मिल सके आप सादर आमंत्रित हैं।

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किसी को कुछ फर्क नहीं पड़ेगा उसके नहीं रहने से वो आज भी हमसे कुछ नहीं मांग रहा है ..,कल शायद वो न रहें

पर…पर….

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हे पीपल के पेड़ तुम बहुत याद आओगे

क्योंकि तुम न मिल पाओगे अब राहों में

दिनकर की तपिस में तुम ही जलते रहे

बारिश में तुम ही भींगते रहे

फिर भी खड़े रहे

अटल ,निश्चल ,निर्मल मौन

पर अब न रह पाओगे उन रहों में

कल थे ,आज जो हो

कल न रह पाओगे

चाह कर भी तुमसे

न मिल पाउँगा राहों में

लहूलुहान हो जाओगे,कट जाओगे

जानता हूँ मै फिर भी

कुछ न मांगोगे मुझसे

बेनाम ,अनजान सा

नीलाम हो जाओगे

किसी काष्ठागार से

मेरे दोस्त मुझे माफ़ कर देना…

हे पीपल के पेड़ तुम मुझे बहुत याद आओगे

क्योंकि तुम न मिल पाओगे अब राहों में….

इस पेड़ को बचाने में विधायक विनोद सेवन लाल चन्द्राकर जी ,बबलू हरपाल  के मोहल्ले की युवा टीम विकास शर्मा ,यतीन्द्र राव,आलोक शर्मा,लाल विजय सिंघ, विपिन शर्मा ,महेश मक्कड़, राधेकृष्ण दुबे,नीलमणी शर्मा,जैनेंद्र चन्द्राकर ,आदि प्रयास कर रहे हैं।

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