अंकित के खिलाफ साहू समाज में फूटा गुस्सा कहा- सत्तारूढ़ में पहुंच दिखा समाज में विद्वेष फैलाकर चमका रहा राजनीति…

बागबाहरा। छत्तीसगढ़ साहू संघ के प्रदेशाध्यक्ष अर्जुन हिरवानी, महासमुन्द जिलाध्यक्ष धरमदास साहू, बागबाहरा तहसील अध्यक्ष भेखलाल साहू, नगर अध्यक्ष प्रेम साहू ने महासमुन्द में आयोजित वर्चुअल प्रेसवार्ता में कहा है कि साहू समाज सुशिक्षित और मेहनती समाज है। सरल स्वभाव और सर्वजातीय, सर्वधर्म समभाव के साथ मानव समाज में हमारी एक अलग पहचान है। सभी जाति समाज के बीच समन्वय स्थापित कर सामाजिक बुराइयों को खत्म करने में साहू समाज अग्रणी भूमिका निभा रहा है। ‘न शोषण करेंगे और न ही अत्याचार बर्दास्त करेंगे’ यह साहू समाज का मूलमंत्र है। आर्थिक और बौद्धिक रूप से सम्पन्न होते हुए भी सहज, सरल स्वभाव वाले होने को कुछ लोग हमारी कमजोरी समझ लेते हैं। और अत्याचार करने का प्रयास करते हैं। हमारा समाज अत्याचार को बर्दाश्त नहीं करने वाला है।

ताजा मामला महासमुन्द जिले के बागबाहरा का है। जहां अंकित अग्रवाल उर्फ अंकित बागबाहरा नामक व्यक्ति ने स्थानीय एक व्हाट्सएप्प ग्रुप में सामाजिक सद्भावना को बिगाड़ने वाला वीडियो वायरल किया। इस वीडियो में साहू समाज की मां-बहनों के लिए नीचतापूर्ण शब्दों का इस्तेमाल किया गया है। तेली जाति को निम्नतर बताते हुए अपमानित करने वीडियो को वायरल कर अंकित ने ओछी मानसिकता का परिचय दिया है।

यह जग जाहिर है कि अंकित बागबाहरा प्रदेश में सत्तारूढ़ दल का कार्यकर्ता है। अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर साहू समाज में विद्वेष फैलाकर राजनीति चमकाने की मंशा रखता है। ऐसी निम्नतर स्तर की राजनीति का साहू समाज मुहतोड़ जवाब देने में सक्षम है। खल्लारी क्षेत्र में साहू समाज की बहुलता है। समाज की एकता और अखंडता रचनात्मक कार्यों में है। इसके चलते हमारी जाति विशेष (तेली) के प्रति ईर्ष्या-द्वेष रखते हैं। और ओछी राजनीति करते हुए सामाजिक समरसता को खत्म कर विभिन्न जाति समूह के बीच विद्वेष फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। सोची समझी रणनीति के तहत यह वीडियो वायरल किया गया है।

समाज में पनप रहा आक्रोश

साहू संघ के जिलाध्यक्ष धरमदास साहू ने प्रेसवार्ता में कहा कि आपत्तिजनक वीडियो 17 मई 2021 को 3:54 बजे अंकित द्वारा वायरल किया गया। इस पर नगर साहू समाज बागबाहरा, जिला साहू संघ के अनेक पदाधिकारियों ने आपत्ति की। और वीडियो को डिलीट कर खेद प्रकट करने का आग्रह किया। अड़ियल रवैया अपनाते हुए अंकित बागबाहरा ने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। तब ग्रुप एडमिन ने व्हाट्सएप्प ग्रुप से अंकित को हटाया। इसके बाद जन आक्रोश को देखते हुए  दूरभाष पर बातचीत कर मामले का पटाक्षेप करने का भी प्रयास किया। लेकिन, अंकित ने कोई सकारात्मक पहल नहीं कर जानबूझकर वीडियो वायरल करने को प्रमाणित किया। दो दिन तक अवसर दिया गया। 19 मई को दोपहर 12 बजे तक समाज से माफी मांग लेने का प्रस्ताव दूरभाष पर चर्चा करते हुए रखा।

जिसे दरकिनार कर दिया गया। जनाक्रोश को देखते हुए बागबाहरा थाना में 19 मई को दोपहर बाद लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई गई। इसके बाद भी मिल-बैठकर गिले शिकवे दूर करने, सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की पहल समाज की ओर से की गई। लेकिन, अंकित ने रायपुर में व्यस्त होने की बात कहकर बागबाहरा आने में असमर्थता जाहिर कर दी। इससे समाज में आक्रोश बढ़ता गया। इस प्रकरण को लेकर साहू समाज की वर्चुअल बैठक हुई। बैठक में सर्वसम्मति से यह प्रस्ताव पारित हुआ कि अंकित बागबाहरा को साहू समाज के पारिवारिक, सामाजिक, राजनीतिक गतिविधियों में शरीक होने से वंचित किया जाए। जब इसकी जानकारी आरोपी अंकित को हुई तब चालबाजी करते हुए मीडिया में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर क्षमा याचना करने की बात 20 मई को कही गई। तब तक सामाजिक निर्णय हो चुका था।

महासमुंद: कांग्रेस नेता अंकित बागबाहरा का साहू समाज ने किया सामाजिक-राजनैतिक बहिष्कार

पुलिस ने पत्रकार को किया था रातों-रात गिरफ्तार

साहू समाज के पदाधिकारियों का कहना है कि घटना के पांच दिन बाद मामले में जुर्म दर्ज किया गया। सभी सबूत पुलिस को सौंप दिया गया है। पुलिस ने भादवि की धारा 505 (2) के तहत अपराध पंजीबद्ध किया है। आप लोगों को याद होगा इसी धारा के तहत एक मामला दर्ज होने पर सिटी कोतवाली महासमुन्द पुलिस ने बिना तथ्य और साक्ष्य के ही जून 2019 में पत्रकार दिलीप शर्मा को रातोंरात गिरफ्तार किया था। जबकि, इस मामले में जांच-पड़ताल और पुख्ता सबूत होने के बावजूद अब तक गिरफ्तारी नहीं की गई है। इससे पुलिस का दोहरा चरित्र प्रदर्शित हो रहा है।

ऐसा लगता है कि पुलिस जानबूझकर आरोपी को फरार होने का अवसर प्रदान कर रही है। गैरजमानती और संज्ञेय अपराध होने से तत्काल गिरफ्तारी होनी चाहिए। हम चेतावनी दे रहे हैं कि 24 घंटे के भीतर पुलिस आरोपी को गिरफ्तार नहीं करती है तो साहू समाज के आक्रोशित युवा छत्तीसगढ़ के सभी थाने में उग्र प्रदर्शन और घेराव करने विवश होंगे। इससे कानून व्यवस्था बिगड़ने पर अंकित और पुलिस प्रशासन की संयुक्त जिम्मेदारी होगी। सत्तारूढ़ दल के नेता होने से जांच को प्रभावित करने, साक्षियों को धमकाने की भी आशंका है। इसलिए सत्तारूढ़ दल के प्रदेशाध्यक्ष से अंकित को तत्काल प्रभाव से पार्टी से निष्कासित करने और निष्पक्ष जांच कार्यवाही कराने में सहयोग करने की मांग भी की गई है।