अजब-गजब, इस 200 सौ साल पुरानी “ठेगहा पेड़” पर पक्षी भी नहीं बैठते

इस 200 साल पुरानी अजब-गजब पेड़ को लोग “ठेगहा पेड़” के नाम से जानते हैं। अति-दुर्लभ इस पेड़ का वास्तविक नाम क्या है आज भी संशय है।  

छत्तीसगढ़। महासमुंद जिले के कोमाखान में एक अजब-गजब पेड़ देखने को मिला है। इस पेड़ की आयु 200 सौ साल पुरानी बताई जा रही है। खास बात ये है कि पेड़ का लोग “ठेगहा पेड़” के नाम से जानते हैं। आश्चर्य तो इस बात की है कि इस पेड़ पर किसी तरह का कोई पक्षी नहीं बैठते।

कोमाखान राजाबाड़ा के उत्तरी परकोटे व ब्रिट्रिश कालीन कचहरी एवं ढाबा के सामने 200 वर्ष पुराना पेड़ इतिहास की गवाही दे रहा है, यह बहुत बड़ा तो नही है लेकिन, अपनी आयु का सबूत देता आपका इंतजार कर रहा है। ठा उदयप्रताप सिंह बताते हैं कि इस पेड़ को ठाकुर गिरिराज सिंह ने लगाया था। पेड़ का नाम तो पता नही है किंतु दुर्लभ किस्म का पेड़ है, इसमें पक्षी नही बैठते, आज तक इस पर पक्षी बैठते किसी ने नही देखा इसलिए लोग इसे ठेगहा पेड़ के नाम से पुकारते हैं।

फूल सिर्फ रात में

कुछ लोगों ने इस पेड़ का नाम टीडोलिया बताया। साल में दो बार फूल आते हैं इनके फूल रात में ही फूलते है सूर्योदय तक झड़ जाते हैं, सुगन्ध से वातावरण महक उठता है। फल लंबे तुम्बे के आकार में होते हैं जो बड़े होने पर मुड़ कर दिया रखने की स्टैंड की तरह हो जाते हैं। जानकार इसके पत्ते , छाल, फूल, फल को औषधि के रूप में उपयोग करते हैं। राहगीर आज भी इस पेड़ पर विश्राम कर अद्भुत आनन्द का अनुभव करते हैं। कोमाखान स्वसहायता समूह की महिलाएँ इसकी छांव में कुटीर उद्योग से तार जाली, का निर्माण करती है। इस पेड़ से जरूर रूबरू हो वो कुछ बोलना चाहता है, हमारे इतिहास को समेटे धरोहर है।

डा. विजय शर्मा ने बताया कि शायद ही ऐसे पेड़ आसपास में हो यह एक दुर्लभ प्रजाति के पेड़ है। आश्चर्य तो इस बात का है कि इस पेड़ में पक्षी नहीं बैठतें, इस बारे में जानकारी ली जा रही है।

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